चीन, अमेरिका सहित कई देशों में कोरोना वायरस महामारी की नई लहर ने दुनिया भर की चिंता बढ़ा दी है। भारत के भी कई राज्यों में कोरोना के नए वैरिएंट का संक्रमण दिखाई देने लगा है। ऐसे में कोविड-19 वायरस को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है और विदेश से आने वाले यात्रियों की एयरपोर्ट पर ही जांच की जा रही है। इस बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी लोगों को कोरोना की इस ताजा लहर को लेकर सचेत किया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो भारत में 90 फीसदी से ज्यादा लोगों को कोरोना वैक्सीन की दोनों खुराक लग चुकी हैं। ऐसे में कोविड के गंभीर मरीज आने की संभावना कम नजर आ रही है। लेकिन भारत में अभी बच्चों की एक संख्या ऐसी भी है, जिसे कोरोना की कोई वैक्सीन नहीं लगी है। ऐसे में बार-बार सवाल उठ रहा है कि क्या यह नया वैरिएंट बच्चों के लिए कितना खतरनाक हो सकता है।
बच्चों के लिए कितना गंभीर है कोरोना?
देश-विदेश की कई संस्थाओं द्वारा की गई रिसर्च के मुताबिक, ज्यादातर बच्चों का इम्यून सिस्टम कोरोना वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी तैयार करने में वयस्कों की तुलना में जल्दी काम करता है। कई शोध में भी यह भी पाया गया है कि बच्चों की एंटीबॉडी का टारगेट वायरस की स्पाइक प्रोटीन होती है। स्पाइक प्रोटीन के जरिए ही वायरस सेल में प्रवेश के द्वार खोलता है। हालांकि हर उम्र के बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता अलग होती है, जैसे-गोद में रहने वाले बच्चे की तुलना में चलने-फिरने वाले बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता ज्यादा मजबूत होती है। अधिकतर मामलों में बच्चों में कोरोना के हल्के लक्षण या कोई लक्षण नहीं दिखते। हालांकि, बच्चे वायरस को फैलाने में कैरियर की भूमिका निभा सकते हैं।
भारत में भी कोरोना के एक्टिव केस
बुधवार 11 जनवरी को आए कोरोना वायरस संक्रमण के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, देशभर में पिछले 24 घंटे के दौरान कोविड-19 संक्रमण के 171 नए मामले आए, जिससे उपचाराधीन मरीजों की संख्या बढ़कर 2,342 हो गई। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के बुधवार सुबह आठ बजे जारी आंकड़ों के अनुसार, देश में संक्रमितों की संख्या बढ़कर 4,46,80,386 पर पहुंच गई है, जबकि मृतक संख्या 5,30,722 पर बनी हुई है। आंकड़ों के मुताबिक, देश में दैनिक संक्रमण दर 0.09 फीसदी और साप्ताहिक संक्रमण दर 0.11 फीसदी दर्ज की गई है।