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आखिर अंजाम तक पहुंचेंगे निर्भया के दोषी, सात साल 22 दिन बाद आया मौत का फरमान

Wed, 08 Jan 2020 04:00 AM IST
आसिम खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • 22 जनवरी को सुबह सात बजे चारों दोषियों को एक साथ दी जाएगी फांसी
  • पाटियाला हाउस कोर्ट ने मंगलवार शाम 4.48 बजे जारी किया डेथ वारंट
  • क्यूरेटिव याचिका व राष्ट्रपति से दया की गुहार लगाएंगे दोषियों के वकील
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निर्भया के दोषियों को होगी फांसी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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सात साल पहले देश को दहला देने वाले निर्भया सामूहिक दुष्कर्म मामले के दोषियों को फांसी पर लटकाने का दिन और वक्त मुकर्रर हो गया। पटियाला हाउस कोर्ट ने मंगलवार अपराह्न 4:48 बजे इस मामले के चारों दोषियों का डेथ वारंट जारी कर दिया। इसके मुताबिक 22 जनवरी सुबह 7 बजे निर्भया के गुनहगारों को तिहाड़ जेल में फांसी के फंदे पर लटकाया जाएगा। इस फैसले के बाद तिहाड़ में दोषियों की निगरानी बढ़ा दी गई है। वहीं, दोषियों के वकीलों ने कहा कि वह क्यूरेटिव पिटीशन और राष्ट्रपति से दया याचिका दायर करेंगे।

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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सतीश कुमार अरोड़ा ने लंबी सुनवाई के बाद मुकेश (32), विनय शर्मा (26), अक्षय कुमार सिंह (31) और पवन गुप्ता (25) का डेथ वारंट जारी किया। तिहाड़ जेल में बंद चारों दोषियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये पेश किया गया। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट से दोषियों की पुनर्विचार याचिका होने के बाद निर्भया के माता-पिता और अभियोजन पक्ष (दिल्ली सरकार) ने डेथ वारंट जारी करने की याचिका लगाई थी। इस पर सुनवाई के दौरान सरकारी वकील राजीव मोहन ने कोर्ट को बताया कि दोषियों की कोई भी याचिका किसी कोर्ट या राष्ट्रपति के यहां लंबित नहीं है। चारों की पुनर्विचार यचिका सुप्रीम कोर्ट खारिज कर चुका है। 

उन्होंने कहा, डेथ वॉरंट के बाद भी फांसी होने तक दया याचिका दायर कर की जा सकती है। कानूनन इसके लिए 14 दिन का समय मिलना चाहिए। इससे पहले दोपहर 2 बजे जज कोर्ट रूम में पहुंचे तो वकील एमएल शर्मा ने कहा कि वह मुकेश की ओर से पैरवी कर रहे हैं। दूसरी ओर, पिछली सुनवाई पर कोर्ट द्वारा मुकेश के लिए नियुक्त न्यायमित्र वृंदा ग्रोवर ने शर्मा का विरोध किया और स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की। इस पर कोर्ट ने शर्मा को वकालतनामा देने को कहा। पहले सत्र की सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला 3:30 बजे तक के लिए सुरक्षित रख लिया।
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मुकेश की मां ने रोते हुए कोर्ट से लगाई गुहार
कोर्ट की कार्रवाई 3:54 बजे जैसे ही दोबारा शुरू हुई मुकेश की मां रोते हुए पहुंची और बेटे के लिए दया की गुहार की। हालांकि कोर्ट ने उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया। इसके बाद चारों दोषियों को 4:07 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जज के समक्ष पेश किया गया। जज ने 4:33 बजे मीडिया को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग रूम से बाहर किया और करीब 15 मिनट बाद डेथ वॉरंट जारी कर दिया। जज ने कहा, इस बीच दोषी चाहें तो क्यूरेटिव पिटीशन या दया याचिका दाखिल कर सकते हैं। कोर्ट में मौजूदा निर्भया के माता-पिता ने फैसले पर संतुष्टि जाहिर करते हुए कहा कि उनकी बेटी को न्याय मिल गया।

वकीलों के बीच तीखी बहस
सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के वकीलों के बीच तीखी बहस हो गई। दोनों ओर से एक दूसरे पर मामले को लटकाने का आरोप लगाया गया। इस नाराज जज ने पूछा कि क्या अब इस देरी को लेकर भी जांच की जाए?

मुकेश और विनय के वकील एपी सिंह ने कहा कि हमारे पास क्यूरेटिव याचिका और दया याचिका का विकल्प है। हम सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव याचिका दाखिल करेंगे।

दोषियों के डमी को फंदे पर लटका कर परखी जाएगी प्रक्रिया

निर्भया के गुनहगारों का डेथ वारंट जारी होते ही जेल प्रशासन ने फांसी देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। नौ जनवरी को चोरों दोषियों के डमी को फंदे पर लटकाकर अभ्यास किया जाएगा। इसके लिए जेल प्रशासन ने दोषियों के वजन के मुताबिक डमी तैयार कर ली है। समय भी वही होगा जो 22 जनवरी को कोर्ट की ओर से मुकर्रर किया गया है। जेल सूत्रों का कहना है कि अदालत से डेथ वारंट जारी होने के बाद फांसी देने तक की जिम्मेदारी जेल प्रशासन की है। जेल प्रशासन दोषियों को फांसी देने से पहले उसकी पूरी तैयारी करता है। सूत्रों का कहना है कि बृहस्पतिवार सुबह सात बजे चोरों दोषियों के डमी को फंदे पर लटकाकर प्रक्रिया को परखा जाएगा। 

जेल अधिकारियों का कहना है कि जेल मैनुअल के मुताबिक फांसी देने से पहले डमी के जरिए इसका अभ्यास किया जाता है। इसमें यह देखा जाता है कि फांसी देने के समय किसी तरह की कोई दिक्कत न आए। डमी को फांसी देने से पहले दोषियों का वजन लिया जाएगा। फिर उसी वजन के डमी को फांसी पर लटकाया जाएगा। इससे देखा जाएगा कि वजन लटकने के बाद रस्सी की गांठ किस तरह से खुलती है। अधिकारियों के मुताबिक इस तरह के अभ्यास से गड़बड़ियों को दूर किया जाता है।

अब क्यूरेटिव पिटीशन-दया याचिका का विकल्प
सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव याचिका और राष्ट्रपति के समक्ष दाया याचिका दायर कर डेथ वारंट पर रोक की गुहार कर सकते हैं। हालांकि इस मामले में दोषियों को क्यूरेटिव याचिका के लिए पर्याप्त वक्त मिला था। तिहाड़ जेल प्रशासन ने दोषियों को दो बार नोटिस जारी कर क्यूरेटिव याचिका और दया याचिका के विकल्प का इस्तेमाल करने को कहा, इसके बावजूद याचिका दायर नहीं की गई। ऐसे में यह सुप्रीम कोर्ट पर निर्भर करेगा कि वह क्या फैसला देता है। वहीं, दया याचिका दायर करने पर उसके निपटारे तक डेथ वारंट रुक सकता है। अगर दोषियों ने इन विकल्पों का इस्तेमाल नहीं किया तो 22 जनवरी को फांसी दे दी जाएगी।

मेरठ का पवन देगा निर्भया के दरिंदों को फांसी
पूर्व पीएम इंदिरा गांधी के हत्यारों को फंदे पर लटकाने वाले जल्लाद कालू का बेटा पवन कुमार निर्भया के चारों दोषियों को फांसी देगा। डेथ वॉरंट जारी होने के बाद तिहाड़ जेल प्रशासन ने इसकी पुष्टि की है। मेरठ निवासी पवन का परिवार चार दशक से इस काम से जुड़ा है। पवन ने कहा कि वह शासन के आदेश का इंतजार कर रहे हैं। वहीं, तिहाड़ प्रशासन ने बताया फांसी की तारीख और समय बताते हुए जल्द ही पवन को पत्र भेजा जाएगा। चारों को तिहाड़ के जेल नंबर तीन में सजा दी जाएगी।

मेरी बेटी को सात साल बाद न्याय मिला
फैसले के बाद निर्भया की मां ने कहा कि मेरी बेटी को सात साल के इंतजार के बाद आखिर इंसाफ मिल गया। अब उसकी आत्मा को सुकून मिलेगा। अब 22 जनवरी सुबह सात बजे का इंतजार रहेगा, जब उन दंरिदों को फांसी दी जाएगी। इस फैसले से देश की बच्चियों और महिलाओं को इंसाफ मिला है। अब मौत भी आ जाए तो गम नहीं। क्योंकि बेटी को बता सकेंगे कि उसके गुनहगारों को सजा मिल गई।


बेटी के आखिरी लफ्ज कानों में गूंजते थे
फैसले के बाद निर्भया के पिता ने कहा कि आज मेरे लिए दिवाली सा त्योहार है। दिल करता है कि पटाखे चलाऊं और सबका मुंह मीठा करवाऊं। 16 दिसंबर 2012 से 7 जनवरी 2020 तक हर दिन हम तिल-तिलकर मरे और रोये हैं। बेटी के आखिरी लफ्ज हर वक्त कानों में गूंजते थे। उसने कहा था कि पांचों गुनहगारों सख्त से सख्त सजा मिले।

वो काली रात और निर्भया की चीख...

दिल्ली के मुनीरका में 16 दिसंबर 2012 की रात सड़क दौड़ रही बस में एक जिंदगी चीख रही थी.. वो हैवानों से गुहार लगा रही थी अपनी जान बख्शने के लिए, लेकिन 6 दरिंदों को तरस नहीं आया। उन्होंने कुछ ऐसा किया जिससे सुनकर पूरी दुनिया रो पड़ी। उस लड़की के साथ दरिंदों ने न सिर्फ दुष्कर्म किया बल्कि उसके जिस्म के साथ वो खिलवाड़ किया, जिसे सुनकर देश भर के लोग सिहर उठे।

दरिंदों ने लड़की के साथ दुष्कर्म किया और फिर उसे निर्वस्त्र हालत में चलती बस से नीचे फेंक दिया। वारदात के वक्त पीड़िता का दोस्त भी बस में था। दरिंदों ने उसके साथ भी मारपीट की और उसे भी बस से फेंक दिया था। इसके बाद पीड़िता को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। 

डॉक्टर ने जब निर्भया (बदला नाम) की हालत देखी तो वो भी रो पड़े। उनका कहना था कि आज तक उन्होंने हैवानियत की इस तरह की तस्वीर कभी नहीं देखी। निर्भया की हालत देखकर उनकी रूह भी कांप उठी। इलाज चला, लेकिन हालत में कुछ सुधार नहीं होने की वजह से  29 दिसंबर, 2012 को सिंगापुर भेजा गया। वहां इलाज के दौरान पीड़िता जिंदगी की जंग हार गई।

29 दिसंबर को निर्भया ने रात करीब सवा दो बजे दम तोड़ दिया था। पीड़िता की मां ने बताया था कि वह आखिरी दम तक जीना चाहती थी। इधर पुलिस निर्भया के दोषियों को खोजना शुरू कर दिया। 

पूरे घटनाक्रम पर नजर

  • 18 दिसंबर 2012 : दिल्ली पुलिस ने चारों दोषियों राम सिंह, मुकेश, विनय शर्मा और पवन गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया।
  • 21 दिसंबर:   इस मामले में एक नाबालिग को दिल्ली से और छठे दोषी अक्षय ठाकुर को बिहार से गिरफ्तार कर लिया।  
  • 29 दिसंबर:  निर्भया ने सिंगापुर अस्पताल में दम तोड़ दिया ।
  • 3 जनवरी 2013 : पुलिस ने को पांच वयस्क दोषियों के खिलाफ हत्या, गैंगरेप, हत्या की कोशिश, अपहरण, डकैती का केस दर्ज करने के बाद चार्जशीट दाख़िल की। फास्ट ट्रैक कोर्ट में केस चलाने का दिया गया आदेश।
  • 17 जनवरी: फास्ट ट्रैक कोर्ट ने पांचों दोषियों पर आरोप तय किए।
  • 11 मार्च: तिहाड़ जेल में मुख्य आरोपी राम सिंह ने खुदकुशी कर ली।
  • 10 सितंबर: फास्ट ट्रैक कोर्ट ने चार आरोपियों मुकेश, विनय, पवन और अक्षय को दोषी ठहराया।
  • 13 सितंबर : कोर्ट ने चारों दोषियों मुकेश, विनय, पवन और अक्षय को मौत की सजा सुनाई।
  • 13 मार्च 2014 : दिल्ली हाईकोर्ट ने को चारों दोषियों की मौत की सजा को बरकरार रखा ।
  • 15 मार्च  : सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों को फांसी दिए जाने पर लगाई रोक ।
  • 20 दिसंबर 2015 : नाबालिग अपराधी को बाल सुधार गृह से रिहा कर दिया गया।
  • 27 मार्च 2016 : सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों की याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा।
  • 5 मई 2017 : सुप्रीम कोर्ट ने चारों दोषियों की मौत की सजा बरकरार रखी।
  • 9 नवंबर 2017 : दोषी मुकेश ने सुप्रीम कोर्ट में फांसी की सजा बरकरार रखने के फैसले पर पुनर्विचार याचिका दायर की, जिसे खारिज कर दिया गया।
  • 9 जुलाई 2018 : दोषियों द्वारा दाखिल की गई रिव्यू पिटिशन को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज करते हुए मौत की सजा को बरकरार रखा।
  • 4 दिसंबर 2019 :  दोषियों की दया याचिका को दिल्ली सरकार ने खारिज कर दिया।
  • 7 जनवरी 2020 : निर्भया के चार दोषियों का डेथ वारंट जारी। 22 जनवरी को फांसी की तारीख मुकर्रर की गई।

निर्भया की मां बोली, मेरी बेटी को आज मिला इंसाफ

निर्भया के गुनहगारों को डेथ वारंट मिलने की खबर के साथ ही अदालत में उसकी मां की आंखों में खुशी के आंसू छलक उठे। भरे गले से बोली कि मेरी बेटी को लंबे इंतजार के बाद आखिर इंसाफ मिल ही गया। अब उसकी आत्मा को सुकून मिलेगा। बस.....अब 22 जनवरी सुबह सात बजे का इंतजार रहेगा, जब उन चारों  दंरिदों को फांसी के फंदे पर लटकाया जाएगा। अमर उजाला से बातचीत में निर्भया की मां ने कहा कि अदालत के फैसले से देश की बच्चियों और महिलाओं को इंसाफ मिला है। न्यायपालिका ने मेरे भरोसे को पूरा किया। 

हर दर्द में मेरा साथ देने और दोषियों को फांसी के फंदे तक पहुंचाने के लिए हमेशा मेरे साथ खड़े रहने वालों और पूरे देश का धन्यवाद। चारों दोषियों की सजा देश की महिलाओं को सशक्त बनाएगी। इस फैसले से न्यायिक प्रणाली में लोगों का विश्वास और मजबूत होगा। अब मौत भी आ जाए तो कोई गम नहीं क्योंकि बेटी के पास जाने पर उसके गुनहगारों को सजा दिलाने की बात तो कह सकते हैं।

आज मेरे लिए दिवाली सा त्योहार
निर्भया के पिता ने कहा कि अदालत के फैसले से बेहद खुश हूं। आज मेरे लिए दिवाली सा त्योहार है। दिल करता है कि पटाखे चलाएं और सबका मुंह मीठा करवाऊं, क्योंकि 16 दिसंबर 2012 से 7 जनवरी 2020 तक हर दिन हम तिल-तिल मरे और रोये हैं। न्यायपालिका ने मेरी बेटी को आखिरी इंसाफ दिला ही दिया। 

मेरी बेटी के वो आखिरी पल हर वक्त कानों में गूंजते थे। जब उसने पांचों गुनहगारों को सख्त से सख्त सजा देने की मांग रखी थी। पांचवां तो उम्र कम होने के चलते बच गया पर उसे कभी माफ नहीं करेंगे। सरकार से मांग करते हैं कि उसकी भी समय-समय पर जांच करते रहे। क्योंकि एक बार गुनाह करने वाला कभी नहीं सुधरता।
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तिहाड़ जेल में नया फांसी घर पहले से तैयार

निर्भया के गुनहगारों को फांसी देने के लिए तिहाड़ जेल में नया फांसी घर बना लिया गया है। तिहाड़ जेल प्रशासन ने जेल संख्या तीन में पुराने फांसी घर से 10 फुट की दूरी पर नया फांसी घर तैयार किया है। इसमें 25 लाख रुपये की लागत आई है। दरअसल निर्भया के दोषियों को फांसी देने के लिए तिहाड़ में काफी समय से तैयारियां चल रही हैं। इसमें फांसी घर की मरम्मत के साथ-साथ जल्लाद की व्यवस्था करना तक शामिल था। 

इस दौरान यह बात सामने आई कि इससे पहले तिहाड़ में चार दोषियों को एक साथ फांसी नहीं दी गई है और न ही तिहाड़ में एक साथ चार दोषियों को फांसी पर लटकाने की व्यवस्था है। यहां केवल एक साथ दो दोषियों को ही एक साथ फांसी देने की व्यवस्था थी। इस संबंध में अधिकारियों की बैठक हुई, जिसमें फांसी घर के प्लेटफार्म को बढ़ाने पर विचार किया गया, लेकिन बाद में एक और फांसी घर बनाने की मंजूरी दी गई और इसके लिए 25 लाख रुपये आवंटित किए गए। 

दिल्ली सरकार के लोक निर्माण विभाग ने जेल नंबर तीन में स्थित पुराने फांसी घर के पास ही एक नए फांसी घर का निर्माण किया, जिसमें दो दोषियों को एक साथ फांसी देने की व्यवस्था की गई है। अब तिहाड़ प्रशासन चारों दोषियों को फांसी देने के लिए दो जल्लाद को भी बुला सकती है। 

जेल महानिदेशक संदीप गोयल ने बताया कि चारों दोषियों को एक साथ ही फांसी दी जाएगी। इसकी व्यवस्था कर ली गई है। जेल अधिकारियों के मुताबिक तीन दोषियों विनय, पवन और अक्षय ने एक सप्ताह के भीतर ही जेल प्रशासन को अपना जवाब भेज दिया था, जिसमें उसने क्यूरेटिव याचिका लगाने का विकल्प होने की बात कही थी। वहीं, बाद में एक अन्य दोषी मुकेश ने भी जवाब दाखिल कर कानूनी विकल्प होने की बात कही है। 
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