कोरोना मरीजों की संख्या सप्ताह के अंत यानी बाकी चार दिन में 10 हजार तक पहुंच सकती है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार दो दिनों में मरीजों में 34 फीसदी बढ़ोतरी के साथ आंकड़ा 4,789 हो गया। हालांकि बढ़ोतरी पहले के दो दिनों की तुलना में सबसे धीमी है।
इस दौरान 40 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई और आंकड़ा 3,577 पहुंच गया था। कयास लगाया जा रहा था कि बुधवार शाम तक मरीजों की संख्या पांच हजार के पार होगी, लेकिन दोपहर तक ही पांच हजार से ज्यादा मरीज हो गए। लॉकडाउन के 15 दिन बाद भी संक्रमण में इजाफा जारी है।
ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि चार दिन में मरीजों की संख्या दोगुनी हो सकती है। इसका सीधा असर अस्पतालों पर पड़ेगा। मरीजों की अत्यधिक भीड़ से अव्यवस्था पैदा हो सकती है। जानकारों का मानना है कि जांच स्तर बढ़ेगा तो संक्रमितों की संख्या भी बढ़ेगी।
कोरोना जांच को लेकर भले सवाल खड़े हो रहे हों, लेकिन केंद्र सरकार अमेरिका और इटली की तरह जांच पर काम कर रही है। इन देशों में कोरोना का असर भारत की तुलना में कई गुना ज्यादा है लेकिन वहां भी जांच संक्रमण प्रभावित इलाकों में सबसे ज्यादा की गई। इसी मॉडल पर केंद्र ने लॉकडाउन के दूसरे सप्ताह में हॉटस्पॉट इलाकों में जांच का दायरा बढ़ाया।
सरकार ने 1 से 7 अप्रैल के बीच तीन गुना रफ्तार से जांच कराई। इस सप्ताह प्रति 100 सैंपल में पॉजिटिव मरीज औसतन 2.3 से 5.7 फीसदी मिले हैं। 21 दिन के लॉकडाउन से हपले विदेश से आने वाले या उनके संपर्क में आए लोगों की ही जांच हो रही थी। फिलहाल सरकार ने विदेशों से आने वाले और उनसे संपर्क में आने वालों के अलावा हॉटस्पॉट स्क्रीनिंग, जांच और घर-घर सर्वे तक कराया जा रहा है।
बुधवार को आईसीएमआर के मुख्य महामारी विशेषज्ञ डॉ.रमन आर गंगखेड़कर ने बताया, अब तक 1,21,271 सैंपल की जांच हुई है। मंगलवार को 13,345 लोगों की जांच की गई। इनमें से 2,267 की जांच निजी लैब में हुई। फिलहाल आईसीएमआर के तहत 139 सरकारी और 65 निजी लैब में जांच जारी है।