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वैश्विक महामारी से देश में लोगों की मौत का आंकड़ा एक लाख के पार

Sat, 03 Oct 2020 05:32 AM IST
Kuldeep Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना वायरसः जांच के नमूने लेते कर्मचारी - फोटो : अमर उजाला
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वैश्विक महामारी से देश में लोगों की मौत का आंकड़ा एक लाख के पार पहुंच गया। विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा शुक्रवार रात जारी आंकड़ों के मुताबिक, संक्रमितों की संख्या 64,64,012 पहुंच गई। वहीं, 54,15,197 लोग महामारी को मात दे चुके हैं। देश में कोरोना का पहला मामला 30 जनवरी को विदेश से आए व्यक्ति में सामने आया था।

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30 जनवरी से 31 मई के बीच 122 दिनों में कोरोना के 1.82 लाख मामले सामने आए और 5,405 लोगों की जान गई। कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच 25 मार्च से पूर्ण लॉकडाउन लागू किया गया था। वहीं, एक जून से शुरू अनलॉक के बाद 124वें दिन यानी दो अक्तूबर को मृतकों का आंकड़ा 1,00,768 हो गया।

घोड़ों के प्लाज्मा से तैयार एंटी सीरम से होगा इलाज
वैज्ञानिकों ने इंसानों के बाद अब घोड़ों से प्लाज्मा लेकर एंटी सीरम तैयार किया है। दावा किया जा रहा है कि यह एंटीसिरम कोरोना संक्रमण के गंभीर मामलों में काफी फायदा दे सकता है। पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अधीन पशुओं पर परीक्षण के नियंत्रण एवं पर्यवेक्षण के प्रयोजनार्थ समिति की अनुमति से भारतीय वैज्ञानिकों ने घोड़ों पर एक अध्ययन शुरू किया था।
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मेडिकल जनरल रिसर्च स्क्वायर में प्रकाशित यह अध्ययन पुणे स्थित एनआईवी और हैदराबाद बायोलॉजिकल ई लिमिटेड कंपनी के वैज्ञानिकों ने मिलकर किया है। करीब 6 माह अध्ययन के बाद अब एंटी सीरम का उत्पादन शुरू कर दिया है। जल्द ही यह बाजार में आ सकता है।

पहले भी इस्तेमाल आईसीएमआर के अध्ययन के अनुसार, प्लाज्मा थेरेपी की वजह से मौत की आशंका को कम नहीं किया जा सकता है। ऐसे में घोड़ों से प्राप्त प्लाज्मा का असर कैसे होने के सवाल पर पुणे स्थित एनआईवी के डॉक्टर गजानंद सपकाल ने कहा कि आज से पहले सांप बिच्छू काटने, रेबीज, गलघोंटू बीमारी, टिटनेस के उपचार में भी इस तकनीक का लाभ पूरी दुनिया देख चुकी है। यह सच है कि इंसान उसे हासिल प्लाज्मा के अच्छे परिणाम नहीं मिल रहे हैं लेकिन घोड़ों से प्राप्त यह इम्यूनोग्लोबुलीन असरदायक है।

घोड़ों को किया को  कोरोना संक्रमित...
एनआईवी की लैब से अष्क्रिय वायरस लेकर 10 घोड़ों को दिया गया था। 21 दिन बाद जब रैपिड किड्स के जरिए घोड़ों का ब्लड लेकर जांच की गई तो उसमें एंटीबॉडी मिले। इसके बाद पुलिंग तकनीक के जरिए प्लाज्मा को तैयार किया और फिर इसके शुद्धिकरण की प्रक्रिया को जारी रखते हुए एंटी सीरम तैयार किया है।

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