वरिष्ठ वकील फली एस नरीमन(आलोक वर्मा के वकील): सीबीआई निदेशक का कार्यकाल दो वर्ष का होता है। कार्यकाल में किसी तरह का छेड़छाड़, चाहे वह अच्छे या बुरे कारणों से हो तो तो इसकेलिए प्रधानमंत्री, नेता प्रतिपक्ष और चीफ जस्टिस वाली उच्चाधिकार कमेटी की अनुमति से होनी चाहिए।
चीफ जस्टिस: हम इसका परीक्षण करेंगे।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता(सीवीसी के वकील): सीवीसी को किसी की निगरानी में जांच करने का निर्देश नहीं दिया जाना चाहिए।
चीफ जस्टिस: मामले के अनूठे साक्ष्यों को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है और इसे अपवाद केतौर पर देखा जाए।
सॉलिसिटिर जनरल: जांच के लिए दस दिनों का वक्त पर्याप्त नहीं है। अदालत में दिवाली की छुट्टियां हैं।
चीफ जस्टिस: ओके। ठीक है 240 घंटे। अधिक वक्त देना देश के हित में नहीं होगा। अदालत में दिवाली की छुट्टी होने से सीवीसी जांच का क्या वास्ता है। दिवाली तो कुछ घंटे के लिए हैं। सीवीसी और सीबीआई के लिए कोई दिवाली नहीं।
वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी(राकेश अस्थाना के वकील): हमें भी सुना जाए। मेरे मुवक्किल ने भी छुट्टी पर भेजे जाने के खिलाफ याचिका दायर की है।
चीफ जस्टिस: लेकिन आप की फाइल हमारे पास नहीं हैं, ऐसे में हम कैसे सुनवाई कर सकते हैं।
रोहतगी: हमारी याचिका पर सोमवार को सुनवाई की जाए।
चीफ जस्टिस: हम देखेंगे।