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इंटरव्यू: देश बिजली उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर, ट्रांसमिशन में शीघ्र दूर होगी कंजेशन की समस्या

Mon, 29 Apr 2019 05:28 AM IST
गौरव द्विवेदी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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बिजली (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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देश बिजली उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर हो गया है। हालांकि, ढांचागत संरचना की कमी से ट्रांसमिशन में कंजेशन की समस्या है। बिजली मंत्रालय की नवरत्न कंपनी पावरग्रिड का कहना है कि शीघ्र ही कंजेशन की समस्या दूर हो जाएगी। कंपनी के कामकाज और भविष्य की योजनाओं पर अमर उजाला के शिशिर चौरसिया ने हाल ही में कंपनी के  सीएमडी का अतिरिक्त प्रभार संभालने वाले निदेशक कार्मिक रवि पी. सिंह से बातचीत की। पेश है अंश : 

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छत्तीसगढ़ के रायगढ़ से तमिलनाडु के पुगलुर और केरल के नॉर्थ त्रिचुर को जोड़ने के लिए ट्रांसमिशन लाइन बनकर तैयार होने वाला है। इसके बाद देश के किसी भी हिस्से में बनी बिजली को विभिन्न राज्यों में निर्बाध पहुंचाया जा सकेगा।

प्रश्न- प्रधानमंत्री ने 2040 तक कम-से-कम 40 फीसदी बिजली उत्पादन बिना जीवाश्म ईंधन के करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए ट्रंासमिशन को लेकर क्या काम हो रहा है?
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उत्तर- इस दिशा में तेजी से काम चल रहा है और 80-90 फीसदी कार्य पूरा हो चुका है। सरकार ने अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में 75 गीगावाट बिजली बनाने का लक्ष्य रखा है। इसमें से 12 गीगावाट बिजली उत्पादन के लिए टेंडर जारी हो चुका है। फिर अक्तूबर, 2020 तक 16 गीगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य है, जिसमें सोलर पावर के साथ विंड पावर भी है। सोलर पावर के ट्रांसमिशन के लिए पावर प्लांट से मेन ट्रांसमिशन लाइन तक लाइन बनानी होगी। सोलर के लिए थोड़ा ज्यादा लाइन बनाना पड़ता है क्योंकि इसमें 24 घंटे तो बिजली बनती नहीं है। 

प्रश्न- देश में बिजली की कोई कमी नहीं है, लेकिन ट्रांसमिशन में कंजेशन की समस्या कब दूर होगी?
उत्तर- आपने सही कहा कि देश में अब बिजली की कोई कमी नहीं है। इस समय करीब 3.80 लाख मेगावाट बिजली उत्पादन की इंस्टॉल्ड कैपेसिटी है। कंजेशन की वजह से कभी-कभी सही जगह तक बिजली पहुंचाने में दिक्कत होती है। इस समय उत्तर या पश्चिमी भारत में ऐसी कोई परेशानी नहीं है, लेकिन दक्षिण भारत में थोड़ी दिक्कत है। इसलिए छत्तीसगढ़ के रायगढ़ से तमिलनाडु के पुगलूर के बीच एक ट्रांसमिशन लाइन बिछाई जा रही है। इसका काम पूरा हो जाने के बाद कोई समस्या नहीं आएगी।

प्रश्न- पावरग्रिड ने दूरसंचार क्षेत्र में भी प्रवेश किया है। उस दिशा में क्या प्रगति है और इससे कितना राजस्व मिलता है?
उत्तर- दूरसंचार क्षेत्र में काफी संख्या में खिलाड़ी आ गए हैं, जिससे गलाकाट प्रतिस्पर्धा हो गई है। हर साल काम का वॉल्यूम डेढ़ या दोगुना कर दिया जाता है, आमदनी उतनी ही रहती है। पिछले साल जितनी आमदनी हुई थी, उसे ही बनाए रखने के लिए हमें काफी मेहनत करनी पड़ रही है। पावरग्रिड का नेटवर्क कुछ ऐसे दुरूह स्थानों पर है, जहां दूसरी कंपनियों का नेटवर्क है ही नहीं। पूर्वोत्तर के सात राज्यों में कंपनी का जबरदस्त नेटवर्क है। जम्मू-कश्मीर में भी बेहतर नेटवर्क है। इसका लाभ कंपनी को मिलता है। देखिए, श्रीनगर में जब बाढ़ आई थी तो उस समय सभी कंपनियों का नेटवर्क बैठ गया था और सिर्फ हमारा ही नेटवर्क चल रहा था। इसकी वजह है कि सबका नेटवर्क जमीन के अंदर है, जबकि हमारा ओवरहेड है। इसका लाभ मिलता है। कंपनी को इससे करीब 550 करोड़ रुपये का राजस्व मिलता है।

प्रश्न- रेलवे ने अपने सभी तय मार्गों के विद्युतीकरण का लक्ष्य रखा है। आपकी पावरग्रिड की क्या हिस्सेदारी है?
उत्तर- कंपनी को रेल मंत्रालय की ओर से चार लाइनों के विद्युतीकरण का काम मिला है। इसमें मध्य रेलवे का पुणे से मिरज होते हुए कोल्हापुर तक 326 किलोमीटर का हिस्सा, दक्षिण पूर्व-मध्य रेलवे के तहत छिंदवाड़ा से नैनपुर होते हुए मांडला फोर्ट तक 183 किलोमीटर का हिस्सा, पूर्व-मध्य रेलवे के मानसी से सहरसा होते हुए दौरम मधेपुरा तक 63 किलोमीटर का हिस्सा और दक्षिण-पश्चिम रेलवे के लोंडा से मिरज तक 189 किलोमीटर का हिस्सा शामिल है। इनमें से एक का काम समय से पूरा हो गया है, जबकि तीन पर काम चल रहा है। यहां परेशानी यह है कि इनमें से कुछ मार्गों पर दोहरीकरण का काम चल रहा है। इस वजह से उनकी लाइन ही उखड़ जा रही है, जिससे हमें काम करने में समस्या आ रही है। वहां जैसे ही दोहरीकरण का काम पूरा होगा, विद्युतीकरण का कार्य पूरा कर दिया जाएगा। 

प्रश्न- प्रधानमंत्री मोदी अधिकतर भाषण में कुशल भारत की जरूर चर्चा करते हैं। इसके लिए कौशल विकास का अलग मंत्रालय भी बना है। तकनीक प्रधान कंपनी पावरग्रिड इस दिशा में क्या कर रही है?
उत्तर- आपने सही कहा... पावरग्रिड तकनीक प्रधान कंपनी है। इसके अधिकतर कर्मचारी और अधिकारी तकनीक बैकग्राउंड के हैं। इसलिए कौशल विकास के क्षेत्र में कंपनी का काम आसान हो जाता है। अपने परियोजना स्थलों पर काम करने के लिए एक निश्चित संख्या में अकुशल युवाओं को चुना जाता है। उन्हें हम कुछ महीने का प्रशिक्षण दिया जाता है। इस दौरान उन्हें वजीफा भी मिलता है। प्रशिक्षण पूरा होने पर उन्हें प्रमाणपत्र दिया जाता है। इसके साथ ही उनके नाम और पता की सूची कंपनी के ठेकेदारों को दे दी जाती है ताकि भविष्य में यदि इस क्षेत्र के जानकार की जरूरत पड़े तो उन्हें बुलाया जा सके। पूर्वोत्तर भारत में यह योजना काफी लोकप्रिय हुई है। 

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