वहीं एक महिला चिकित्सक डॉक्टर छवि गुप्ता अपना दर्द साझा करते हुए कहती हैं कि पीपीई किट को पहनने के बाद लगता है बुलेटप्रूफ जैकेट पहन किसी युद्ध क्षेत्र में जा रहे हैं। हम जल्दी-जल्दी इस किट को बदल भी नहीं सकते, क्योंकि एक किट की कीमत करीब 1000 रुपये होती है।
डॉक्टर गुप्ता कहती हैं हम अपने परिवार से मिलने घर तक नहीं जा सकते, क्योंकि इससे संक्रमण का खतरा है। इसलिए दिल्ली सरकार द्वारा डॉक्टरों के रहने के लिए पांच सितारा और चार सितारा होटल में कमरे की व्यवस्था की गई है।
वहीं नर्सों के लिए तीन सितारा होटल की व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि जब हम कोरोना मरीजों का इलाज करते हैं तो उस समय हर बात भूल जाते हैं और सिर्फ ड्यूटी पर ध्यान केंद्रित करते हैं। जब तक कोरोना से यह लड़ाई खत्म नहीं हो जाती तब तक हम घर नहीं जा सकते।
मकान मालिक जबरदस्ती रूम खाली करने को कहते हैं
हिंदू राव अस्पताल के चिकित्सक पीयूष सिंह ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि कोरोना से लड़ाई के दौरान हमारी सुरक्षा भी जरूरी है। हमें इलाज करने के लिए उपयुक्त एवं दुरुस्त उपकरणों की जरूरत है। चिकित्सकों पर हमला करने वाले लोगों को यह समझना होगा कि हम अपनी जान पर खेलकर उनके इलाज के लिए जाते हैं और उनकी जिंदगी बचाते हैं। इसलिए उन्हें हमारी तकलीफें भी समझनी चाहिए।
डॉक्टर सिंह ने बताया कि हमें इस कठिन समय में कुछ लोगों के व्यवहार से दुख होता है। कुछ लोग ऐसे हैं जो हमसे जबरदस्ती अपना कमरा खाली करने को कहते हैं क्योंकि उन्हें लगता है हम उन्हें संक्रमित कर देंगे। हमारे लिए सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि हम अपने परिवार और बच्चों से दूर हैं।
बेटी जन्मदिन का केक काटती रही, दूर से देखता रहा डॉक्टर पिता
जरा सोचिए, आप अपनी बेटी से चंद कदमों की दूरी पर हों, लेकिन आप चाह कर भी उसे छू नहीं सकते, वह भी उसके जन्मदिन जैसे अहम मौके पर। किसी पिता के लिए यह कितना निराशाजनक पल है। मध्य प्रदेश के इंदौर में कोरोना मरीजों का इलाज कर रहे डॉक्टर बलराम की बेटी का जन्मदिन गुरुवार को था।
कोरोना ड्यूटी की वजह से वह इन दिनों होटल में रह रहे हैं। गुरुवार को 9 साल की बेटी की जिद पर वह घर गए, लेकिन वह उसके पास नहीं जा सके। बेटी केक काटती रही, डॉक्टर पिता दूर से ही देखकर खुश होते रहे।