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#LadengeCoronaSe: इलाज में जुटे डॉक्टरों की क्या है दिनचर्या, सच जानकर इन योद्धाओं को करेंगे सैल्यूट

Thu, 23 Apr 2020 03:59 AM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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डॉक्टर इलाज करते हुए (फाइल फोटो ) - फोटो : पीटीआई
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पूरी दुनिया में कोरोना वायरस के कहर से हाहाकार मचा हुआ है। अब तक पौने दो लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इसी कड़ी में भारत भी इस संकट का सामना करते हुए बचाव की कोशिश में जुटा है। देश में जो लोग इस खतरनाक और जानलेवा वायरस से संक्रमित हो चुके हैं, उन्हें बचाने के हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। देश के डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मी अपनी जान पर खेलकर संक्रमितों को इलाज दे रहे हैं। इस दौरान कई डॉक्टर खुद संक्रमित हो चुके हैं और कई तो अपनी जान तक गंवा चुके हैं। वहीं देश के कई हिस्सों से चिकित्सकों के साथ अभद्रता और उन पर पथराव जैसी खबरें भी आई हैं। परंतु इलाज में जुटे इन चिकित्सकों की दिनचर्या का सच जानकर आप भी इन्हें सैल्यूट करेंगे।

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डर: कहीं हमारे परिजन शव लेने से इनकार ना कर दें
देश के चिकित्सक अपनी जान की परवाह किए बगैर संक्रमति मरीजों का इलाज कर रहे हैं। इनकी दिनचर्या कितनी मुश्किल है इसका आम लोग सिर्फ अंदाजा ही लगा सकते हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, कोरोना का मरीजों का इलाज कर रहे चिकित्सकों में से एक हैं डॉ. सुमित कुमार, जो एक बड़े अस्पताल में कार्यरत हैं।

वह कहते हैं कोरोना मरीजों का इलाज करने जाने से पहले हमें अपने अंदर के डर को खत्म करना पड़ता है। वह कहते हैं हमारे लिए रेड जोन युद्ध क्षेत्र के सामान है, जहां कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज किया जाता है और खुद हमारी जिंदगी दांव पर होती है। हमें मरने से ज्यादा चिंता हमारे शव के लावारिस होने को लेकर है।
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बता दें देश के कुछ क्षेत्रों से ऐसी खबरें आईं है कि कोरोना के कारण संक्रमित मरीज या चिकित्सक की मौत के बाद परिजनों ने उनके शव को लेने से ही इनकार कर दिया। यहां तक कि शव को दूर से देखने से भी इनकार कर दिया। परिजनों को डर है कि कहीं उन्हें भी संक्रमण ना हो जाए।

7 से 8 घंटे तक वॉशरूम तक नहीं जा पाते
डॉ. सुमित बताते हैं कि संक्रमण से बचने के लिए चिकित्सक पीपीई किट पहनते हैं लेकिन इसके पहनने के बाद हमें व्यक्तिगत तौर पर पूरे दिन कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। मसलन, शरीर का तापमान बढ़ जाना। यह एक सबसे बड़ी समस्या है, गर्मी का मौसम और पसीना बहना, फिर मास्क पहने होने के कारण आसानी से सांस लेने में परेशानी होना।

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पीपीई किट पहनकर लगता है जैसे बुलेटप्रूफ जैकेट पहनी हो...

वहीं एक महिला चिकित्सक डॉक्टर छवि गुप्ता अपना दर्द साझा करते हुए कहती हैं कि पीपीई किट को पहनने के बाद लगता है बुलेटप्रूफ जैकेट पहन किसी युद्ध क्षेत्र में जा रहे हैं। हम जल्दी-जल्दी इस किट को बदल भी नहीं सकते, क्योंकि एक किट की कीमत करीब 1000 रुपये होती है। 

डॉक्टर गुप्ता कहती हैं हम अपने परिवार से मिलने घर तक नहीं जा सकते, क्योंकि इससे संक्रमण का खतरा है। इसलिए दिल्ली सरकार द्वारा डॉक्टरों के रहने के लिए पांच सितारा और चार सितारा होटल में कमरे की व्यवस्था की गई है।

वहीं नर्सों के लिए तीन सितारा होटल की व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि जब हम कोरोना मरीजों का इलाज करते हैं तो उस समय हर बात भूल जाते हैं और सिर्फ ड्यूटी पर ध्यान केंद्रित करते हैं। जब तक कोरोना से यह लड़ाई खत्म नहीं हो जाती तब तक हम घर नहीं जा सकते।

मकान मालिक जबरदस्ती रूम खाली करने को कहते हैं
हिंदू राव अस्पताल के चिकित्सक पीयूष सिंह ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि कोरोना से लड़ाई के दौरान हमारी सुरक्षा भी जरूरी है। हमें इलाज करने के लिए उपयुक्त एवं दुरुस्त उपकरणों की जरूरत है। चिकित्सकों पर हमला करने वाले लोगों को यह समझना होगा कि हम अपनी जान पर खेलकर उनके इलाज के लिए जाते हैं और उनकी जिंदगी बचाते हैं। इसलिए उन्हें हमारी तकलीफें भी समझनी चाहिए। 

डॉक्टर सिंह ने बताया कि हमें इस कठिन समय में कुछ लोगों के व्यवहार से दुख होता है। कुछ लोग ऐसे हैं जो हमसे जबरदस्ती अपना कमरा खाली करने को कहते हैं क्योंकि उन्हें लगता है हम उन्हें संक्रमित कर देंगे। हमारे लिए सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि हम अपने परिवार और बच्चों से दूर हैं।

बेटी जन्मदिन का केक काटती रही, दूर से देखता रहा डॉक्टर पिता
जरा सोचिए, आप अपनी बेटी से चंद कदमों की दूरी पर हों, लेकिन आप चाह कर भी उसे छू नहीं सकते, वह भी उसके जन्मदिन जैसे अहम मौके पर। किसी पिता के लिए यह कितना निराशाजनक पल है। मध्य प्रदेश के इंदौर में कोरोना मरीजों का इलाज कर रहे डॉक्टर बलराम की बेटी का जन्मदिन गुरुवार को था।

कोरोना ड्यूटी की वजह से वह इन दिनों होटल में रह रहे हैं। गुरुवार को 9 साल की बेटी की जिद पर वह घर गए, लेकिन वह उसके पास नहीं जा सके। बेटी केक काटती रही, डॉक्टर पिता दूर से ही देखकर खुश होते रहे।
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