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Covid Statistics India: हमें चारों ओर से घेर चुका है कोरोना, एक दिन में क्यों बढ़े 26 हजार मामले? यहां समझिए खेल

Wed, 12 Jan 2022 02:01 PM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कोरोना हमें चारों ओर से घेर चुका है। हम कितने संक्रमितों से घिरे हुए हैं इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है। ऐसे में कोरोना जांच की सुस्त रफ्तार हमें फिर से खतरे में डाल सकती है। खुद का बचाव व सतर्कता ही सबसे कारगर उपायों में से एक है। 
 
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कोरोना जांच के आंकड़े - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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देश में एक बार फिर से विकराल होते कोरोना के बीच हमारी सांसों के साथ आंकड़ों का गणित खेला जा रहा है। अंकों के खेल में फंसाकर आपको सुरक्षित होने की दिलासा दी जा रही है, लेकिन हकीकत इससे जुदा है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े इस हकीकत को बयां करते हैं। सामने आया है कि देश में कोरोना और ओमिक्रॉन संक्रमितों की संख्या सिर्फ प्रतिदिन होने वाली जांच पर ही टिकी है। ऐसे में समझदारी इसी में है कि हम हर हाल में खुद का बचाव करें। 

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संक्रमितों की संख्या पर मत जाइए 
देश में सोमवार को 1.80 लाख से ज्यादा संक्रमित आए थे। इतनी बड़ी संख्या में संक्रमित सामने आने से डर का माहौल बन गया। मंगलवार को यह संख्या घट गई और 1.68 लाख(1,68,063) मामले सामने आए, लेकिन बुधवार को एक बार फिर से 1.94 लाख(1,94,720) संक्रमित सामने आए। इन आंकड़ों को देखकर यही समझ आता है कि कोरोना हमें चारों ओर से घेर चुका है और संक्रमितों की वास्तिवक संख्या हकीकत से कहीं ज्यादा है। 

टेस्टिंग में कैसे हो रहा खेल 
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जो आंकड़े पेश किए जा रहे हैं, उसे देखकर तो यही लगता है कि सबकुछ प्रतिदिन होने वाली कोरोना जांच पर ही निर्भर कर रहा है। दरअसल, 10 जनवरी को देश में 15,79,928 लोगों के सैंपल लिए गए। तब 1.68 लाख मरीज ही सामने आए। हालांकि, जैसे ही 11 जनवरी को करीब दो लाख जांचें बढ़ीं तो 26 हजार से ज्यादा मरीज भी बढ़ गए। 11 जनवरी को 17,61,900 सैंपल लिए गए और देश में रिकॉर्ड 1,94,720 मरीज सामने आए। 

कैसे फंसाया गया टेस्टिंग में पेच 
जैसे-जैसे देश में कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ रही है, टेस्टिंग में पेच फंसाया जा रहा है। कोरोना बढ़ते मामलों के बीच ICMR ने नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। अब हर किसी को कोरोना जांच कराने की जरूरत नहीं है। संक्रमित के संपर्क में भी आने पर सिर्फ उन्हीं लोगों का टेस्ट करवाया जाएगा, जो बुजुर्ग हैं या गंभीर रूप से बीमार हैं। यानी संक्रमित के संपर्क में आने के बाद भी आप में लक्षण नहीं दिख रहे हैं तो आपको टेस्ट कराने की जरूरत भी नहीं है। 

ओमिक्रॉन के आंकड़ों में है बड़ा झोल 
एक तरफ दुनिया में कोरोना का ओमिक्रॉन वैरिएंट वैरिएंट तांडव मचा रहा है तो भारत में अब तक इसके सिर्फ 4,868 मरीज ही सामने आए हैं। दरअसल, कोरोना जांच में पॉजिटिव पाए गए मरीज में ओमिक्रॉन की पुष्टि के लिए जीनोम सिक्वेंसिंग की जरूरत होती है। भारत में इसकी लैब 40 से भी कम हैं। ऐसे में जो राज्य जीनोम सिक्वेसिंग के लिए सैंपल ले भी रहे हैं, तो उनको रिपोर्ट के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। सूत्रों का कहना है कि एक रिपोर्ट के लिए 10 दिन से ज्यादा का इंतजार करना पड़ रहा है। 

राज्यों ने RTPCR टेस्ट भी किए कम 
राज्यों ने कोरोना के RTPCR टेस्ट भी कम कर दिए हैं। ज्यादातर जांच रैपिड एंटीजन के माध्मय से हो रही है। यही कारण है कि हल्के लक्षण वाले मरीज एंटीजन रिपोर्ट में पकड़ में नहीं आ रहे हैं। वहीं अगर इनकी RTPCR जांच की जाए तो बिना लक्षण वाले भी मरीज सामने आ रहे हैं। 
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धीमी जांच की यहां से होती है पुष्टि
देश में कोरोना की जांच कितनी सुस्त है, इसकी पुष्टि केंद्र सरकार के एक पत्र से होती है। दरअसल, एक सप्ताह पहले केंद्र सरकार ने नौ राज्यों को पत्र लिखकर कोरोना टेस्टिंग बढ़ाने को कहा था। यहां पर कोरोना जांच की रफ्तार बहुत धीमी थी। केंद्र की ओर से तमिलनाडु, पंजाब, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मिजोरम, मेघालय, जम्मू-कश्मीर और बिहार सरकार को पत्र लिखा गया था।
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