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CVC: भ्रष्टाचार की CBI जांच के 6900 से अधिक मामले कोर्ट में लंबित, 361 केस तो 20 वर्षों से ज्यादा वक्त से फंसे

Mon, 02 Sep 2024 01:48 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सीवीसी रिपोर्ट के अनुसार, सीबीआई और आरोपियों द्वारा 12,773 अपील अलग-अलग हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में लंबित थीं। 20 सालों से 501, 15 सालों से अधिक लेकिन 20 साल से कम समय में 1,138 अपील लंबित थीं।
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केंद्रीय सतर्कता आयोग की एक वार्षिक रिपोर्ट में दावा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) की एक वार्षिक रिपोर्ट सामने आई है। इसमें दावा किया गया है कि सीबीआई ने जिन 6,900 भ्रष्टाचार के मामलों की जांच की है। इनमें से 361 की सुनवाई 20 साल से अधिक समय से विभिन्न अदालतों में लंबित है। 

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इसके अलावा, भ्रष्टाचार के 658 मामले सीबीआई जांच के लिए लंबित हैं। इनमें से 48 मामले पांच साल से अधिक समय से लंबित हैं। 

आयोग का कहना है कि अदालतों के समक्ष मुकदमे के तहत कुल 6,903 मामलों में से पिछले साल 31 दिसंबर तक तीन साल से कम समय से 1,379 लंबित थे। जबकि तीन साल या पांच साल से अधिक समय से 875 और पांच साल या 10 साल से अधिक समय तक 2,188 मामले लंबित थे। 

सीवीसी की वार्षिक रिपोर्ट 2023 के अनुसार, कम से कम 2,100 मामले 10 साल या बीस साल से अधिक समय तक लंबित थे। जबकि 20 साल से अधिक समय से 361 मामले लंबित थे। इसमें यह भी दावा किया गया कि पिछले साल 31 दिसंबर तक 6,903 मामलों की सुनवाई लंबित थी। यह चिंता का विषय है कि 2023 के अंत में 2,461 मामले 10 से अधिक सालों से लंबित थे।
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हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में 12,773 अपील लंबित
आगे कहा गया कि सीबीआई और आरोपियों द्वारा 12,773 अपील अलग-अलग हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में लंबित थीं। हाल ही में जारी रिपोर्ट के अनुसार, 20 सालों से 501 अपील, 15 सालों से अधिक लेकिन 20 साल से कम समय में 1,138 अपील लंबित थीं। वहीं, 10 सालों से अधिक मगर 15 साल से कम 2,558, पांच सालों से अधिक लेकिन 10 साल से कम 3850, दो साल से अधिक और पांच से कम 2172 तथा दो साल से कम समय से 2554 अपील लंबित थीं। 

सीबीआई द्वारा जांच किए जा रहे 658 लंबित मामलों की जानकारी देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि 48 मामलों की जांच पांच साल से अधिक समय से लंबित है, 74 मामलों की जांच तीन साल से अधिक लेकिन पांच साल से कम समय से लंबित है। वहीं, 75 मामलों की जांच दो साल से अधिक मगर तीन साल से कम समय से, 175 मामलों की जांच एक साल से अधिक, लेकिन दो साल से कम समय से लंबित है और 286 मामलों की जांच एक साल से कम समय से लंबित है। 

एक साल के भीतर जांच पूरी करने की उम्मीद
रिपोर्ट में कहा गया कि सीबीआई से यह उम्मीद की जाती है कि वह मामला दर्ज होने के एक साल के भीतर जांच पूरी कर लेगी। जांच पूरी होने का मतलब होगा कि जरूरत पड़ने पर सक्षम प्राधिकार से मंजूरी मिलने के बाद जहां भी जरूरत हो, अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया जाएगा।

आगे कहा गया कि कुछ मामलों में जांच पूरी होने में कुछ देरी देखी गई है। जांच को पूरा करने में विलंब के कारणों में अन्य बातों के साथ-साथ अत्यधिक कार्य के कारण देरी, अपर्याप्त जनशक्ति, अनुरोध पत्र (एलआर) का जवाब लेने में देरी और सक्षम प्राधिकारियों द्वारा अभियोजन की मंजूरी देने में विलंब आदि शामिल हैं।

इसमें यह भी दावा किया गया है कि याचिका में सीबीआई द्वारा जांच पूरी करने में देरी के कारणों के रूप में भारी-भरकम रिकॉर्डों की जांच के लिए आवश्यक समय लेने वाले प्रयासों, दूरस्थ स्थानों पर उपलब्ध गवाहों का पता लगाने और उनसे पूछताछ करने के लिए आवश्यक समय और प्रयासों का भी उल्लेख किया गया है। 

15 सौ से अधिक पद खाली पड़े
सीवीसी की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार,  31 दिसंबर 2023 तक सीबीआई में 7,295 की स्वीकृत पदों में से 1,610 खाली पड़े थे। इनमें से 1,040 कार्यकारी रैंक के हैं। वहीं, 84 कानून अधिकारी, 53 तकनीकी अधिकारी, 388 मंत्रालयिक कर्मचारी और 45 कैंटीन कर्मचारी हैं। 

रिपोर्ट में कहा गया कि दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम, 1946 की धारा 4सी के साथ पठित केन्द्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम, 2003 की धारा 26 के अनुसार, पुलिस अधीक्षक और उससे ऊपर (निदेशक को छोड़कर) के स्तर के पदों पर नियुक्ति के लिए अधिकारियों की सिफारिश करने के लिए एक समिति का प्रावधान है और निदेशक से परामर्श करने के बाद दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना में ऐसे अधिकारियों के कार्यकाल के विस्तार या कटौती की सिफारिश भी करती है। 

इसमें यह भी कहा गया कि चयन समिति ने विभिन्न नियुक्तियों, कार्यकाल के विस्तार के प्रस्तावों आदि के संबंध में केंद्र सरकार को अपनी सिफारिशें दीं। यह समिति केंद्रीय सतर्कता आयुक्त की अध्यक्षता में कार्य करती है और सतर्कता आयुक्त, सचिव, गृह मंत्रालय और सचिव, कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग इसके सदस्य हैं।

नियमित मामले और पूछताछ पर रिपोर्ट में हैरान करने वाले आंकड़े
रिपोर्ट के अनुसार, 2023 के दौरान सीबीआई ने 876 नियमित मामले या प्राथमिकी पूछताछ के लिए मामले दर्ज किए थे। इसमें साल 2023 के दौरान रिश्वत के मामलों का पता लगाने के लिए 198 जाल बिछाए गए और आय से अधिक संपत्ति रखने के 37 मामले दर्ज किए गए। वहीं, 876 मामलों में से 91 मामले संवैधानिक अदालतों के आदेश पर लिए गए और 84 मामले राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेशों से मिले।

कितने मामलों में जांच पूरी हुई?
आगे कहा गया कि 2023 के दौरान, सीबीआई ने 873 मामलों में जांच पूरी की। इनमें 755 नियमित मामले और 118 प्रारंभिक पूछताछ शामिल थी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि साल 2023 के अंत में, कुल 1,028 मामले लंबित थे, जिनमें से 72 प्रारंभिक पूछताछ के अलावा 956 नियमित मामले थे। 510 नियमित मामले एक वर्ष से अधिक समय से लंबित थे और 58 प्रारंभिक जांच 2023 के अंत में तीन तीन महीने से अधिक समय से लंबित थीं।

सीवीसी ने कहा कि सीबीआई ने 2023 के दौरान 674 लोक सेवकों (195 राजपत्रित अधिकारियों) से जुड़े 552 भ्रष्टाचार के मामले दर्ज किए। मुकदमे और दोषसिद्धि (भ्रष्टाचार निरोधक कानून से इतर के मामलों सहित) का ब्योरा देते हुए इसमें कहा गया कि 636 अदालती मामलों में फैसले हो चुके हैं। इनमें से 411 मामलों में दोष सिद्ध हुआ। वहीं 140 मामलों में दोष मुक्त करार दिया, 24 को आरोप मुक्त कर दिया गया और 61 मामलों को अन्य कारणों से छोड़ दिया गया। 

रिपोर्ट में कहा गया कि वर्ष 2023 के दौरान दोषसिद्धि की दर 71.47 प्रतिशत थी, जबकि वर्ष 2022 के लिए यह दर 74.59 प्रतिशत थी। वर्ष 2023 के अंत में विभिन्न अदालतों में 10,959 मामले विचाराधीन थे। 

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