चीन में मिला था कोरोना वायरस का पहला मामला
कोविड -19 वायरस का पहला मामला 2019 के अंत में चीन में पाया गया था, जबकि भारत में पहला मामला जनवरी 2020 के अंत में सामने आया। तबसे, भारत में लगभग 4.5 करोड़ पॉजिटिव मामले सामने आए। कोविड की कई लहरों के दौरान पांच लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि, हाल के महीनों में कोविड के में काफी गिरावट आई है और सक्रिय मामलों की संख्या अब लगभग 1,800 है, जिसमें लगभग 99 फीसदी समग्र रिकवरी दर और लगभग 1 फीसदी मृत्यु दर है।
मार्च 2022 के बाद दर्ज किए गए सबसे कम मामले
मंगलवार को केवल 36 नए मामले सामने आए, जो मार्च 2020 के बाद से सबसे कम है और मई 2021 में महामारी के चरम के दौरान एक दिन में चार लाख से अधिक और जनवरी 2022 में फिर से तीन लाख से अधिक नए मामले दर्ज किए गए थे। इसके अलावा, भारत में कोविड टीकों की 220 करोड़ से अधिक खुराक दी गई हैं, जिसमें भारत की लगभग 90 फीसदी पात्र आबादी का पूरी तरह से टीकाकरण हो चुका है।
आईसीएमआर के वैज्ञानिकों की टीम रख रही कड़ी नजर
उन्होंने कहा, 'कोविड एंडेमिक स्टेज के कगार पर है। हालांकि, भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के वैज्ञानिकों की हमारी टीम कोविड के प्रत्येक वेरिएंट पर कड़ी नजर रख रही है। अब तक, देश में कोविड के 224 से अधिक वेरिएंट देखे गए हैं, प्रत्येक वेरिएंट के लिए निरंतर जीनोम सीक्वेंसिंग की जा रही है।
जीवित रहने में कामयाब रहा कोरोना वायरस: मंडाविया
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि जब भी कोई नया वेरिएंट पाया जाता है, तो उसे अलग किया जाता है और फिर टीके की प्रभावशीलता के लिए परीक्षण किया जाता है और यह भी मापा जाता है कि यह कितना घातक है। उन्होंने कहा, 'यह सब एक सतत प्रक्रिया है और हम इस पर करीब से नजर रख रहे हैं, ताकि हम भविष्य में किसी भी वेरिएंट से खुद को सुरक्षित कर सकें और उसके खिलाफ तैयार रह सकें जो किसी भी विनाश का कारण बन सकता है। दुनिया भर में स्थिति अभी स्थिर है और भविष्य को ध्यान में रखते हुए हम सतर्क हैं। लेकिन मैं कहूंगा कि यह एक वायरस है और यह वायरस कभी दूर नहीं होने वाला है क्योंकि यह जीवित रहने में कामयाब रहा है।'