बौद्ध आध्यात्मिक नेता दलाई लामा ने बृहस्पतिवार को जम्मू में कहा कि वे चीन से आजादी नहीं चाहते, बल्कि स्वायत्तता की मांग रहे हैं। दलाई लामा ने उनके दौरे पर चीन की आपत्ति पर कहा कि उन्हें चीन की आपत्ति से फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि कुछ चीनी कट्टरपंथी उन्हें अलगाववादी और प्रतिक्रियावादी मानते हैं और आलोचना करते हैं।
लेकिन, हकीकत यह है कि चीन के लोग यह महसूस करने लगे हैं दलाई लामा चीन से आजादी नहीं, बल्कि सार्थक स्वायत्तता और तिब्बती बौद्ध संस्कृति का संरक्षण चाहते हैं। उन्होंने कहा, चीनी लोग तिब्बती बौद्ध धर्म के बारे में रुचि दिखा रहे हैं। बहुत से चीनी विद्वान भी महसूस कर रहे हैं कि तिब्बती बौद्ध धर्म असल में ऐसी ज्ञान और परंपराओं से भरा है, जो बहुत ही वैज्ञानिक हैं। दलाई लामा ने कहा कि 1950-60 के दशक में चीनी कट्टरपंथियों को लगता था कि सैन्य ताकत से तिब्बती मुद्दे को हल किया जा सकता है लेकिन हालात जस के तस हैं।
बौद्ध धर्मगुुरु लद्दाख रवाना 15 दिन की होगी यात्रा
तिब्बती बौद्ध धर्मगुुरु दलाईलामा 15 दिवसीय लद्दाख यात्रा के लिए बृहस्पतिवार सुबह धर्मशाला से रवाना हुए। कोरोना काल में करीब दो साल आइसोलेशन में रहने के बाद दलाईलामा की धर्मशाला से बाहर यह पहली यात्रा है। वहीं, उनके लद्दाख दौरे को लेकर चीन की भी पूरी नजर रहेगी।
भारत पर भड़क सकता है चीन
दलाईलामा ने 2018 में लद्दाख में अपना जन्मदिन मनाया था। उस दौरान भी चीन की तरफ से भारत के प्रति कड़ी प्रतिक्रिया आई थी। अभी जुलाई के पहले सप्ताह दलाईलामा के जन्मदिन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई दी थी। उस पर भी चीन ने कड़ी नाराजगी जताई थी।