सुरक्षा उपायों में असमानता से वैश्विक स्तर पर साइबर खतरे बढ़ रहे है। यह दावा विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) ने बृहस्पतिवार को ग्लोबल साइबर सिक्युरिटी आउटलुक 2024 जारी रिपोर्ट में किया है। एक्सेंचर के सहयोग से तैयार की गई रिपोर्ट में गलत जानकारी फैलाने या सार्वजनिक धारणा में हेरफेर करने के लिए एआई जनित डीपफेक से उत्पन्न खतरों को चिह्नित किया गया है। इसके साथ ही बाताया गया है कि पिछले वर्ष की तुलना में दुनिया के 10 में 8 कारोबार साइबर सुरक्षा के लिहाज से ज्यादा असुरक्षित महसूस करने लगे हैं। यह रिपोर्ट तब सामने आई है, जब दुनिया के 45 से ज्यादा देशों में चुनाव होने वाले हैं।
संगठित गिरोह गलत सूचना अभियान चला सकते हैं
रिपोर्ट में कहा, एआई जनित सामग्री से चुनाव को प्रभावित किया जा सकता है। इसके अलावा चुनावों की अखंडता पर संदेह पैदा करने के लिए सोशल मीडिया के जरिये संगठित गिरोह गलत सूचना अभियान चला सकते हैं। इसके साथ ही रिपोर्ट में एआई के जरिये बड़ी मात्रा में गलत सूचना उत्पन्न करने और फैलाने के लिए की चेतावनी भी दी गई है। एजेंसी
रिपोर्ट के नतीजों पर दुनियाभर के नेता 15 जनवरी से शुरू होने वाली डब्ल्यूईएफ की पांच दिवसीय वार्षिक बैठक में चर्चा करेंगे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वैश्विक स्तर पर साइबर असमानता में तेज वृद्धि हुई है। 90 फीसदी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि साइबर सुरक्षा के मुद्दों को तत्काल हल करने की जरूरत है, लेकिन कई जगह इसे गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।
कोई भी देश साइबर अपराध से बचा नहीं
रिपोर्ट को लेकर इंटरपोल के महासचिव जुर्गन स्टॉक ने कहा कि कोई भी देश या संगठन साइबर अपराध से बचा नहीं है। इसके बाद भी कई देश और संगठन इन खतरों का प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए तैयार नहीं हैं। इसकी वजह से इन खतरों से निपटने की वैश्विक प्रतिक्रिया भी सुस्त हो जाती है। यह बहुत जरूरी है कि इन खतरों से सभी एक साथ मिलकर निपटें और प्रभावी उपायों में वैश्विक स्तर पर कहीं कोई कमजोर कड़ी नहीं रहे।