देश में कोरोना वायरस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। देश के तीन प्रमुख शहरों ने सामने आ रहे नए मामलों को देखते हुए अपनी कमर कस ली है। अनुमान लगाया है कि अनलॉक 1.0 के बाद इस महीने के आखिर तक संक्रमितों की संख्या मुंबई में 80 हजार, दिल्ली में एक लाख और चेन्नई में 71 हजार तक पहुंच सकती है। इसलिए तीनों शहरों के अधिकारियों ने अपने स्वास्थ्य सुविधाओं की क्षमताओं को बढ़ाने का काम शुरू कर दिया है।
देश में आर्थिक गतिविधियों को फिर से सुचारु रूप से चलाने के लिए सरकार ने अनलॉक 1.0 में छूट प्रदान की, इसका नतीजा यह हुआ है कि देश के कई राज्यों में कोरोना वायरस के मामलों में तेजी आ गई है। राज्य सरकारों के साथ साझा किए गए स्वास्थ्य मंत्रालय के नवीनतम विश्लेषण के अनुसार, मुंबई, दिल्ली और चेन्नई में देश के आधे से अधिक मामले है। ये शहर देश के 65 सबसे ज्यादा कोविड-19 प्रभावित जिलों में से हैं।
बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) मुंबई में कोविड-19 मामलों को संभाल रही है। बीएमसी का अनुमान है कि यदि इसी तरह की वृद्धि जारी रहती है, तो देश की आर्थिक राजधानी में जून के अंत तक लगभग 80,000 मामले होंगे और जुलाई के मध्य तक 100,000 से अधिक मामले सामने आ चुके होंगे।
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बीएमसी के अतिरिक्त नगर आयुक्त सुरेश काकानी ने कहा कि पिछले महीनों में संख्या स्थिर हो गई। लेकिन यह इतनी कम नहीं है कि हमें चिंता में न डाले। पिछले महीनों में मुंबई में हर रोज 1000 से 1700 के करीब संक्रमण के मामले सामने आ रहे थे। उन्होंने कहा कि संख्या अभी के लिए स्थिर हो गई है, लेकिन हम संतुष्टि बिंदु का अनुमान नहीं लगा सकते हैं। हमें एक सप्ताह और इंतजार करना होगा।
मुंबई की तुलना में चेन्नई में मामलों की संख्या कम है, लेकिन तमिलनाडु के 70 फीसदी मामले यहीं रिपोर्ट किए गए हैं। तमिलनाडु सरकार ने 15 जून को, शुक्रवार से महीने के आखिर तक चेन्नई और तीन आस-पास के जिलों चेंगापट्टू, तिरुवल्लुर और कांचीपुरम में लॉकडाउन की घोषणा की। दरअसल, मामलों में लगातार वृद्धि, मौतों में वृद्धि और सामाजिक दूरी बनाए रखने और मास्क पहनने में सार्वजनिक सहयोग की कमी के बाद लॉकडाउन लागू किया गया।
24 मार्च को पहला मामला सामने आने के बाद, 7 जून तक यानी कि अनलॉक 1.0 शुरू होने से एक दिन पहले तक चेन्नई में राज्य के कुल 31,667 मामलों में से 22,149 मामले सामने आए थे। 10 दिन बाद, चेन्नई ने 35,000 संक्रमितों की संख्या को पार किया, जबकि तमिलनाडु ने 50,000 का आंकड़ा पार किया। इस महीने, राज्य में हर दिन एक हजार के करीब मामले सामने आए हैं, जिनमें से अधिकतर मामले चेन्नई में रिपोर्ट किए गए हैं।
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चेन्नई में हर रोज होने वाली कोरोना जांच को लेकर कोई डाटा नहीं दिया गया है, लेकिन माना जा रहा है कि यहां हर रोज पांच हजार के करीब जांच हो रही है। स्वास्थ्य बुलेटिन के अनुसार, 19 जून तक शहर में एक लाख 60 हजार जांच की जा चुकी है। हालांकि, विशेषज्ञों ने कहा है कि संक्रमण को रोकने के लिए चेन्नई में हर रोज 10 हजार जांच की जानी चाहिए।
दिल्ली में अनलॉक 1.0 के बाद संक्रमण के पुष्ट मामलों की संख्या छह फीसदी से बढ़कर नौ फीसदी तक पहुंच गई है। नौ जून को, दिल्ली सरकार ने अनुमान लगाया था कि 30 जून तक कुल कोविड-19 मामले लगभग 1,00,007 और 15 जुलाई तक 2,24,537 हो जाएंगे।
मामलों में हो रही वृद्धि से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने जुलाई के अंत तक वर्तमान में 10,889 बिस्तरों की संख्या को बढ़ाकर 80,000 बिस्तरों तक करने की योजना बनाई है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि सरकार ने 40 होटलों (4,628 बिस्तरों) और 77 बैंक्वेट हॉल (11,229 बिस्तरों) की पहचान की है, जिन्हें कोविड-19 देखभाल केंद्रों (15,800 बिस्तरों को तुरंत जोड़ने) में बदल दिया गया है।