वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों के मामलों की रिपोर्टिंग के लिए सुप्रीम कोर्ट से दिशा-निर्देश बनाने का आग्रह किया है। एमाइकस क्यूरी इंदिरा जयसिंह ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि ऐसे मामलों की निष्पक्ष सुनवाई के लिए प्रेस की स्वतंत्रता और पीड़ित के अधिकारों के बीच सामंजस्य बनाए जाने की जरूरत है।
जस्टिस मदन बी लोकुर, एस अब्दुल नजीर और दीपक गुप्ता की पीठ को जयसिंह ने बताया कि कोर्ट के अधीन मामलों की मीडिया में समानांतर सुनवाई होती है और कोर्ट को दिशा-निर्देश बनाने चाहिए कि कैसे महिलाओं के खिलाफ अपराध की रिपोर्टिंग हो। एमाइकस क्यूरी ने दावा किया कि कोर्ट में चार्जशीट दाखिल करने से पहले पुलिस मीडिया में जानकारी लीक करती है, इससे न्यायपालिका के अधिकारों में हस्तक्षेप होता है।
उन्होंने कठुआ गैंगरेप और हत्या मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि पुलिस के चार्जशीट दाखिल करने से पहले ही मीडिया ने अपना फैसला सुना दिया कि कुछ आरोपी निर्दोष हैं। केंद्र की ओर से पेश हुई अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल पिंकी आनंद ने जवाब दाखिल करने के लिए कुछ समय मांगा। इसके बाद कोर्ट ने 11 सितंबर तक के लिए स्थगित कर दी।