देश में कोरोना महामारी की दूसरी लहर का कहर जारी है। महामारी हर रोज लाखों लोगों को अपनी चपेट में ले रही है और हजारों की जान ले रही है। इस बीच, नई दिल्ली स्थित न्यूजीलैंड उच्चायोग में लंबे समय तक अपनी सेवा देने वाले उस कर्मचारी की कोरोना से मौत हो गई है, जिसके लिए दूतावास ने मई की शुरुआत में यूथ कांग्रेस से ऑक्सीजन की मदद मांगी थी। इस पर राजनीतिक घमासान छिड़ गया था। इसके बाद न्यूजीलैंड के विदेश मंत्रालय ने उचित चैनलों के माध्यम से मदद नहीं मांगने के लिए माफी मांगी थी।
न्यूजीलैंड की विदेश मंत्री नानिया महुता ने कर्मचारी की मौत की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि उच्चायोग ने सोशल मीडिया पर जिस कर्मी के लिए मदद मांगी थी, उसकी मौत हो गई। हमारे देश की ओर से जितना हो सका, हमने उसकी मदद की पूरी कोशिश की। उन्होंने कहा कि वर्ष 1986 में जब सर एडमंड हिलेरी उच्चायुक्त थे, तब से कर्मचारी उच्चायुक्त में अपनी सेवाएं दे रहा था। हम इतने लंबे समय तक काम और समर्थन के लिए आभारी हैं।
क्या था मामला?
बता दें कि दिल्ली स्थित न्यूजीलैंड उच्चायोग ने 2 मई को एक ट्वीट कर अपने एक कर्मचारी के लिए ऑक्सीजन की मांग की थी। इस ट्वीट में विपक्षी पार्टी कांग्रेस के यूथ विंग यूथ कांग्रेस को टैग कर अपील की थी। हालांकि, उच्चायोग ने इस ट्वीट को थोड़ी देर बाद डिलीट कर दिया था। ट्वीट डिलीट करने के कदम पर सवाल उठा था कि क्या न्यूजीलैंड उच्चायोग पर भारत सरकार की ओर से ट्वीट डिलीट करने का दबाव डाला गया था? हालांकि, बाद में उच्चायोग ने एक अन्य ट्वीट कर सफाई दी थी कि हमारी अपील का गलत मतलब निकाला गया, जिसके लिए हम माफी मांगते हैं।
इस घटना पर विदेश मंत्रालय खफा नजर आया। विदेश मंत्रालय ने ट्वीट कर कहा था कि चीफ ऑफ प्रोटोकॉल एंड हेड्स ऑफ डिविजन्स सभी उच्चायोगों और दूतावासों के संपर्क में बने हुए हैं। विदेश मंत्रालय सभी मेडिकल मांगों, खासकर कोविड से जुड़ी मांगों को लेकर लगातार सक्रिय है। महामारी की स्थिति को देखते हुए सभी से अपील है कि वो जरूरी सप्लाई को इकट्ठा करने की कोशिश न करें।