केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाने के लिए लोगों पर की जा रही दवा के छिड़काव के खिलाफ एडवाइजरी जारी की है। मंत्रालय का कहना है कि यह छिड़काव शारीरिक और मानसिक, दोनों रूप से हानिकारक है।
एडवाइजरी में कहा गया है कि यदि कोई व्यक्ति कोरोना वायरस के संपर्क में आ गया है तो उसके शरीर पर दवाइयों का छिड़काव करने से भी वायरस खत्म नहीं होगा। मंत्रालय ने कहा है कि ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है जो इसकी पुष्टि करे कि इससे शरीर का बाहरी हिस्सा संक्रमण मुक्त हो जाता है।
मंत्रालय ने कहा कि लोगों को संक्रमण से बचाने के लिए या उन्हें संक्रमण मुक्त करने के लिए सोडियम हाइपोक्लोराइट जैसी दवाइयों के छिड़काव के प्रभाव के संबंध में उसके पास कई सवाल आए थे। मंत्रालय ने कहा कि लोगों पर दवा के छिड़काव को मीडिया में काफी हाइप मिल रही है और कुछ जिलों तथा स्थानीय निकायों के क्षेत्र में इस्तेमाल भी हो रहा है।
वायरसनाशक एक रसायन है जोकि रोग उत्पन्न करने वाले रोगाणुओं या फिर अन्य हानिकारक सूक्ष्मजीवों को नष्ट करते हैं। यह उन पदार्थों को संदर्भित करता है जो निर्जीव वस्तुओं पर मजबूत रासायनिक गुणों के कारण इस्तेमाल किए जाते हैं। कोविड-19 के मरीजों या संदिग्ध मरीजों द्वारा जिस जगह को बार-बार छुआ जाता है उसे संक्रमण मुक्त बनाने के लिए रासायनिक दवाइयों/घोलों आदि के उपयोग की बात कही गई है।
इस प्रक्रिया में एहतियात बरतने की भी आवश्यकता होती है। एडवाइजरी में कहा गया है कि व्यक्तियों और समूह पर किसी भी सूरत में ऐसी दवाइयों का छिड़काव करने की सलाह नहीं दी जाती है। किसी भी व्यक्ति या समूह पर रासायनिक घोल का छिड़काव शारीरिक एवं मानसिक रूप से नुकसान पहुंचाता है।
एडवाइजरी में कहा गया है क्लोरीन का लोगों पर छिड़काव से आंखों और त्वचा पर खुजली होने के साथ ही उल्टी और दूसरी अन्य समस्याएं हो सकती हैं। सोडियम हाइपोक्लोराइट के इस्तेमाल से म्यूकस बनने से लेकर नाक, गले, श्वसन प्रणाली में दिक्कत आ सकती है। इसके अलावा ऐसे कदमों से लोगों के बीच संक्रमणमुक्त होने के बारे में गलत धारणा बन सकती है और सामाजिक दूरी तथा हाथ धोने जैसे सुरक्षात्मक कदमों व जागरूक पहलों को नुकसान पहुंच सकता है।