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Cyprus: साइप्रस विदेश मंत्री कोम्बोस की जयशंकर से मुलाकात, कई अहम मुद्दों पर चर्चा, एफटीए पर पुरजोर समर्थन

Thu, 30 Oct 2025 07:18 PM IST
लव गौर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Cyprus Foreign Minister: साइप्रस के विदेश मंत्री तीन दिवसीय यात्रा पर भारत आए हैं। वो बुधवार को नई दिल्ली पहुंचे, जहां गुरुवार को उन्होंने हैदराबाद हाउस में विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच कई अहम मुद्दों पर चर्चा की गई। 
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विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ साइप्रस के विदेश मंत्री कॉन्स्टेंटिनोस कोम्बोस - फोटो : ANI
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विस्तार
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साइप्रस के विदेश मंत्री कॉन्स्टेंटिनोस कोम्बोस तीन दिन की भारत यात्रा पर हैं। जहां दिल्ली के हैदराबाद हाउस में विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने साइप्रस के विदेश मंत्री कोम्बोस से मुलाकात की। विदेश मंत्री ने मुलाकात को लेकर एक्स पर पोस्ट भी साझा किया, जिसमें उन्होंने बताया कि नई दिल्ली में साइप्रस के विदेश मंत्री का स्वागत कर बेहद खुशी हुई। एस जयशंकर ने जानकारी देते हुए बताया कि हमने भारत-साइप्रस संयुक्त कार्य योजना 2025-2029 की समीक्षा की, जिस पर जून 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की साइप्रस यात्रा के दौरान नेताओं ने सहमति व्यक्त की थी। 
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उन्होंने आगे कहा कि हमारी चर्चाओं में वैश्विक भू-राजनीतिक स्थिति, हमारे संबंधित क्षेत्रों में विकास और बहुपक्षीय मंचों पर हमारे सहयोग पर भी चर्चा हुई। 2026 में साइप्रस के यूरोपीय संघ की अध्यक्षता संभालने के साथ, हमें विश्वास है कि भारत-यूरोपीय संघ के संबंध और भी मजबूत होंगे।"
आतंकवाद के रुख पर भारत का समर्थन
वहीं साइप्रस ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में अप्रैल में हुए आतंकवादी हमलों के बाद भारत के साथ अपने देश की पूर्ण एकजुटता व्यक्त की। साथ ही इस बात पर जोर दिया कि दोनों देश आतंकवाद और उसे समर्थन या वित्तपोषण करने वालों के प्रति शून्य सहनशीलता का रुख रखते हैं।
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एफटीए को लेकर दी बड़ी प्रतिक्रिया
राजधानी दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में साइप्रस के विदेश मंत्री ने कहा कि साइप्रस यूरोपीय संघ (ईयू) और भारत के बीच लंबे समय से चल रहे मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के समापन का पुरजोर समर्थन करता है। उन्होंने कहा कि इस समझौते के सफल समापन से ना केवल यूरोपीय संघ-भारत संबंध मजबूत होंगे, बल्कि भारत और सभी यूरोपीय देशों के लिए अपार आर्थिक अवसर भी खुलेंगे।

कोम्बोस ने साइप्रस समस्या के प्रति भारत के सिद्धांतवादी दृष्टिकोण की भी सराहना की और यूरोपीय संघ-भारत संबंधों को मजबूत बनाने के साथ-साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई। बता दें कि साइप्रस जनवरी 2026 से यूरोपीय संघ परिषद की अध्यक्षता संभालने की तैयारी कर रहा है। ध्यान रहे कि साइप्रस समस्या से विदेश मंत्री का तात्पर्य भूमध्यसागरीय द्वीप के उत्तरी और दक्षिणी क्षेत्रों में ग्रीक और तुर्किये समुदायों को अलग करने वाले बफर जोन में 1974 से चल रही अनधिकृत गतिविधियों से था। साइप्रस और तुर्की के बीच वर्तमान मुद्दा दक्षिण में ग्रीक साइप्रस और उत्तर में तुर्किये साइप्रस के बीच चल रहा विवाद है।

भारत को बताया स्वाभाविक साझेदार और सहयोगी
अपने बयान में विदेश मंत्री कॉन्स्टेंटिनोस कोम्बोस ने आगे कहा, "हम भारत को एक स्वाभाविक साझेदार और सहयोगी के रूप में देखते हैं। आज, जब भारत एक बढ़ती हुई बहुपक्षीय दुनिया में अग्रणी आवाज के रूप में उभर रहा है, साइप्रस भारत को ना केवल एक पुराने मित्र के रूप में देखता है, बल्कि भविष्य के सहयोग के लिए एक साझेदार के रूप में भी देखता है। दोनों राष्ट्र औपनिवेशिक शासन की हमारी विरासत से प्रभावित होकर, आधुनिक लोकतंत्र के रूप में उभरे हैं, जो स्वतंत्रता, कानून के शासन और अंतर्राष्ट्रीय कानून के प्रति सम्मान को महत्व देते हैं।

कोम्बोस ने द्विपक्षीय संबंधों की गहरी ऐतिहासिक और मूल्य-आधारित नींव पर भी जोर दिया। अपनी यात्रा पर विचार करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि यह 14 वर्षों में किसी साइप्रस के विदेश मंत्री की पहली भारत यात्रा है।
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