भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक बलराम भार्गव ने मंगलवार को कहा कि डब्ल्यूएचओ एकजुटता परीक्षण 30 देशों का परीक्षण है, जिसमें भारत सहभागी रहा है और इसके अंतरिम परिणाम वेबसाइट पर डाले गए हैं, जिसकी अभी तक समीक्षा नहीं की गई है। हालांकि, हम मानते हैं कि ये दवाएं उतना अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रही हैं, जितनी कि अपेक्षित थी।
गौरतलब है कि हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कहा था कि कोरोना उपचार में उपयोग की गई दवाओं रेमडेसिविर, हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन, लोपिनाविर/रिटोनाविर और इंटरफेरोन का कोविड-19 मरीजों पर या तो बेहद कम असर हुआ अथवा बिल्कुल भी कारगर साबित नहीं हुईं।
डब्ल्यूएचओ का कहना था कि कोरोना उपचार को लेकर विश्व भर में बड़े स्तर पर किए गए अलग-अलग अध्ययन से इस बात के 'निर्णायक साक्ष्य' मिले कि गंभीर रूप से बीमार लोगों पर रेमडेसिविर दवा का बेहद कम प्रभाव रहा। मतलब यह बिल्कुल भी कारगर साबित नहीं हुई।
भारत में रिकवर मामलों की संख्या 67 लाख से अधिक हो गई है। जो किसी भी देश में सबसे अधिक संख्या है। हमने अब तक 9 करोड़ 60 लाख टेस्ट किए हैं, ये विश्व की दूसरी सबसे बड़ी संख्या है। प्रति 10 लाख जनसंख्या पर भारत में मृत्यु दर 83 है, हम विश्व में सबसे कम मृत्यु दर वाले देशों में हैं। विश्व की औसत मृत्यु दर 142 है। सक्रिय मामलों में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। 18 सितंबर को सक्रिय मामलों की संख्या 10 लाख से अधिक थी, अब सक्रिय मामलों की संख्या 7,48,538 है।