आत्महत्या के कई मामलों में ये बात सामने आई है कि ऐसा करने वाला अपने फेसबुक स्टेटस या पोस्ट में इस बात का जिक्र करता है कि वह अपना जीवन खत्म करने वाला है। कई मामलो में तो लोगों ने ये कदम उठाने से पहले वीडियो तक फेसबुक पर पोस्ट किए हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए अब मुंबई में साइबर पुलिस अपने तकनीकी कौशल का इस्तेमाल करेगी। ताकि उन लोगों का जीवन बचाया जा सके जिनके जहन में आत्महत्या जैसे विचार आते हैं।
इससे पहले मुंबई के बांद्रा में अक्तूबर में साइबर सेल ने 21 वर्षीय व्यक्ति को आत्महत्या करने से रोका था। इस व्यक्ति का अपने मालिक से सैलरी को लेकर विवाद हो गया था। जिसके बाद उसने आत्महत्या का मन बना लिया। उसने ये कदम उठाने से पहले फेसबुक पर अपना सुसाइड नोट पोस्ट किया था।
फेसबुक द्वारा अलर्ट मिलने के 24 घंटे के भीतर साइबर पुलिस की टीम ने स्थानीय प्रशासन को इस बात की जानकारी दी और टीम उस व्यक्ति के घर पहुंची। जिसके बाद उसे वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के पास ले जाया गया। जिन्होंने उसकी काउंसलिंग की।
डिप्टी पुलिस कमिश्नर अकबर पठान ने बताया, 'जब भी हमें किसी सुसाइड पोस्ट के लिए अलर्ट मिलता है तो हम व्यक्ति के जीवन को बचाने के लिए सभी तरह के प्रयास करते हैं। उस समय हर एक सेकेंड महत्वपूर्ण होता है। हम विभिन्न टीमें बनाते हैं, संबंधित व्यक्ति की गतिविधियों का विश्लेषण और स्कैन करते हैं। जब व्यक्ति के घर का पता ट्रैक हो जाता है तो वहां पुलिस की टीम भेजी जाती है। उसकी काउंसलिंग कराई जाती है ताकि वह आत्महत्या न करे। बीते कुछ महीनों में पुलिस ने 4 लोगों की जान बचा ली है।'
इससे पहले गोरेगांव की एक कंपनी में 30 वर्षीय महिला ने जुलाई में फेसबुक पर सुसाइड नोट पोस्ट किया था। जिसके बाद साइबर पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया। उसके घर महिला पुलिस की टीम को भेजा गया और उसकी काउंसलिंग की गई।
साइबर विशेषज्ञ विक्की शाह का कहना है, 'बीते साल से फेसबुक अपने यूजर्स के डाटा की सक्रिय रूप से निगरानी कर रहा है। ताकि लोगों की जिंदगी बचाई जा सके। खासकर कि ब्लू वेल चैलेंज के बाद से। फेसबुक बड़े पैमाने पर मौत, सुसाइड और अन्य संवेदनशील विषयों के बारे में फिल्टर की सहायता से पता लगाता है। जिसके बाद पुलिस को अलर्ट किया जाता है।'