गिफ्ट भेजने के नाम पर तो कभी क्यूआर कोड भेजकर तो कभी गिफ्ट कार्ड मिलने के लिए आपसे आपकी बैंक से संबंधित गोपनीय जानकारी मांग लेंगे। अगर आप इनमें से किसी के भी झांसे में आए, तो आपके अकाउंट को कब खाली कर लिया जाएगा आपको पता तक नहीं चलेगा। इसलिए इस तरह के गिफ्ट भेजने वालों से सावधान रहें।
लंबी छुट्टियों का उठाते हैं फायदा
लंबी छुट्टियों में बैंक भी बंद होते हैं। ऐसे में पुलिस को बैंकों से फ्रॉड संबंधी जानकारियां मिलना संभव नहीं हो पाता है। इसका फायदा इन अपराधियों को होता है। आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2018 में इसी तरह क्रिसमस की छुट्टियों में साइबर क्रिमिनल्स ने 1.8 करोड़ रुपये की ठगी को अंजाम दिया था। जबकि वर्ष 2019 में लंबी छुट्टियों के दौरान तीन करोड़ रुपये की ठगी हुई थी। वहीं इस साल 2020 में लंबी छुट्टियों के दौरान दो करोड़ रुपये की ठगी भी रिपोर्ट हो चुकी है।
मुंबई साइबर सेल के मुताबिक, मुंबई में इस साल नवंबर तक साइबर क्राइम के कुल 2,225 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें से लॉकडाउन के दौरान 917 मामले सामने आए हैं। पुलिस ने अब तक सिर्फ 284 मामलों को ही पता लगा पाया है। साइबर फ्रॉड में ई-मेल फिशिंग, स्पूफिंग, नाइजीरियन फ्रॉड, हैकिंग, ऑब्सिन ईमेल/ एसएमएस/एमएमएस, मॉर्फिंग, फेक सोशल मीडिया प्रोफाइल जैसे मामलों का समावेश है।
लुभावने मैसेज के जरिए भेजी जाने वाली प्रमोशनल लिंक पर डाइरेक्ट क्लिक करने से बचें।ये लिंक आमतौर पर फिशिंग गिरोहों द्वारा त्योहारों के दौरान भेजे जाते हैं। “फिशिंग” का मतलब होता है लालच देकर फ्रॉड करना। आजकल मैसेज, कॉल और मेल के जरिए तमाम तरह के ऑफर दिए जा रहे हैं। आईफोन समेत तमाम ब्रांडेड फोन, लैपटॉप और इलेक्ट्रॉनिक एसेसरीज मामूली दामों पर ऑफर किए जा रहे हैं। फर्जी बैंकर बनकर कैशबैक और क्रेडिट कार्ड ऑफर करना भी फ्रॉड की दुनिया में काफी चलन में है। इसी तरह के लालच देकर कस्टमर से उसकी प्राइवेट डिटेल ली जा रही है और बाद में उनके अकाउंट को खाली कर दिया जा रहा है।
फेक फ्रेंड से भी रहें सावधान
साइबर क्राइम की दुनिया में एक नया तरीका ट्रेंड में है। इसमें आपके क्लोज फ्रेंड के नाम से फर्जी प्रोफाइल बनाकर फेसबुक या इंस्टाग्राम पर नई रिक्वेस्ट भेजी जाती है। फिर मैसेज भेजकर इमरजेंसी के नाम पर पैसा मांगा जाता है। फर्जी प्रोफाइल में फोटो से लेकर अन्य जानकारी तक सबकुछ हूबहू डाली जा रही है, जिससे लोगों को जरा भी शक नहीं होता। लेकिन कुछ बातों का ध्यान रखकर आप यह पता कर सकते हैं कि जिस प्रोफाइल से पैसा मांगा जा रहा है, वह फर्जी है या नहीं।
फ्रॉड के शिकार होने पर क्या करें
धोखाधड़ी के शिकार होने पर अपने बैंक के संबंधित अधिकारी को तुरंत सूचित करें। इसके अलावा कस्टमर केयर सेंटर पर सूचना दर्ज कराएं और दर्ज सूचना का नंबर भविष्य के लिए सुरक्षित रखें, ताकि बैंक आपके पैसे आपको रिफंड कर सके।
आरबीआई की वर्ष 2017-18 की गाइडलाइन के मुताबिक, धोखाधड़ी की सूचना दर्ज कराने के बाद ट्रांजेक्शन की पूरी जिम्मेदारी बैंक पर होती है, यदि तय प्रक्रिया के मुताबिक संबंधित बैंक को सूचित नहीं किया गया, तो जिम्मेदारी उपभोक्ता की होती है। इस स्थिति में बैंक पर रिफंड करने की कानूनी बाध्यता लागू नहीं होती।