फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Coronavirus: बच्चों के लिए कितना घातक है कोरोना का नया वैरिएंट, क्यों आते हैं वायरस कैरियर की भूमिका में

Thu, 12 Jan 2023 03:52 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सफदरजंग हॉस्पिटल के कम्यूनिटी मेडिसिन के प्रमुख डॉ. जुगल किशोर ने अमर उजाला को बताया कि भारत में कोरोना के पहले की लहरों का आंकलन किया जाए, तो सामने आता है कि इनमें बच्चे बहुत ज्यादा प्रभावित नहीं है...
विज्ञापन
Coronavirus: बच्चों को कोरोना वैक्सीन - फोटो : ANI (File Photo)
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

चीन, अमेरिका सहित कई देशों में कोरोना वायरस महामारी की नई लहर ने दुनिया भर की चिंता बढ़ा दी है। भारत के भी कई राज्यों में कोरोना के नए वैरिएंट का संक्रमण दिखाई देने लगा है। ऐसे में कोविड-19 वायरस को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है और विदेश से आने वाले यात्रियों की एयरपोर्ट पर ही जांच की जा रही है। इस बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी लोगों को कोरोना की इस ताजा लहर को लेकर सचेत किया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो भारत में 90 फीसदी से ज्यादा लोगों को कोरोना वैक्सीन की दोनों खुराक लग चुकी हैं। ऐसे में कोविड के गंभीर मरीज आने की संभावना कम नजर आ रही है। लेकिन भारत में अभी बच्चों की एक संख्या ऐसी भी है, जिसे कोरोना की कोई वैक्सीन नहीं लगी है। ऐसे में बार-बार सवाल उठ रहा है कि क्या यह नया वैरिएंट बच्चों के लिए कितना खतरनाक हो सकता है।

विज्ञापन


सफदरजंग हॉस्पिटल के कम्यूनिटी मेडिसिन के प्रमुख डॉ. जुगल किशोर ने अमर उजाला को बताया कि भारत में कोरोना के पहले की लहरों का आंकलन किया जाए, तो सामने आता है कि इनमें बच्चे बहुत ज्यादा प्रभावित नहीं है। कोरोना के चाहे डेल्टा, कप्पा, अल्फा वैरिएंट हो या ओमिक्रोन के कई सारे सब वैरिएंट्स आए हैं, लेकिन बच्चों पर इनका प्रभाव बहुत कम देखने को मिला। इसकी एक बड़ी वजह ये है कि बड़ों के मुकाबले बच्चों में इम्यूनिटी बेहतर होती है। फिलहाल भारत के मामले में ओमिक्रोन के सब वैरिएंट बीएफ.7 का असर चीन से अलग हो सकता है। चीन में ओमिक्रोन का बीएफ.7 वैरिएंट कहर बरपा रहा है, वहां ऐसे हालात जीरो कोविड पॉलिसी की वजह से हुए हैं। वहां कोरोना की कई लहरों के बावजूद लोग संक्रमित नहीं हो पाए और उनके अंदर इम्यूनिटी नहीं बन पाई। इसके अलावा चीन की वैक्सीन भी कम कारगर थी।

डॉ. किशोर का कहना है कि कोविड की पहले वाली वेव में बच्चे सुरक्षित रहे और बड़ों पर ज्यादा प्रभाव पड़ा है। अभी दो साल में वयस्कों को वैक्सीन लग गई है, लेकिन ज्यादातर बच्चे वैक्सीन नहीं लगवा पाए हैं। इसलिए इस बच्चों को लेकर ज्यादा सचेत रहने की जरूरत है। आज देश के 90 फीसदी से ज्यादा जनसंख्या को कोरोना की दोनों वैक्सीन लग चुकी है। इसके अलावा जिन लोगों ने कोरोना की वैक्सीन नहीं भी ली है, वे भी कोरोना की किसी न किसी लहर में और खासतौर पर तीसरी लहर में ओमिक्रोन वैरिएंट के दौरान संक्रमित हो चुके हैं। ऐसे में अधिकांश लोगों के अंदर कोरोना को लेकर रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो चुकी है। वहीं वैक्सीन जनित इम्यूनिटी और संक्रमण के कारण उत्पन्न पैथोजेनिक इम्यूनिटी पैदा होने से हाइब्रिड इम्यूनिटी भी बन चुकी है। लेकिन कुछ मामले ऐसे भी देखने में आए हैं कि जिनके माता-ता ने कोरोना की एक भी डोज नहीं ली है, उनके बच्चे कोरोना संक्रमित हो रहे हैं। ऐसे में अगर देश में कोरोना संक्रमण फिर फैलता है, तो एक बड़ी आबादी के बच्चों के इससे संक्रमित होने का खतरा बढ़ जाएगा।

बच्चों के लिए कितना गंभीर है कोरोना?

देश-विदेश की कई संस्थाओं द्वारा की गई रिसर्च के मुताबिक, ज्यादातर बच्चों का इम्यून सिस्टम कोरोना वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी तैयार करने में वयस्कों की तुलना में जल्दी काम करता है। कई शोध में भी यह भी पाया गया है कि बच्चों की एंटीबॉडी का टारगेट वायरस की स्पाइक प्रोटीन होती है। स्पाइक प्रोटीन के जरिए ही वायरस सेल में प्रवेश के द्वार खोलता है। हालांकि हर उम्र के बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता अलग होती है, जैसे-गोद में रहने वाले बच्चे की तुलना में चलने-फिरने वाले बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता ज्यादा मजबूत होती है। अधिकतर मामलों में बच्चों में कोरोना के हल्के लक्षण या कोई लक्षण नहीं दिखते। हालांकि, बच्चे वायरस को फैलाने में कैरियर की भूमिका निभा सकते हैं।

भारत में भी कोरोना के एक्टिव केस

बुधवार 11 जनवरी को आए कोरोना वायरस संक्रमण के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, देशभर में पिछले 24 घंटे के दौरान कोविड-19 संक्रमण के 171 नए मामले आए, जिससे उपचाराधीन मरीजों की संख्या बढ़कर 2,342 हो गई। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के बुधवार सुबह आठ बजे जारी आंकड़ों के अनुसार, देश में संक्रमितों की संख्या बढ़कर 4,46,80,386 पर पहुंच गई है, जबकि मृतक संख्या 5,30,722 पर बनी हुई है। आंकड़ों के मुताबिक, देश में दैनिक संक्रमण दर 0.09 फीसदी और साप्ताहिक संक्रमण दर 0.11 फीसदी दर्ज की गई है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें