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कोरोना वायरस: सस्ते के चक्कर में भरोसेमंद कोरोना की जांच से दूर राज्य सरकारें

Sat, 28 Nov 2020 07:59 AM IST
Kuldeep Singh परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
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coronavirus test demo - फोटो : PTI
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कोरोना वायरस की जांच में आरटी पीसीआर को सबसे भरोसेमंद माना जाता है। लेकिन इससे 6 गुना सस्ती एंटीजन किट्स होने के कारण हर राज्य में जांच का आंकड़ा बढ़ाने के लिए इन किट्स का भरपूर इस्तेमाल शुरू कर दिया गया है। इसका परिणाम यह रहा कि देश में आज भी 46 प्रतिशत से अधिक सैंपल की रोजाना जांच एंटीजन जांच से हो रही है। अगर इन जांचों की ओर देखें तो एंटीजन से 8 गुना अधिक आरटी पीसीआर में दिखाई दे रही है।

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विशेषज्ञ बोले, सस्ती जांच के साथ ज्यादा नंबर दिखाने के चक्कर में ज्यादा राज्य कर रहे भूल
उदाहरण के तौर पर देश की राजधानी दिल्ली को लेते हैं। 1 नवंबर को दिल्ली में 36,665 सैंपल की जांच हुई थी जिनमें से 10.91 प्रतिशत संक्रमण मिले थे। 11137 सैंपल की आरटी पीसीआर और 25,528 सैंपल की इंडियन किट्स के जरिए जांच हुई थी।

स्थिति यह रही कि आरटी पीसीआर के जरिए 23.62 फीसदी सैंपल संक्रमित मिले थे। जबकि इंडियन किट्स के जरिए महज 5.37 फीसदी सैंपल ही संक्रमित मिले। 1 से 25 नवंबर के बीच दिल्ली में एंटीजन किट्स के जरिए सबसे ज्यादा संख्या में सैंपल 7 नवंबर को मिले थे। जब इस तकनीक की मदद से 1 दिन में 8.39 फीसदी संक्रमित मिले थे।
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इसके बाद रोजाना आरटी पीसीआर जांच को सरकार ने बढ़ाया। जोधपुर स्थित आईआईटी के पूर्व प्रोफेसर रिजो एम जॉन का कहना है कि ज्यादा राज्य को ने जांच से जुड़े आंकड़ों के में पारदर्शिता नहीं बरत रहे हैं। ऐसा करने से कोविड की वास्तविक स्थिति के बारे में पता नहीं चल रहा है। अगर यह राज्य निष्पक्ष रुप से जानकारियों को सार्वजनिक करते हैं तो संक्रमण को लेकर बेहतर समीक्षा की जा सकती है।

10 हजार आरटी पीसीआर पर एक करोड़ खर्च
जानकारी के अनुसार, आरटी पीसीआर जांच पर कम ध्यान देने के पीछे इस तकलीफ तकनीक पर होने वाला खर्च है। एक अनुमान के के अनुसार, 10 हजार सैंपल जांच में करीब 1 करोड़ का खर्च आता है। इसमें बुनियादी ढांचा से लेकर रसायन, मशीन, कर्मचारी सैंपल लेने वाली टीम इत्यादि शामिल हैं जबकि एक इंडियन जांच की कीमत 450 रुपये है।

अंधाधुन जांच के लिए रास्ता विकल्प चुन रही सरकारें
स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉक्टर महेश शर्मा का कहना है कि दिल्ली में जांच के ये आंकड़े पूरी तस्वीर बयां कर रहे हैं क्योंकि सरकारों को अपना जांच का आंकड़ा भी ज्यादा दिखाना है। इसलिए हर कोई एंटीजन जांच पर जोर दे रहा है। जबकि हकीकत में इसका भी कितना फायदा हो रहा है यह दिल्ली की तस्वीर से पता चल रहा है।

मंत्रालय भी वापस आरटी पीसीआर पर दे रहा जोर
स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि संक्रमण दर की समीक्षा करने के बाद आरटी पीसीआर जांच के जरिए ही ज्यादा से ज्यादा मरीज मिलने की पुष्टि हो चुकी है। इसलिए हर राज्य को इस पर ध्यान देने की के लिए कहा जा रहा है। हाल ही में आईसीएमआर ने दिल्ली में शुरू की मोबाइल वैन में भी आरटी पीसीआर को ही रखा है। दिल्ली के कई जिलों में संक्रमण 20 फीसदी से भी अधिक है। ऐसे इलाकों में आरटी पीसीआर के जरिए ही जांच ज्यादा होनी चाहिए।

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