नेतृत्व परिवर्तन के मुद्दे पर सोमवार को कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये बंद कमरे से शुरू हुई, मगर इसकी गूंज सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक सुनाई दी। सोशल मीडिया पर बुजुर्ग बनाम युवा नेतृत्व की जंग छिड़ गई। कांग्रेस के कई नेताओं ने ट्विटर पर जहां सोनिया गांधी के नेतृत्व में निष्ठा जताई, वहीं कई नेताओं का यह भी मानना था कि पार्टी में जान फूंकने के लिए राहुल गांधी को ही फिर से कांग्रेस की कमान देनी चाहिए। वहीं, पार्टी मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे कई कार्यकर्ताओं ने सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी के समर्थन में नारेबाजी करते हुए कहा, हमें गांधी परिवार के बाहर का अध्यक्ष मंजूर नहीं है।
कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने सोनिया से अपील कर डाली कि अगर आपकी सेहत खराब है तो राहुल को पूर्णकालिक अध्यक्ष पद संभालने के लिए राजी करें। वहीं, महाराष्ट्र के मंत्री विजय वाडेट्टिवार ने कहा, गांधी परिवार में ही पार्टी का नेतृत्व करने की क्षमता है। राहुल को फिर से अध्यक्ष बनाया जाना चाहिए। पुड्डुचेरी के लोक निर्माण मंत्री ए नमाशिवायम ने राहुल को फिर से पार्टी की कमान दिए जाने की अपील की। जम्मू-कश्मीर कांग्रेस इकाई ने भी राहुल को कमान देने की मांग की। मध्य प्रदेश में पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और दिग्विजय सिंह ने सोनिया गांधी के नेतृत्व में भरोसा जताया।
राहुल को अध्यक्ष बनाने के लिए खून से लिखा खत
दिल्ली में कांग्रेस काउंसलर संदीप तंवर ने सोनिया गांधी को खून से लिखी चिट्ठी में कहा, अगर राहुल गांधी को पार्टी अध्यक्ष नहीं बनाया गया तो यह पार्टी के हित में फैसला नहीं होगा, क्योंकि राहुल गांधी ने जमीनी लड़ाई लड़ी है।
ओवैसी का तंज, गुलाम नबी साहब 45 साल की गुलामी सिर्फ इसलिए...
कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद पर तंज कसते हुए हैदराबाद से सांसद और एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी ने ट्विटर पर लिखा, आदर्श न्याय, गुलाम नबी साहब मुझ पर यही आरोप लगाते थे। अब आप पर भी यही आरोप लगा है। 45 साल की गुलामी सिर्फ इसलिए? अब ये साबित हो गया है कि जनेऊधारी नेतृत्व का विरोध करने वाला बी-टीम ही कहलाया जाएगा। मुझे उम्मीद है कि मुस्लिम समुदाय के लोग समझेंगे कि कांग्रेस के साथ रहने से क्या होता है।
कांग्रेस को कोई नहीं बचा सकता: भाजपा
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कांग्रेस में सही बात करने वाला गद्दार है। तलवे चाटने वाले कांग्रेस में वफादार हैं। जब पार्टी की ये स्थिति हो जाए तो उसे कोई नहीं बचा सकता। वहीं, भाजपा नेता उमा भारती ने कहा, गांधी-नेहरू परिवार का अस्तित्व संकट में है। इसका राजनीतिक वर्चस्व खत्म हो गया है। इसलिए अब पद पर कौन रहता है या कौन नहीं यह मायने नहीं रखता है। कांग्रेस को बिना कोई विदेशी तत्व के स्वदेशी गांधी की तरफ लौटना चाहिए।
कांग्रेस की पूर्व नेता दिव्या स्पंदना ने कहा, राहुल ने की गलती
कांग्रेस की पूर्व नेता दिव्या स्पंदना ने ट्वीट कर कहा, मुझे लगता कि राहुल ने गलती की। उन्हें कहना चाहिए था कि कांग्रेस के नेताओं ने यह चिट्ठी भाजपा और मीडिया के मिलीभगत से भेजी। उन्होंने कहा, न केवल मीडिया में चिट्ठी को लीक किया, बल्कि कार्यसमिति की बैठक की बातचीत को मीडिया में मिनट टू मिनट लीक भी किया जा रहा है। गजब है।
आजादी के बाद कांग्रेस में पांच अध्यक्ष नेहरू-गांधी परिवार से, 13 बाहरी
कांग्रेस का इतिहास दर्शाता है कि आजादी के बाद से पार्टी के पांच अध्यक्ष नेहरू-गांधी परिवार से थे, जबकि 13 बाहरी लोगों को कांग्रेस की कमान सौंपी गई थी। हालांकि, सच्चाई यही है कि गांधी परिवार ने पार्टी की कमान ज्यादा दिन तक संभाले रखी, जबकि परिवार से बाहर के लोगों को यह मौका बहुत कम समय के लिए मिला। आजादी के बाद जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने पार्टी की अगुवाई की। वहीं, गांधी परिवार से बाहर के लोगों में पार्टी की अध्यक्षता करने वालों में जेबी कृपलानी, बी पट्टाभि सीतारमैया, पुरुषोत्तम दास टंडन, यूएन ढेबर, एन संजीवा रेड्डी, के कामराज, एस निजालिंगप्पा, जगजीवन राम, शंकर दयाल शर्मा, डीके बरुआ, केबी रेड्डी, पीवी नरसिम्हा राव और सीताराम केसरी शामिल रहे।