वैश्विक महामारी कोरोना वायरस का कहर जारी है। दुनिया भर में कोरोना वायरस से अब तक 7.98 करोड़ लोग संक्रमित हो गए हैं। वहीं 17.51 लाख से अधिक लोगों की मौत हो गई है। लोगों में कोरोना वायरस का खौफ इस कदर है कि वे गंभीर रोगों से ग्रस्त होने के बावजूद अस्पताल जाकर डॉक्टर से नहीं मिल रहे हैं। इसके चलते हार्ट अटैक और इससे होने वाली मौतों में भारी बढ़ोतरी देखी जा रही है।
महाराष्ट्र में हार्ट अटैक और इससे अचानक मौतों में बढ़ोतरी कई अस्पताल देख रहे हैं। डॉक्टर ने बताया कि इसका सबसे बड़ा कारण ‘कोविड फोबिया' है। लोग कोरोना जांच कराने से बचने के लिए अस्पताल नहीं पहुंच रहे हैं। या तो मृत लोगों को अस्पताल लाया जाता है या फिर अस्पताल लाते ही उनकी मौत हो जा रही है। वहीं कुछ अस्पतालों में दिल के 90 प्रतिशत तक फॉलोअप मरीज डॉक्टर के संपर्क में नहीं हैं। हार्ट अटैक और इससे मौतें बीते दो महीनों में बढ़ गईं हैं।
हार्ट अटैक से होने वाली मौतों में 15 फीसदी की बढ़ोतरी
सरकारी आंकड़ा आने में अभी समय लगेगा, लेकिन कई बड़े अस्पताल, हार्ट अटैक से अचानक हुई मौतों में 15-20 फीसदी बढ़ोतरी बता रहे हैं। कारण, कोविड फोबिया के कारण अस्पताल पहुंचने में देरी और सांस की तकलीफ को कोविड से जोड़कर बिना डॉक्टर के सलाह के गलत दवा का सेवन से भी मौतें बढ़ रही हैं।
सीना हार्ट इंस्टिट्यूट से जुड़े एक कार्डियोलोजिस्ट बताते हैं कि कुछ महीनों से हार्ट अटैक से अचानक मौत के मामले 10-20 फीसदी तक बढ़े हैं। उन्होंने बताया कि जिन मरीजों के सीने में दर्द हुआ, अगर वो तुरंत अस्पताल गया, तो तत्काल इलाज मिलने से उसकी जान बच सकती है। लेकिन अगर वो देरी से आता है, तो दिक्कतें बढ़ जाती हैं और अचानक मौत हो जाती है। गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचे मरीजों को बचाने के कम चांस ही डॉक्टरों के पास होते हैं।
फोर्टिस हीरानंदानी अस्पताल वाशी के एक कार्डियोलॉजिस्ट ने एक महीने में करीब 15 मरीज ऐसे देखे हैं, जो हार्ट अटैक से मृत अस्पताल लाए गए। वहीं डॉक्टर के 90 प्रतिशत हार्ट के मरीज फॉलोअप के लिए नहीं आ रहे। उन्होंने बताया कि 10-15 मरीज ऐसे थे, जो या तो हमारे पास ब्रॉट डेड आए या देरी से आए की उनकी सही इलाज नहीं हो पाया और उनकी मौत हो गई। अभी तो हम सिर्फ 10 प्रतिशत फॉलोअप मरीजों को देख रहे हैं। 90 प्रतिशत से अधिक मरीज नहीं आए। हालांकि, उन 90 प्रतिशत लोग कहां हैं, उनके बारे में हमें ज्यादा जानकारी नहीं है।
कोरोना जांच का डर
एक चिकित्सक ने बताया कि जितने हॉस्पिटल हैं, उसमें एक प्रोटकॉल बना है कि भर्ती से पहले मरीजों का कोविड ऐंटिजेन टेस्ट होगा। इससे पहले कि उनपर कोविड या नॉन कोविड का लेबल लगे। इस डर की वजह से वे लोग अस्पताल ही नहीं आते ताकि लोगों की कोरोना जांच हो सके। इसलिए लोग बीमारी के लक्षण छिपा रहे हैं, इसके चलते मिस्ड हार्ट अटैक, अंडर ट्रीटेड हार्ट अटैक, साइलेंट हार्ट अटैक काफ़ी बढ़ गए हैं।