26/11 मुंबई आतंकी हमले में पाकिस्तान की नापाक हरकतों को बेनकाब करने वाले पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी आतंकवादी डेविड कोलमैन हेडली ने बुधवार को बताया कि उसे आतंकी संगठन लश्कर-ए-ताइबा की ओर से कोई पैसे नहीं मिले थे, बल्कि उसने ही लश्कर-ए-ताइबा को 60-70 लाख पाकिस्तानी रुपये की फंडिंग की थी। हेडली ने मुंबई की विशेष अदालत में कहा कि लश्कर-ए-ताइबा की ओर से शिकागो में आव्रजन कारोबार चलाने वाला उसका साथी एवं पाकिस्तानी नागरिक तहव्वुर राणा उसके लश्कर के संबंधों के बारे में जानता था।
मुंबई आतंकवादी हमले के कथित मुख्य साजिशकर्ता अबू जुंदाल के वकील अब्दुल वहाब खान ने मुंबई सत्र न्यायाधीश जीए सानप की अदालत में हेडली से वीडियो लिंक के जरिए जिरह की। मामले में सरकारी गवाह बना हेडली फिलहाल अमेरिका में 35 साल की सजा काट रहा है और वहीं से वीडियो लिंक के जरिए मुंबई की अदालत में हाजिर हुआ। अबू जुंदाल के वकील खान के जिरह में हेडली ने कहा कि उसने साल 2006 या उससे पहले लश्कर को जो रकम दी थी, वह न्यूयॉर्क मेें अपने बिजनेस और पाकिस्तान में प्रापर्टी बेचकर कमाया था।
हेडली ने बताया कि साल 1992-1998 के दौरान पाकिस्तान दौरे के लिए डायरेक्ट्रेट ऑफ इनफोर्समेंट एजेंसी ने उसे फंडिंग की थी। 2002 में संयुक्त अरब अमीरात और पाकिस्तान में उसने निवेश किया था। पाकिस्तान में उसकी दुकानें भी थी। लेकिन जब उससे यह पूछा गया कि क्या इस पैसे का 26/11 आतंकी हमले में इस्तेमाल किया गया, तो उसने अनभिज्ञता जताई। वहाब खान ने बताया कि हेडली के लश्कर के संबंधों की जानकारी तहव्वुर राणा को थी। उसने राणा को बताया था कि वह लश्कर के सदस्यों को न सिर्फ प्रशिक्षण देता है, बल्कि लश्कर के लिए जासूसी भी करता है। यह मुंबई हमलों से चार या पांच महीने पहले की बात है। उस समय राणा ने लश्कर के साथ उसके संबंध पर आपत्ति जताई थी। हेडली के मुताबिक राणा नहीं चाहता था कि मैं मुंबई में उसके ऑफिस का इस्तेमाल करूं। हेडली ने बताया कि उसकी आपत्तियों के मद्देनजर जुलाई 2008 में ऑफिस बंद करने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी।
हेडली ने पाकिस्तानी मूल की अपनी पत्नी शाजिया से जुड़े सवालों के जवाब देने से इनकार कर दिया। उसने कहा कि शाजिया अब भी कानूनी रूप से मेरी पत्नी है। उसकी सुरक्षा के मद्देनजर यह नहीं बता सकता कि शाजिया इस समय कहां है? हेडली ने कहा कि उसकी पत्नी कभी भारत नहीं आई, लेकिन उसे लश्कर के साथ अपने संबंध के बारे में बताया था। हेडली ने शाजिया को अपना नाम दाऊद गिलानी से बदलकर डेविड कोलमेन हेडली रखने की भी जानकारी दी थी। खान ने हेडली से शाजिया के बारे में बार-बार सवाल पूछे, तो विशेष सरकारी वकील उज्ज्वल निकम ने इस पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि भारतीय साक्ष्य कानून की धारा 122 के तहत पति और पत्नी के बीच के संवाद को विशेषाधिकार प्राप्त है और इसके बारे में जानकारी देने की आवश्यकता नहीं है।
इससे पहले हेडली ने 13 फरवरी से 20 फरवरी की सुनवाई के दरम्यान अमेरिका से वीडियो लिंक के जरिए मुंबई सत्र न्यायालय के समक्ष गवाही दी थी। उस समय अपनी गवाही में हेडली ने खुलासा किया था कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई पाक के आतंकवादी संगठन लश्कर, जैश-ए-मोेहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन को वित्तीय, सैन्य एवं नैतिक समर्थन मुहैया कराती है। हेडली ने बताया था कि लश्कर ने किस तरह मुंबई हमलों की साजिश रची और उसे अंजाम दिया। उसने यह भी दावा किया था कि गुजरात में कथित फर्जी मुठभेड़ में मारी गई इशरत जहां लश्कर की एक सदस्य थी।