डा. आनंद कृष्णन को भी संदेह
एम्स के डा. आनंद कृष्णन का कहना है कि कोविड-19 की वैक्सीन को लेकर अभी केवल दावा किया जा सकता है, लेकिन दवा कितना सही होगा, नहीं कहा जा सकता। हालांकि आनंद कृष्णन का कहना है कि तमाम वायरस जनित रोगों की वैक्सीन विकसित हुई है। पोलियो, स्माल पॉक्स समेत कई वायरस की वैक्सीन खोजी गई।
इंफ्लुएंजा, हैपेटाइटिस की वैक्सीन विकसित हुई। इसलिए प्रयोगशाला में वैक्सीन का निर्माण किया जा सकता है, लेकिन यह नहीं कहा जा सकता कि व्यवहारिक रूप में कितनी सफल हो पाएगी। वहीं रवि शर्मा कहते हैं कोविड-19 प्राकृतिक रूप से पैदा हुआ वायरस नहीं है। यह प्रयोगशाला में कृत्रिम रूप से तैयार किया गया है।
इसलिए यह कितना उत्परिवर्तन करेगा और इसके लक्षण कितने रूप लेंगे, इसका आकलन मुश्किल है। रवि शर्मा और डा. आनंद कृष्णन दोनों का कहना है कि कोविड-19 जल्द जाने वाली बीमारी नहीं है। अब दुनिया को इसके साथ जीने की आदत डालनी पड़ेगी।
भारत में अभी खतरनाक रूप ले सकता है कोविड-19
रवि शर्मा ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में आशंका जाहिर की कि अगस्त के अंत तक कोविड-19 भारत में खतरनाक रूप धारण कर सकता है। शर्मा के अनुसार वायरस महानगरों, राजधानियों से निकल कर छोटे-छोटे जिलों, कस्बों, गांवों में पहुंच चुका है। इसके सामानांतर दुर्भाग्य है कि इसके परीक्षण का अभी तक कोई रणनीतिक इंतजाम या तरीका नहीं अपनाया जा सकता है।
इसलिए संक्रमण फैलने की संभावना लगातार बढ़ रही है। उत्तर प्रदेश. बिहार, महाराष्ट्र, दिल्ली समेत तमाम राज्यों में काम कर रहे विशेषज्ञों के इनपुट के आधार पर रवि शर्मा का कहना है कि कोविड-19 के संक्रमण पर काबू पाने के लिए केंद्र सरकार को राज्य सरकारों के साथ मिलकर विशेष प्रयास करना होगा।
अर्थव्यवस्था पर डालेगा गहरा असर
रवि शर्मा का कहना है कि होटल, टूरिज्म, हॉस्पिटैलिटी से जुड़े सेक्टर पर इसका बहुत बुरा असर पड़ा है। इसके अलावा छोटे, मझोले कारोबारियों को इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है। हालांकि शर्मा का कहना है कि संक्रमण और जीवन पर आसन्न खतरे की परवाह किए बिना देश का मध्य वर्ग, निम्न वर्ग, छोटा कारोबारी, एमएसएमई सभी ने काम धंधा शुरू कर दिया है, लेकिन किसी भी क्षेत्र से बहुत उत्साहजनक रिपोर्ट नहीं आ रही है।
बताते हैं इसके चलते रियल एस्टेट समेत तमाम सेक्टरों के बैठ जाने के आसार हैं। कोविड-19 के दुष्प्रभावों पर अध्ययन कर रहे आईआईटी के पूर्व छात्र आरपी सिंह का कहना है कि अक्टूबर महीने का इंतजार करना होगा।
वह कहते हैं अक्टूबर और नवंबर का महीना भारत में कारोबारी लिहाज से अहम होता है। हालांकि अभी बाजार में रौनक जैसा कोई माहौल दिखाई नहीं दे रहा है। इससे यही अंदाजा लग रहा है कि अर्थव्यवस्था को काफी बड़ा झटका लगने जा रहा है। एक बड़ा वर्ग बेरोजगार हो सकता है, लेकिन इसके सटीक आकलन के लिए थोड़ा रुकना होगा।