भीषण गर्मी में धरती की कोख सूखने से पेयजल की विकराल समस्या खड़ी हो गई है। महरौनी क्षेत्र के ग्राम साढूमल में ट्यूबवेल ने पानी छोड़ दिया है, जबकि कस्बा बिरधा के दो बोर जवाब दे गए हैं। इसके अलावा महरौनी के भी दो बोर सूख गए हैं। ग्राम मदनपुर में जलस्तर नीचे चला गया है। इससे जलसंकट का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
इस समय गर्मी पूरे शबाब पर है। सुबह आठ बजे से चटक धूप पड़ने लगती है। दोपहर 12 बजे तक तो भगवान भास्कर रौद्र रूप में आ जाते है, जिसका विपरीत असर जल स्रोतों पर पड़ रहा है। हैंडपंप और कूपों के बाद अब ट्यूबवेलों ने भी पानी छोड़ना आरंभ कर दिया है। महरौनी में सात में से दो ट्यूबवेल जवाब दे गए हैं। कस्बा बिरधा में भी दो ट्यूबवेल पानी छोड़ चुके हैं। ग्राम साढूमल में जीवनदायनी बने ट्यूवबेल के सूखने से पानी को लेकर संकट पैदा हो गया है।
वहीं, जल संस्थान के अफसर अन्य जल स्रोतों के अभाव में वैकल्पिक व्यवस्था बनाने में नाकाम हो रहे हैं। इस कारण जल संकट दिनों-दिन गहराता जा रहा है। कस्बा बांसी व देवगढ़ में जलापूर्ति टैंकर के सहारे हो रही है। इस समय बांसी में सात टैंकरों ने जलापूर्ति की जा रही है। ग्राम देवगढ़ में भी ग्रामीणों की प्यास बुझाने के लिए टैंकर लगाए गए हैं।
नगर क्षेत्र भी पेयजल समस्या से अछूता नहीं है। मुहल्ला नेहरू नगर में भू-जल स्तर नीचे की ओर चला गया है। यहां आधा दर्जन टैंकरों से जलापूर्ति हो रही है। देवगढ़ रोड के आसपास रहने वाले के लिए चार टैंकर लगाए गए हैं। इसके अलावा मुहल्ला मऊठाना, खिरकापुरा, विष्णु पुरा व वंशीपुरा में टैंकर से लोगों की प्यास बुझाई जा रही है।
किराए पर लिए जा रहे ट्यूबवेल
पानी का संकट
- फोटो : amar ujala bureau
महरौनी में गहरा रहे पेयजल से निपटने के लिए निजी ट्यूबवेलों का सहारा लिया जा रहा है। जल संस्थान ने ग्राम पड़वा धवारी के एक किसान के ट्यूबवेल को किराए पर ले लिया है, जिससे जलापूर्ति हो रही है। अन्य क्षेत्रों में भी निजी ट्यूबवेलों को तलाश जा रहा है।
नगर क्षेत्र में लोगों की निर्भरता पाइप पेयजल पर बढ़ती जा रही है। इसकी वजह लगभग हर दिन 10 से 12 हैंडपंप खराब हो रहे हैं, जिनकी मरम्मत कराने में जल संस्थान को पसीने छूट रहे हैं।
यहां नीचे खिसका जलस्तर
ग्राम साढूमल, बिरधा, महरौनी, मदनपुर, देवगढ़ में जल स्तर नीचे खिसक गया है। इस कारण यहां पर पानी की समस्या पैदा हो गई है।