रबी की फसल को बाजार में आना है, खरीफ की फसल की बुआई होनी है। जुलाई, अगस्त तक का महीना खेती, खलिहानी के लिए सुनहरे काल के रूप में देखा जाता है। गुजरात, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश समेत तमाम राज्यों में गेहूं की कटाई, मड़ाई, अनाज को मंडी में लाने का समय है। दलहन, तिलहन की भी खरीद-फरोख्त होनी है।
केंद्र सरकार और राज्यों के स्तर पर महसूस किया जा रहा है कि यदि इसमें किसी तरह का गतिरोध आया तो देश की ग्रामीण अर्थ व्यवस्था बैठ जाएगी। खेतिहर मजदूरों के भूखे मरने की नौबत आ जाएगी और इतने बड़े बोझ को सरकारें अपने बूते नहीं संभाल सकती। इसी तरह से खरीफ की बुआई के लिए किसानों को कृषि यंत्र, बीज, खाद समेत काफी कुछ चाहिए। लिहाजा इसे जुड़े बाजार, कल-कारखाने को कुछ शर्तों के साथ खोलने की अनुमति देनी होगी।
30 अप्रैल तक लॉकडाउन, जनता करेगी पालन, सरकार करेगी निगरानी
प्रधानमंत्री अपने संबोधन में जनता को उसकी जिम्मेदारी बताते हुए लॉकडाउन का ईमानदारी से पालन करने का अनुरोध करेंगे। सूत्र बताते हैं कि लॉकडाउन-2 में सरकार की भूमिका मॉनिटरिंग करने, लॉकडाउन का पालन करने, मास्क, गमछा, तौलिया मुंह पर बांधकर ही निकलने को सुनिश्चित कराने पर रहेगी। ताकि कोविड-19 के संक्रमण के फैलाव को रोका जा सके।
कर्नाटक, केरल, यूपी, पंजाब, महाराष्ट्र, राजस्थान समेत तमाम राज्यों के साथ-साथ केंद्र सरकार के शीर्ष अधिकारियों का मानना है कि पूरे देश में कोविड-19 के हॉटस्पॉट के साथ विशेष ट्रीटमेंट की जरूरत है। ऐसे इलाकों में सोसायटियों आदि में जाकर बड़े पैमाने पर लोगों की स्क्रीनिंग कराने, संक्रमण के संदेहास्पद लोगों को घरेलू क्वारंटीन या क्वारंटीन केयर सेंटर भेजने का कदम उठाने की जरूरत है। इसके लिए ऐसे क्षेत्रों में आवाजाही को पूरी तरह से बंद करके यहां लॉकडाउन का सख्ती से पालन कराया जाने पर जोर दिया जाएगा।
जिन जिलों में एक भी संक्रमित नहीं मिला है, उन्हें भी इससे महफूज रखने की जरूरत है। इसकी जिम्मेदारी राज्य सरकारों की रहेगी। इसलिए राज्यों से लॉकडाउन फेस-2 का इस तरह से मॉडल तैयार करने को कहा जा रहा है कि उनके यहां संक्रमण और न फैले। जहां संक्रमण नहीं है, वहां लोगों को परेशानी न हो और जहां संक्रमण का फैलाव हुआ है, उसे नियंत्रित किया जा सके। इसमें किसी तरह की कोताही अच्छी नहीं होगी।