दिल्ली का सदर बाजार होली-दीवाली जैसे त्योहारों के सामानों की बिक्री के लिए प्रसिद्ध है। यहां से देश के ज्यादातर उत्तरी राज्यों के व्यापारी सामान ले जाकर खुदरा बाजार में बेचते हैं, लेकिन इस साल कोरोना संक्रमण के कारण अनेक जगहों पर प्रशासन के सख्ती की शुरुआत हो चुकी है। इसका सीधा असर सदर बाजार के व्यापार पर हुआ है। यहां थोक व्यापारी नहीं पहुंच रहे हैं।
सदर बाजार के व्यापारी अनिमेष जैन ने अमर उजाला को बताया कि अकेले राजधानी में होली के पहले 15 दिनों में डेढ़ से दो हजार करोड़ रूपये का व्यापार होता है, लेकिन इस साल बाहर के व्यापारी आधी संख्या में भी नहीं पहुंचे। इसके कारण यहां व्यापार को भारी नुकसान हुआ है। रंग, गुलाल से लेकर पिचकारी तक सबकी बिक्री बहुत कम हुई है।
केवल उत्तर प्रदेश, राजस्थान और बिहार के कुछ व्यापारियों ने सदर बाजार से खरीदारी की है। इस कारण बाजार में कुछ हलचल हुई अन्यथा कोरोना काल के बाद यह दूसरा साल है जब व्यापारियों की होली बेरंग हो गई है।
दिल्ली सरकार ने होली मिलन के सामूहिक कार्यक्रमों पर रोक लगा दी है। इससे पहले से आयोजित होली मिलन के कार्यक्रम रद्द किए जा रहे हैं। इससे इस क्षेत्र में काम कर रहे टेंट, हलवाई और कारीगरों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। व्यापारियों को अभी से शादियों के सीजन में मंदी का डर भी सताने लगा है।उन्हे आशंका है कि अगर इसी तरह संक्रमण बढ़ता रहा तो शादियों के सीजन के दौरान भी प्रतिबंध जारी रहेगा। ऐसा हुआ तो एक बार फिर इस क्षेत्र को भारी नुक्सान उठाना पड़ेगा।
चैम्बर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री के चेयरमैन ब्रजेश गोयल ने कहा कि राजधानी में हर बार होली पर 2500 होली मिलन के कार्यक्रम आयोजित होते हैं, लेकिन संक्रमण के डर से सरकार अभी से सक्रिय हो गई है। इसका असर हुआ है कि अनेक कार्यक्रमों को लोगों को रद्द करना पड़ा। इससे व्यापारियों को भारी नुकसान हुआ है। गोयल ने आशंका जताई कि इस साल भी लगभग 70 प्रतिशत तक व्यापार मंदा रह सकता है।
व्यापारियों को इस साल भी कोरोना पर बाजार ठंडा रहने का अनुमान था। यही कारण है कि इस साल पहले से ही व्यापारियों ने ज्यादा सामान मंगवाने में रुचि नहीं दिखाई। इस कारण हर साल बाजार में छाई रहने वाली चीनी पिचकारी, गुलाल और खिलौने कम मिल रहे हैं। कुछ सामान की आवक हुई है, लेकिन व्यापारियों का कहना है कि इस बार माल कम होने की वजह से उन्हें 30 से 40 प्रतिशत तक ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है।
दरअसल, देश की राजधानी दिल्ली में यूपी-बिहार के लोगों की बड़ी संख्या कामकाज के सिलसिले में आती है। अभी भी कामकाज बहुत ज्यादा न होने से बहुत कम लोगों ने ही दिल्ली की तरफ रुख किया है, जबकि होली जैसे त्योहार इन्हीं इलाकों के लोग ज्यादा खुशी के साथ मनाते हैं। यही कारण है कि इस बार दिल्ली के बाजारों में भी रौनक देखने को नहीं मिल रही है।
होली का सामान बेच रहे व्यापारी सूरज ने अमर उजाला को बताया कि होली के समय से उनके व्यापार की शुरुआत हो जाती थी। इसके बाद शादियों के सीजन में कमाई हो जाती थी, लेकिन इस साल बाजार में ज्यादा लोग नहीं आ रहे हैं और बाजार खाली पड़े हैं। इससे कमाई भी नहीं हो रही है और खर्च निकालना भी भारी पड़ रहा है।