फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दाभोलकर हत्याकांड: आरोपियों के खिलाफ यूएपीए के तहत मुकदमा चलाएं, सीबीआई की अदालत से मांग

सार

तर्कशास्त्री डॉ. नरेंद्र दाभोलकर की हत्या के पांच आरोपियों के खिलाफ सीबीआई ने गैर कानूनी गतिविधि निवारक कानून के तहत मुकदमा चलाने का अनुरोध किया है। 
 
विज्ञापन
नरेंद्र दाभोलकर - फोटो : Social media
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अंधविश्वास के खिलाफ अभियान चलाने वाले तर्कशास्त्री डॉ. नरेंद्र दाभोलकर की 2013 में हुई हत्या के मामले में सीबीआई ने विशेष अदालत से पांच आरोपियों पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) कानून (यूएपीए) के तहत मुकदमा चलाने की मांग की। जांच एजेंसी का कहना है कि आरोपियों ने दाभोलकर की हत्या कर लोगों के एक वर्ग के बीच आतंक पैदा करने का प्रयास किया। 

विज्ञापन


अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (विशेष अदालत के न्यायाधीश) एस आर नावंदर के समक्ष शुक्रवार को पांच आरोपियों डॉ. विरेन्द्र सिंह तावडे, शरद कलसकर, सचिन अंदुरे, वकील संजीव पुनालेकर और विक्रम भावे के खिलाफ आरोप तय करने को लेकर दलीलें पेश की गईं। विशेष लोक अभियोजक प्रकाश सूर्यवंशी ने सीबीआई की ओर से दलीलें रखीं। 

सूर्यवंशी ने कहा कि आरोपियों पर आईपीसी की धारा 120 बी (आपराधिक षडयंत्र), 120 बी के साथ 302 (हत्या), शस्त्र कानून की संबंधित धाराओं और यूएपीए की धारा 16 (आतंकवादी कृत्य के लिए सजा) के तहत आरोप लगाए गए। उन्होंने यूएपीए की धारा 16 पर जोर दिया और दलील दी कि इस मामले में इसे लागू करना कैसे न्यायोचित है। उन्होंने कहा, यूएपीए की धारा 15 की परिभाषा समाज या समाज के एक वर्ग के बीच आतंक पैदा करना है। मौजूदा मामले में हमारी दलील है कि लोगों के एक वर्ग के बीच आतंक पैदा करने के लिए डॉ.दाभोलकर की हत्या के लिए बंदूक का इस्तेमाल किया गया इसलिए यूएपीए की धारा 16 इस मामले में लगाई जानी चाहिए है। उन्होंने कहा कि सीबीआई को यूएपीए की धारा 16 लगाने के लिए राज्य सरकार से मंजूरी मिली थी। 
विज्ञापन
विज्ञापन


बहरहाल, बचाव पक्ष के वकील वीरेंद्र इचलकरांजिकर ने यूएपीए की धारा 16 को लगाने की मांग का विरोध किया। अदालत इस मामले पर अगली सुनवाई 7 सितंबर को करेगी।

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें