केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए कोरोनरी स्टेंट को आश्वयक दवाओं की सूची में शामिल कर लिया है। इस कदम से जीवन रक्षक चिकित्सा उपकरणों को और अधिक किफायती बनाने में मदद मिलेगी।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह फैसला राष्ट्रीय सूची, 2022 में शामिल करने की समीक्षा के लिए गठित विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों पर लिया है। अब इस निर्णय के बाद नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (एनपीपीए) कोरोनरी स्टेंट की कीमत तय करेगी।
बता दें कि 13 सितंबर को जारी की गई आवश्यक दवाओं की राष्ट्रीय सूची में 34 नई दवाओं में कई कैंसर रोधी दवाएं, एंटीबायोटिक्स और टीके शामिल हैं। इसके तहत दवाओं की कुल संख्या 384 हो गई है।
क्या है स्टेंट
कोरोनरी स्टेंट का उपयोग अब लगभग सभी एंजियोप्लास्टी प्रक्रियाओं में किया जाता है। एक स्टेंट एक छोटा, विस्तार योग्य धातु जाल का तार है। धमनी को फिर से संकुचित या बंद होने से बचाने में मदद करने के लिए इसे धमनी के नए खुले क्षेत्र में रखा जाता है।
6 नवंबर को एसएनसीएम ने की थी सिफारिश
दरअसल, गत 6 नवंबर को दवाओं पर स्थायी राष्ट्रीय समिति (एसएनसीएम) ने कोरोनरी स्टेंट को आवश्यक दवाओं की राष्ट्रीय सूची (एनएलईएम), 2022 में दो श्रेणियों बेयर मेटल स्टेंट (बीएमएस) और ड्रग एल्यूटिंग स्टेंट (डीईएस) में शामिल करने के लिए अपनी सिफारिश प्रस्तुत की थी। एसएनसीएम ने कोरोनरी स्टेंट की अनिवार्यता, वर्गीकरण और अन्य प्रासंगिक पहलुओं पर विचार-विमर्श किया था।
समिति ने माना था कि कोरोनरी स्टेंट एक आवश्यक चिकित्सा उपकरण है, जिसे ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के तहत ‘दवा’ के रूप में अधिसूचित किया जाए। एसएनसीएम के वाइस चेयरमैन डॉ. वाई के गुप्ता ने कहा कि कोरोनरी स्टेंट को पहले एक विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के आधार पर एक अलग अधिसूचना के माध्यम से एनएलईएम, 2015 में शामिल किया गया था। दवाओं को लेकर एसएनसीएम ने अपनी रिपोर्ट पहले ही सौंप दी थी। इसे सरकार ने अब अपना लिया है।