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Coronavirus से बचाव के लिए वेंटिलेटर के ये ‘विकल्प’ पड़ सकते हैं भारी, बरतें सावधानी

Tue, 31 Mar 2020 06:09 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • वेंटिलेटरों की कमी के कारण हो रही विकल्पों की तलाश
  • सीपीएपी, 'बाईलेवल पॉजिटिव एयरवे प्रेशर' और ईसीएमओ तकनीकें आ रहीं विकल्प के तौर पर सामने
  • चलाने के लिए अतिरिक्त विशेषज्ञता भी एक चुनौती
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Coronavirus Ventilator - फोटो : Social Media
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विस्तार
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दुनिया में सभी देश कोरोना वायरस के संक्रमण को मात देने में लगे हैं। कोई दवा तैयार कर रहा है तो कहीं पर बहुत सख्ती के साथ लॉकडाउन लागू किया गया है। वेंटिलेटर, टेस्ट किट और फेस मास्क की मारामारी जारी है। सुपर पावर अमेरिका जैसे देश में भी वेंटिलेटर की कमी महसूस की जा रही है। कई जगह वेंटिलेटर के विकल्पों पर बातचीत होने लगी है।

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हालांकि ये विकल्प मौजूद हैं, लेकिन इनका इस्तेमाल करते वक्त कुछ सावधानियां नहीं बरती गई, तो यह कोरोना को मात देने की बजाए उसे बढ़ा भी सकते हैं।
 
'कंटीन्यूअस पॉजिटिव एयरवे प्रेशर', 'बाईलेवल पॉजिटिव एयरवे प्रेशर' और ईसीएमओ यानी एक्स्ट्राकोर्पोरियल मेंब्रेन ऑक्सिजनेशन आदि तकनीक, वेंटिलेटर के विकल्प के तौर पर सामने आ रही हैं।
 
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, हर छह में से एक मरीज को वेंटिलेटर की जरूरत पड़ती है और 80 फीसदी मामले साधारण या हल्के होते हैं, जिन्हें वेंटिलेटर की आवश्यकता नहीं पड़ती। अमूमन 13 फीसदी मामले गंभीर होते हैं और छह फीसदी केस अत्यंत गंभीर स्थिति में होते हैं।
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बीती 12 मार्च को प्रकाशित डब्लूएचओ की रिपोर्ट में कहा गया था कि कोरोना वायरस सरस-कोव 2 से पैदा हुआ है। सरस महामारी में लोगों की सांस लेने की प्रक्रिया बाधित हुई थी। अब वैसे ही कोरोना वायरस के ज्यादातर मामलों में लोगों के फेफड़ों के स्वस्थ ऊतक (टिश्यू) प्रभावित हो रहे हैं।

इसके चलते मरीज के सभी अंगों तक ऑक्सीजन युक्त रक्त की सप्लाई नहीं हो पाती। ऐसी स्थिति में मरीज को निमोनिया हो सकता है। इसके लिए मरीज के गले में एंडोट्रैचियल ट्यूब डालकर ऑक्सीजन पहुंचाई जाती है।

कंटीन्यूअस पॉजीटिव एयरवे प्रेशर' - फोटो : Amar Ujala

वेंटिलेटर का एक विकल्प हो सकता था सीपीएपी

'कंटीन्यूअस पॉजिटिव एयरवे प्रेशर' मशीन भी एक वेंटिलेटर की तरह काम करती है, लेकिन इसमें ट्यूब की जगह पर फेस मास्क, नेजल मास्क या हुड्स के जरिए मरीज को ऑक्सीजन दी जाती है। अमेरिका में कोरोना संक्रमण फैलने के शुरुआती दौर में 24 फरवरी को वॉशिंगटन के एक नर्सिंग होम 'लाइफ केयर सेंटर ऑफ किर्कलैंड' में जब कोरोना के केस आने लगे तो वहां सबसे पहले सीपीएपी ही इस्तेमाल में लाई गई।

वहां के मेडिकल एडमिनिस्ट्रेटर जिम विट्हने ने कहा कि यह मशीन सांस संबंधी बीमारियों से ग्रसित लोगों के लिए सबसे अच्छा अभ्यास है, लेकिन जल्द ही किंग काउंटी हेल्थ ऑफिशियल ने इसके इस्तेमाल पर रोक लगाने के आदेश दे दिए।

वैज्ञानिकों की मानें तो इस मशीन का इस्तेमाल वेंटिलेटर के विकल्प के तौर पर नहीं किया जा सकता है। वजह, मास्क लगाने वाला व्यक्ति जब सांस छोड़ता है, तो उसके साथ बहुत सूक्ष्म कणों के रूप में वायरस हवा में आ जाता है।

एक्स्ट्राकोर्पोरियल मेंब्रेन ऑक्सिजनेशन - फोटो : Amar Ujala

एक विकल्प हो सकता है 'बाईलेवल पॉजीटिव एयरवे प्रेशर' 

डेनवर के ज्यूविश नेशनल हेल्थ के पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केस विशेषज्ञ डॉक्टर जेम्स फिनिजेन ने 'बाईलेवल पॉजीटिव एयरवे प्रेशर' को सीपीएपी तकनीक से बेहतर विकल्प बताया है। इसमें किसी मरीज के सांस छोड़ने की प्रक्रिया को एक निर्धारित प्रेशर पर सेट किया जा सकता है।

इस वजह से मरीज की छोड़ी गई सांस में वायरस बाहर आने की संभावना बहुत कम रहती है। हालांकि इस तकनीक में भी मास्क का इस्तेमाल होता है, मगर कड़ी सावधानी बरती जाए तो सामान्य केसों में, जहां मरीज को सांस लेने में दिक्कत होती है, वहां इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।

ईसीएमओ (एक्स्ट्रा-कॉरपोरियल मेंम्ब्रेन ऑक्सीजनेशन) डिवाइस एक लाइफ सपोर्ट सिस्टम की तरह काम करती है। यह डिवाइस शरीर को उस वक्त ऑक्सीजन सप्लाई करने में मदद देती है, जब किसी मरीज के फेफड़े या दिल ठीक तरह से काम नहीं कर पाते।

इसकी खासियत यह है कि इसमें कोरोना वायरस की लीकेज का कोई डर नहीं रहता, मगर इसका उपकरण सेट करना व ऑपरेट करना काफी मुश्किल होता है। कारण, यह पहले रोगी के रक्त को खींचता है, फिर कार्बन डाइऑक्साईट को खत्म कर उसमें ऑक्सीजन जोड़ने के लिए एक उपकरण के माध्यम से द्रव को पास करता है।

अंत में रोगी के शरीर में वही रक्त वापस लौटा देता है। यही वजह है कि इसे चलाने के लिए विशेष एक्सपर्ट की जरूरत पड़ती है। इनकी संख्या दूसरे डॉक्टरों के मुकाबले बहुत कम होती है।

बाईलेवल पॉजीटिव एयरवे प्रेशर' - फोटो : Amar Ujala

कोरोना से लड़ाई में अपर्याप्त मात्रा में हैं वेंटिलेटर 

यूएसए में कोरोना के 1,64,359 केस सामने आ चुके हैं। नेशलन सेंटर फॉर बायोटेक्टिनकल इंर्फोमेशन के अनुसार, लगभग 62 हजार वेंटिलेटर हैं। यूके में कोरोना से ग्रसित मरीजों की संख्या 22,141 हैं, जबकि वेंटिलेटर करीब आठ हजार हैं।

वहीं, दूसरी ओर, आतंकवाद से प्रभावित पश्चिम अफ्रीका में स्थित छोटे से देश माली, जिसकी जनसंख्या 19 लाख है और कोरोना फैलता जा रहा है, वहां पर वेंटिलेटर की संख्या केवल 56 है।
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भारत में 40 हजार वेंटिलेटर हैं, इतने ही और के ऑडर भी दिए गए

स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक इस समय देश में करीब 40 हजार वेंटिलेटर हैं और नोएडा की एक घरेलू कंपनी एग्वा हेल्थकेयर को दस हजार वेंटिलेटर बनाने का ऑर्डर दिया गया है।

इनकी सप्लाई अप्रैल के दूसरे सप्ताह तक शुरू होने की उम्मीद है। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड को भी 30,000 वेंटिलेटर तैयार करने का ऑर्डर दिया गया है। इसके अतिरिक्त भारतीय ऑटो निर्माता कंपनियां भी वेंटिलेटर बनाने की तैयारी कर रही हैं।
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