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Cauvery Water Row: 'तमिलनाडु को 2600 क्यूसेक पानी छोड़ना सुनिश्चित करें', सीडब्ल्यूआरसी का कर्नाटक को निर्देश

Mon, 30 Oct 2023 05:01 PM IST
आदर्श शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कावेरी जल विनियमन समिति (सीडब्ल्यूआरसी) की बैठक में पानी को लेकर एक फैसला किया गया है। सीडब्ल्यूआरसी ने सोमवार को जारी अपने बयान में कहा कि कर्नाटक को एक नवंबर से 15 नवंबर तक 2600 क्यूसेक पानी छोड़ना सुनिश्चित करना होगा।
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Cauvery water issue - फोटो : social media
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विस्तार
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कावेरी नदी के पानी को लेकर तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच खींचातानी का खेल जारी है। कावेरी जल विनियमन समिति (सीडब्ल्यूआरसी) की बैठक में पानी को लेकर एक फैसला किया गया है। सीडब्ल्यूआरसी ने सोमवार को जारी अपने बयान में कहा कि कर्नाटक को एक नवंबर से 15 नवंबर तक 2600 क्यूसेक पानी छोड़ना सुनिश्चित करना होगा। 
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सीडब्ल्यूआरसी ने अपनी 89वीं बैठक के दौरान कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच चल रहे कावेरी नदी जल विवाद में जल आवंटन और कमी के संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय लिए। तमाम चर्चाओं के बाद कावेरी जल विनियमन समिति एक निर्णय पर पहुंची। जिसमें कर्नाटक से कहा गया कि बिलिगुंडलू में प्रवाह 2600 क्यूसेक बना रहे। 
 

पुराना है दोनों राज्यों के बीच पानी का विवाद
कावेरी एक अंतरराज्यीय बेसिन है, जिसका उद्गम स्थल कर्नाटक है। यह नदी बंगाल की खाड़ी में गिरने से पहले तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी से होकर गुजरती है। इस नदी के पानी के बंटवारे को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु में पुराना विवाद है। इस विवाद के निपटारे के लिए ही दो जून 1990 कावेरी जल विवाद अधिकरण की स्थापना की गई थी।  
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विवाद के निपटारे के लिए सीडब्ल्यूडीटी का गठन
कावेरी जल बंटवारे को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु सरकारों के बीच लंबे समय से खींचतान चल रही है। नदी को किसी भी राज्य में लोगों के लिए जीविका के प्रमुख स्रोत के रूप में देखा जाता है। केंद्र ने तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और पुडुचेरी के बीच उनकी व्यक्तिगत जल-साझाकरण क्षमताओं के संबंध में विवादों का निपटारा करने के लिए 1990 को कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण (सीडब्ल्यूडीटी) का गठन किया है।
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