समीक्षा बैठक में हालांकि मंत्रिमंडल में फेरबदल पर कोई बात नहीं हुई है लेकिन जिस प्रकार मंत्रालयों के कामकाज की समीक्षा हुई है और पीएमओ ने रोडमैप तैयार करने का निर्देश दिया है, उसे विस्तार से जोड़ कर देखा जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि पीएम ज्यादातर मंत्रालयों के कामकाज के रफ्तार से संतुष्ट नहीं हैं।
गौरतलब है कि पहले कार्यकाल के 70 मंत्रियों की तुलना में दूसरे कार्यकाल में महज 57 मंत्री हैं। इनमें कई मंत्री दोहरी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, जबकि महज तीन सहयोगियों को ही मंत्रिमंडल में जगह मिली है। सूत्रों का कहना है कि विस्तार बजट सत्र के प्रथम चरण और दिल्ली विधानसभा चुनाव के बाद संभव है। चुनाव के तत्काल बाद भाजपा में नए अध्यक्ष की नियुक्ति के साथ संगठन में फेरबदल होगा और इसके बाद विस्तार का रास्ता साफ हो जाएगा।
सहयोगियों को साधना जरूरी
वर्तमान मंत्रिमंडल में जदयू, अपना दल, अन्नाद्रमुक को प्रतिनिधित्व नहीं है। सरकार की कोशिश वाईएसआर कांग्रेस को भी साधने की है। खासतौर से बिहार में इसी साल विधानसभा चुनाव है। जबकि दक्षिण में पार्टी अपना आधार बढ़ाना चाहती है। भावी पुख्ता रणनीति के तहत सहयोगियों से तालमेल बढ़ाने के लिए राजग में भी कायाकल्प पर माथापच्ची हो रही है।