फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

निशाने पर थे 1200 जवान!: CRPF के कोबरा दस्ते ने बोला धावा तो 1000 आईईडी, 500 डेटोनेटर व एके-47 छोड़ भागे नक्सली

सार

सीआरपीएफ ने इस इलाके में फरवरी के दौरान एफओबी स्थापित किया था। इस बेस पर कोबरा कमांडो ने मोर्चा संभाला था। नक्सलियों के खिलाफ 'ऑपरेशन' शुरू किया गया। इस इलाके में नक्सलियों का टॉप कमांडर 'संदीप यादव' उर्फ विजय, करीब दो दशकों से सक्रिय था। बताया जाता है कि उसने अरबों रुपये की संपत्ति बना ली थी...
विज्ञापन
नक्सलियों से बरामद हथियार और गोला बारूद - फोटो : Amar Ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सीआरपीएफ की 205 कोबरा बटालियन ने बिहार और महाराष्ट्र के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में नक्सलियों के खिलाफ बड़ा 'ऑपरेशन' शुरू किया है। 'गया' और 'औरंगाबाद' में स्थित घने जंगलों में 'कोबरा' दस्ते ने नक्सलियों को अपना ठिकाना छोड़कर भागने के लिए मजबूर कर दिया। इस इलाके में कई दिनों से नक्सली, सुरक्षा बलों पर बड़े हमले की फिराक में थे। फरवरी में सीआरपीएफ ने यहां पर एफओबी 'फारवर्ड ऑपरेटिंग बेस' स्थापित किया था। नक्सली जानते थे कि कोबरा दस्ता, यहां पर बड़ा ऑपरेशन कर रहा है। लंबे चौड़े क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन चल रहा है। जब नक्सलियों को लगा कि वे अब तीन तरफ से घिर चुके हैं तो उन्होंने गोला बारुद, 500 डेटोनेटर, एक हजार आईईडी (इंप्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस), प्रेशर बम, केन आईईडी और एक एके-47 राइफल को मौके पर छोड़ कर, भागना ठीक समझा। नक्सलियों के पास से जितना गोला बारुद व आईईडी बरामद हुई हैं, उसके जरिए 1200 से ज्यादा जवानों को नुकसान पहुंचाया जा सकता था।

सीआरपीएफ के जाल में फंसा कुख्यात नक्सली

सीआरपीएफ ने इस इलाके में फरवरी के दौरान एफओबी स्थापित किया था। इस बेस पर कोबरा कमांडो ने मोर्चा संभाला था। नक्सलियों के खिलाफ 'ऑपरेशन' शुरू किया गया। इस इलाके में नक्सलियों का टॉप कमांडर 'संदीप यादव' उर्फ विजय, करीब दो दशकों से सक्रिय था। बताया जाता है कि उसने अरबों रुपये की संपत्ति बना ली थी। ईडी ने 2018 में संदीप यादव की करोड़ों रुपये की चल-अचल संपत्ति जब्त की थी। उस पर कई राज्यों की पुलिस ने 25 लाख रुपये से 50 लाख रुपये तक का इनाम घोषित कर रखा था। मई में उसकी मौत हो गई थी। हालांकि मौत का कारण, दवा का रिएक्शन होना बताया गया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि सीआरपीएफ ने उस इलाके की सप्लाई चेन पूरी तरह बंद कर दी थी, जहां पर ये कुख्यात नक्सली छिपा हुआ था। उसके पास बाहर निकलने का कोई विकल्प नहीं बचा था। संदीप यादव पर विभिन्न राज्यों के पुलिस थानों में लगभग 500 केस दर्ज थे।

विज्ञापन
विज्ञापन

नक्सलियों से बरामद हथियार और गोला बारूद - फोटो : Amar Ujala

इसलिए नक्सलियों में मची खलबली

संदीप यादव की मौत के बाद कोबरा और लोकल पुलिस ने अपना दायरा बढ़ा दिया। कोबरा दस्तों ने नक्सलियों के गढ़ की तरफ बढ़ना शुरू कर दिया। इससे नक्सलियों में खलबली मच गई। पिछले एक सप्ताह से सुरक्षा बल, लगातार सर्च कर रहे थे। कोबरा की सक्रियता देख और सप्लाई चेन बाधित होने के कारण नक्सलियों ने जंगल का वह इलाका छोड़ दिया, जहां वे सुरक्षा बलों पर बड़ा हमला करने की तैयारी कर रहे थे। सीआरपीएफ ने उनके ठिकाने से जो गोला-बारूद और हथियार बरामद किए, उससे नक्सलियों का इरादा साफ पता चल रहा था। एक हजार से अधिक आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस), प्रेशर बम, केन आईईडी और दूसरे हथियार बरामद किए गए। कोबरा दस्ते ने नक्सलियों के इस जखीरे को बरामद कर एक बड़े नुकसान को टाल दिया।

'बुलबुल’ ऑपरेशन में हुए 14 एनकाउंटर …

कोबरा इकाई, ने इस साल झारखंड के लोहरदगा जिले के 'बुलबुल' गांव के जंगलों में एक खतरनाक 'ऑपरेशन' को अंजाम दिया था। यह एक ऐसा ऑपरेशन था, जिसने जंगल के भीतरी हिस्से में छिपे नक्सलियों को बाहर आने पर मजबूर कर दिया। उस इलाके में जितने भी नक्सली छिपे थे, उन्हें कैडर द्वारा कोई न कोई बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इनमें कई जोनल और सब जोनल कमांडर तक शामिल थे। 18 दिन चले ऑपरेशन में 14 एनकाउंटर हुए थे। नक्सलियों ने सुरक्षा बलों का रास्ता रोकने के लिए जगह जगह पर आईईडी दबा रखे थे। मुठभेड़ वाले इलाके से 16 आईईडी बरामद हुई। 196 डेटोनेटर एवं 28 घातक हथियारों से लैस 14 हार्डकोर नक्सली धरे गए। 18 दिन तक कोबरा एवं दूसरी टीमें जंगलों में आगे बढ़ती रही। ये ऑपरेशन आठ फरवरी से 25 फरवरी तक चला। नक्सलियों ने जंगल में जगह जगह पर आईईडी लगा रखी थी, ताकि सुरक्षा बल तेजी से उनके पीछे न आ सकें। इन खतरों के बावजूद, सीआरपीएफ जांबाजों ने नक्सलियों के इरादों को नेस्तानाबूद कर दिया।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें