केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने 50 करोड़ रुपये ज्यादा के बैंक धोखाधड़ी के मामले में शीर्ष बैंक अधिकारियों की भूमिका की जांच के लिए परामर्श बोर्ड का पुनर्गठन किया है। सीवीसी के आदेश के मुताबिक, सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और सार्वजनिक वित्तीय संस्थान आपराधिक जांच शुरू करने से पहले 50 करोड़ रुपये या इससे अधिक रकम की धोखाधड़ी के सभी मामले सलाह के लिए उसके पास भेजेंगे।
आदेश में कहा गया है कि सीबीआई भी किसी भी मामले या मुद्दे को बोर्ड के पास भेज सकती है जहां उसे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और संबंधित सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों के मामलों में कोई समस्या हो या वे तकनीकी मामले हों।
इसके अनुसार, बैंकिंग और वित्तीय धोखाधड़ी परामर्श बोर्ड 50 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी के मामले में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों के अधिकारियों या पूर्णकालिक निदेशकों की भूमिका की जांच करेगा।
बोर्ड सामान्य तौर पर शुरुआती संदर्भ मिलने के एक महीने के अंदर मंत्रालय, विभाग, सीवीसी अथवा जांच एजेंसी को अपनी सलाह भेजेगा। परामर्श बोर्ड को पूर्व सतर्कता आयुक्त और इंडियन बैंक के चेयरमैन व प्रबंध निदेशक रहे टीएम भसीन की अध्यक्षता में पुनर्गठित किया है। इसे इस साल 21 अगस्त से दो साल के लिए बनाया गया है। पूर्व शहरी विकास सचिव मधुसूदन प्रसाद, सीमा सुरक्षा बल के पूर्व महानिदेशक डीके पाठक और एक्जिम बैंक के पूर्व प्रबंध निदेशक इसके सदस्य हैं।