सीआरपीएफ की 205 कोबरा बटालियन ने बिहार और महाराष्ट्र के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में नक्सलियों के खिलाफ बड़ा 'ऑपरेशन' शुरू किया है। 'गया' और 'औरंगाबाद' में स्थित घने जंगलों में 'कोबरा' दस्ते ने नक्सलियों को अपना ठिकाना छोड़कर भागने के लिए मजबूर कर दिया। इस इलाके में कई दिनों से नक्सली, सुरक्षा बलों पर बड़े हमले की फिराक में थे। फरवरी में सीआरपीएफ ने यहां पर एफओबी 'फारवर्ड ऑपरेटिंग बेस' स्थापित किया था। नक्सली जानते थे कि कोबरा दस्ता, यहां पर बड़ा ऑपरेशन कर रहा है। लंबे चौड़े क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन चल रहा है। जब नक्सलियों को लगा कि वे अब तीन तरफ से घिर चुके हैं तो उन्होंने गोला बारुद, 500 डेटोनेटर, एक हजार आईईडी (इंप्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस), प्रेशर बम, केन आईईडी और एक एके-47 राइफल को मौके पर छोड़ कर, भागना ठीक समझा। नक्सलियों के पास से जितना गोला बारुद व आईईडी बरामद हुई हैं, उसके जरिए 1200 से ज्यादा जवानों को नुकसान पहुंचाया जा सकता था।
सीआरपीएफ ने इस इलाके में फरवरी के दौरान एफओबी स्थापित किया था। इस बेस पर कोबरा कमांडो ने मोर्चा संभाला था। नक्सलियों के खिलाफ 'ऑपरेशन' शुरू किया गया। इस इलाके में नक्सलियों का टॉप कमांडर 'संदीप यादव' उर्फ विजय, करीब दो दशकों से सक्रिय था। बताया जाता है कि उसने अरबों रुपये की संपत्ति बना ली थी। ईडी ने 2018 में संदीप यादव की करोड़ों रुपये की चल-अचल संपत्ति जब्त की थी। उस पर कई राज्यों की पुलिस ने 25 लाख रुपये से 50 लाख रुपये तक का इनाम घोषित कर रखा था। मई में उसकी मौत हो गई थी। हालांकि मौत का कारण, दवा का रिएक्शन होना बताया गया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि सीआरपीएफ ने उस इलाके की सप्लाई चेन पूरी तरह बंद कर दी थी, जहां पर ये कुख्यात नक्सली छिपा हुआ था। उसके पास बाहर निकलने का कोई विकल्प नहीं बचा था। संदीप यादव पर विभिन्न राज्यों के पुलिस थानों में लगभग 500 केस दर्ज थे।