केंद्र सरकार ने कोरोना प्रबंधन के लिए 18 साल से कम उम्र के किशोरों और बच्चों के लिए संशोधित विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए हैं। सरकार ने कहा है कि पांच साल या उससे कम उम्र के बच्चों को मास्क नहीं लगाना चाहिए। इसके अलावा 18 साल से कम उम्र के बच्चों को एंटीवायरल या मोनोक्लोनल एंटीबॉडी नहीं दिया जाना चाहिए। स्वास्थ्य मंत्रालय ने संशोधित गाइडलाइंस में कहा है कि 6 से 11 साल के बच्चे अपने अभिभावकों की देखरेख में जरूरत के मुताबिक मास्क पहन सकते हैं। हालांकि उसे सुरक्षित और उचित तरीके से ही पहनाया जाना चाहिए। वहीं, 12 साल या उससे ज्यादा उम्र के किशोर वयस्कों की तरह ही ही मास्क पहन सकते हैं।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को 18 वर्ष और उससे कम उम्र के किशोरों और बच्चों के लिए जारी दिशानिर्देश में बिना लक्षण और हल्के लक्षण वाले कोरोना मरीजों को स्टेरॉयड का इस्तेमाल नहीं करने की सलाह दी है। साथ ही कहा है कि केवल अस्पताल में भर्ती होने वाले गंभीर मरीजों को कड़ी निगरानी में ही स्टेरॉयड दिया जाना चाहिए।
दिशानिर्देश में कहा गया है कि मरीजों को सही समय, सही मात्रा और सही अंतराल पर ही स्टेरॉयड दिया जाना चाहिए। इसमें कहा गया है कि सभी गंभीर और उबर रहे सामान्य लक्षण वाले मरीजों को कोर्टिकॉस्टेरॉयड मसलन डेक्सामेथासन 0.15 एमजी की एक दिन में अधिकतम छह खुराक दी जा सकती है। इसके अलावा मिथाइलप्रेडनिसोलोन 0.75 एमजी की एक दिन में अधिकतम 30 एमजी खुराक दी जा सकती है। ये दवा पांच से सात दिन तक दी जा सकती है और क्लिनिकल आकलन के आधार पर उसका डोज कम करके 10 से 14 दिन तक दिया जा सकत है। बीमारी के लक्षण मिलने के शुरुआती तीन से पांच दिनों तक स्टेरॉयड का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
दिशा-निर्देश में कहा गया है कि बिना लक्षण वाले या हल्के लक्षण वाले मरीजों में स्टेरॉयड का इस्तेमाल खतरनाक है। कोरोना संक्रमण के तेजी से फैलने खासकर ओमिक्रॉन वैरिएंट के प्रसार को देखते हुए विशेषज्ञ समिति ने विस्तृत गाइडलाइंस तैयार की है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक ओमिक्रॉन कम खतरनाक है, लेकिन मौजूदा कोरोना लहर को देखते हुए इससे सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
इससे पहले सरकार ने कहा कि 12-14 साल के बच्चों को कोविड-19 रोधी टीके लगाने के संबंध में फैसला वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर किया जाएगा। इस संबंध में विचार-विमर्श जारी है। नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ वी. के. पॉल ने एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि अगर कोई कोरोना वायरस से संक्रमित हैं तो वे तीन महीने के बाद दूसरी या एहतियाती खुराक ले सकते हैं।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर टीकाकरण शुरू किया गया है और यह सबसे संवेदनशील लोगों की रक्षा करने की धारणा पर आधारित है। इसलिए जैसे-जैसे वैज्ञानिक साक्ष्य मिलेंगे, हम राष्ट्रीय कोविड टीकाकरण कार्यक्रम के दायरे का विस्तार करेंगे।