निर्भया के गुनहगारों का डेथ वारंट जारी होते ही जेल प्रशासन ने फांसी देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। नौ जनवरी को चोरों दोषियों के डमी को फंदे पर लटकाकर अभ्यास किया जाएगा। इसके लिए जेल प्रशासन ने दोषियों के वजन के मुताबिक डमी तैयार कर ली है। समय भी वही होगा जो 22 जनवरी को कोर्ट की ओर से मुकर्रर किया गया है। जेल सूत्रों का कहना है कि अदालत से डेथ वारंट जारी होने के बाद फांसी देने तक की जिम्मेदारी जेल प्रशासन की है। जेल प्रशासन दोषियों को फांसी देने से पहले उसकी पूरी तैयारी करता है। सूत्रों का कहना है कि बृहस्पतिवार सुबह सात बजे चोरों दोषियों के डमी को फंदे पर लटकाकर प्रक्रिया को परखा जाएगा।
जेल अधिकारियों का कहना है कि जेल मैनुअल के मुताबिक फांसी देने से पहले डमी के जरिए इसका अभ्यास किया जाता है। इसमें यह देखा जाता है कि फांसी देने के समय किसी तरह की कोई दिक्कत न आए। डमी को फांसी देने से पहले दोषियों का वजन लिया जाएगा। फिर उसी वजन के डमी को फांसी पर लटकाया जाएगा। इससे देखा जाएगा कि वजन लटकने के बाद रस्सी की गांठ किस तरह से खुलती है। अधिकारियों के मुताबिक इस तरह के अभ्यास से गड़बड़ियों को दूर किया जाता है।
अब क्यूरेटिव पिटीशन-दया याचिका का विकल्प
सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव याचिका और राष्ट्रपति के समक्ष दाया याचिका दायर कर डेथ वारंट पर रोक की गुहार कर सकते हैं। हालांकि इस मामले में दोषियों को क्यूरेटिव याचिका के लिए पर्याप्त वक्त मिला था। तिहाड़ जेल प्रशासन ने दोषियों को दो बार नोटिस जारी कर क्यूरेटिव याचिका और दया याचिका के विकल्प का इस्तेमाल करने को कहा, इसके बावजूद याचिका दायर नहीं की गई। ऐसे में यह सुप्रीम कोर्ट पर निर्भर करेगा कि वह क्या फैसला देता है। वहीं, दया याचिका दायर करने पर उसके निपटारे तक डेथ वारंट रुक सकता है। अगर दोषियों ने इन विकल्पों का इस्तेमाल नहीं किया तो 22 जनवरी को फांसी दे दी जाएगी।
मेरठ का पवन देगा निर्भया के दरिंदों को फांसी
पूर्व पीएम इंदिरा गांधी के हत्यारों को फंदे पर लटकाने वाले जल्लाद कालू का बेटा पवन कुमार निर्भया के चारों दोषियों को फांसी देगा। डेथ वॉरंट जारी होने के बाद तिहाड़ जेल प्रशासन ने इसकी पुष्टि की है। मेरठ निवासी पवन का परिवार चार दशक से इस काम से जुड़ा है। पवन ने कहा कि वह शासन के आदेश का इंतजार कर रहे हैं। वहीं, तिहाड़ प्रशासन ने बताया फांसी की तारीख और समय बताते हुए जल्द ही पवन को पत्र भेजा जाएगा। चारों को तिहाड़ के जेल नंबर तीन में सजा दी जाएगी।
मेरी बेटी को सात साल बाद न्याय मिला
फैसले के बाद निर्भया की मां ने कहा कि मेरी बेटी को सात साल के इंतजार के बाद आखिर इंसाफ मिल गया। अब उसकी आत्मा को सुकून मिलेगा। अब 22 जनवरी सुबह सात बजे का इंतजार रहेगा, जब उन दंरिदों को फांसी दी जाएगी। इस फैसले से देश की बच्चियों और महिलाओं को इंसाफ मिला है। अब मौत भी आ जाए तो गम नहीं। क्योंकि बेटी को बता सकेंगे कि उसके गुनहगारों को सजा मिल गई।
बेटी के आखिरी लफ्ज कानों में गूंजते थे
फैसले के बाद निर्भया के पिता ने कहा कि आज मेरे लिए दिवाली सा त्योहार है। दिल करता है कि पटाखे चलाऊं और सबका मुंह मीठा करवाऊं। 16 दिसंबर 2012 से 7 जनवरी 2020 तक हर दिन हम तिल-तिलकर मरे और रोये हैं। बेटी के आखिरी लफ्ज हर वक्त कानों में गूंजते थे। उसने कहा था कि पांचों गुनहगारों सख्त से सख्त सजा मिले।
दिल्ली के मुनीरका में 16 दिसंबर 2012 की रात सड़क दौड़ रही बस में एक जिंदगी चीख रही थी.. वो हैवानों से गुहार लगा रही थी अपनी जान बख्शने के लिए, लेकिन 6 दरिंदों को तरस नहीं आया। उन्होंने कुछ ऐसा किया जिससे सुनकर पूरी दुनिया रो पड़ी। उस लड़की के साथ दरिंदों ने न सिर्फ दुष्कर्म किया बल्कि उसके जिस्म के साथ वो खिलवाड़ किया, जिसे सुनकर देश भर के लोग सिहर उठे।
दरिंदों ने लड़की के साथ दुष्कर्म किया और फिर उसे निर्वस्त्र हालत में चलती बस से नीचे फेंक दिया। वारदात के वक्त पीड़िता का दोस्त भी बस में था। दरिंदों ने उसके साथ भी मारपीट की और उसे भी बस से फेंक दिया था। इसके बाद पीड़िता को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया।
डॉक्टर ने जब निर्भया (बदला नाम) की हालत देखी तो वो भी रो पड़े। उनका कहना था कि आज तक उन्होंने हैवानियत की इस तरह की तस्वीर कभी नहीं देखी। निर्भया की हालत देखकर उनकी रूह भी कांप उठी। इलाज चला, लेकिन हालत में कुछ सुधार नहीं होने की वजह से 29 दिसंबर, 2012 को सिंगापुर भेजा गया। वहां इलाज के दौरान पीड़िता जिंदगी की जंग हार गई।
29 दिसंबर को निर्भया ने रात करीब सवा दो बजे दम तोड़ दिया था। पीड़िता की मां ने बताया था कि वह आखिरी दम तक जीना चाहती थी। इधर पुलिस निर्भया के दोषियों को खोजना शुरू कर दिया।
निर्भया के गुनहगारों को डेथ वारंट मिलने की खबर के साथ ही अदालत में उसकी मां की आंखों में खुशी के आंसू छलक उठे। भरे गले से बोली कि मेरी बेटी को लंबे इंतजार के बाद आखिर इंसाफ मिल ही गया। अब उसकी आत्मा को सुकून मिलेगा। बस.....अब 22 जनवरी सुबह सात बजे का इंतजार रहेगा, जब उन चारों दंरिदों को फांसी के फंदे पर लटकाया जाएगा। अमर उजाला से बातचीत में निर्भया की मां ने कहा कि अदालत के फैसले से देश की बच्चियों और महिलाओं को इंसाफ मिला है। न्यायपालिका ने मेरे भरोसे को पूरा किया।
हर दर्द में मेरा साथ देने और दोषियों को फांसी के फंदे तक पहुंचाने के लिए हमेशा मेरे साथ खड़े रहने वालों और पूरे देश का धन्यवाद। चारों दोषियों की सजा देश की महिलाओं को सशक्त बनाएगी। इस फैसले से न्यायिक प्रणाली में लोगों का विश्वास और मजबूत होगा। अब मौत भी आ जाए तो कोई गम नहीं क्योंकि बेटी के पास जाने पर उसके गुनहगारों को सजा दिलाने की बात तो कह सकते हैं।
आज मेरे लिए दिवाली सा त्योहार
निर्भया के पिता ने कहा कि अदालत के फैसले से बेहद खुश हूं। आज मेरे लिए दिवाली सा त्योहार है। दिल करता है कि पटाखे चलाएं और सबका मुंह मीठा करवाऊं, क्योंकि 16 दिसंबर 2012 से 7 जनवरी 2020 तक हर दिन हम तिल-तिल मरे और रोये हैं। न्यायपालिका ने मेरी बेटी को आखिरी इंसाफ दिला ही दिया।
मेरी बेटी के वो आखिरी पल हर वक्त कानों में गूंजते थे। जब उसने पांचों गुनहगारों को सख्त से सख्त सजा देने की मांग रखी थी। पांचवां तो उम्र कम होने के चलते बच गया पर उसे कभी माफ नहीं करेंगे। सरकार से मांग करते हैं कि उसकी भी समय-समय पर जांच करते रहे। क्योंकि एक बार गुनाह करने वाला कभी नहीं सुधरता।
निर्भया के गुनहगारों को फांसी देने के लिए तिहाड़ जेल में नया फांसी घर बना लिया गया है। तिहाड़ जेल प्रशासन ने जेल संख्या तीन में पुराने फांसी घर से 10 फुट की दूरी पर नया फांसी घर तैयार किया है। इसमें 25 लाख रुपये की लागत आई है। दरअसल निर्भया के दोषियों को फांसी देने के लिए तिहाड़ में काफी समय से तैयारियां चल रही हैं। इसमें फांसी घर की मरम्मत के साथ-साथ जल्लाद की व्यवस्था करना तक शामिल था।
इस दौरान यह बात सामने आई कि इससे पहले तिहाड़ में चार दोषियों को एक साथ फांसी नहीं दी गई है और न ही तिहाड़ में एक साथ चार दोषियों को फांसी पर लटकाने की व्यवस्था है। यहां केवल एक साथ दो दोषियों को ही एक साथ फांसी देने की व्यवस्था थी। इस संबंध में अधिकारियों की बैठक हुई, जिसमें फांसी घर के प्लेटफार्म को बढ़ाने पर विचार किया गया, लेकिन बाद में एक और फांसी घर बनाने की मंजूरी दी गई और इसके लिए 25 लाख रुपये आवंटित किए गए।
दिल्ली सरकार के लोक निर्माण विभाग ने जेल नंबर तीन में स्थित पुराने फांसी घर के पास ही एक नए फांसी घर का निर्माण किया, जिसमें दो दोषियों को एक साथ फांसी देने की व्यवस्था की गई है। अब तिहाड़ प्रशासन चारों दोषियों को फांसी देने के लिए दो जल्लाद को भी बुला सकती है।
जेल महानिदेशक संदीप गोयल ने बताया कि चारों दोषियों को एक साथ ही फांसी दी जाएगी। इसकी व्यवस्था कर ली गई है। जेल अधिकारियों के मुताबिक तीन दोषियों विनय, पवन और अक्षय ने एक सप्ताह के भीतर ही जेल प्रशासन को अपना जवाब भेज दिया था, जिसमें उसने क्यूरेटिव याचिका लगाने का विकल्प होने की बात कही थी। वहीं, बाद में एक अन्य दोषी मुकेश ने भी जवाब दाखिल कर कानूनी विकल्प होने की बात कही है।