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मिलिए जयपुर के कोरोना योद्धा से: बनना चाहते थे आईएएस अफसर, अभी बचा रहे लोगों को

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: Tanuja Yadav Updated Sat, 21 Mar 2020 07:15 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पीटीआई

दुनिया में बुरी तरह से फैले कोरोना ने लगभग सभी देशों को अपनी चपेट में ले लिया है। कोरोना से निपटने के लिए सरकार तो अपनी तरफ से लगातार कोशिशें कर ही रही हैं लेकिन देश में कुछ ऐसे भी योद्धा हैं जो कोरोना से लड़ने के लिए तत्पर है। ऐसा ही एक कोरोना योद्धा जयपुर एयरपोर्ट पर तैनात है जो लोगों की कोरोना टेस्टिंग कर रहे हैं। 32 वर्षीय राकेश सैनी जयपुर के सरकारी अस्पताल में मेडिकल ऑफिसर हैं लेकिन 28 जनवरी से जयपुर एयरपोर्ट पर काम कर रहे हैं।   



राकेश सैनी का कहना है कि जब इस मिशन के लिए डॉक्टर्स की टीम बन रही थी तब उन्होंने खुद की इच्छा से आने का फैसला किया था। कोरोना से लड़ने के लिए जिस समय लोग दूरी बना रहे थे तब हम गहराई से इसका आकलन कर रहे थे।

 

एयरपोर्ट में तैनात डॉक्टर्स की टीम में 5-6 डॉक्टर हैं। जब कोई अंतरराष्ट्रीय विमान से आता है तो डॉक्टर की टीम उसकी थर्मल टेस्टिंग करती है, उस समय ज्यादातर लोगों में बुखार के लक्षण दिखाई देते थे। यात्रियों से उनके खांसी, जुकाम से संबंधित लक्षणों और पिछली यात्रा के बारे में सवाल किए जाते थे। ऐसे यात्रियों को कोरोना से संबंधित सूचना दी जाती थी और एक हेल्पलाइन नंबर दिया जाता था।


सैनी के मुताबिक कोरोना के लक्षणों का पता लगने में कम से कम 28 दिन का समय लगता है। अगर किसी ने पैरासिटामोल ली है तो वह थर्मल स्क्रीनिंग से बच जाएगा। अगर किसी में कोरोना के लक्षण देखे जाते हैं तो उसे जल्द से जल्द अस्पताल में भर्ती कराया जाता है। व्यक्ति के कोरोना से संक्रमित हो जाने पर मेडिकल टीम उस फ्लाइट के सभी यात्रियों की जांच करती है।


राकेश सैनी के परिवार वालों ने नौकरी के बारे में पता चलने पर आपत्ति जताई। परिवारवालों ने राकेश सैनी से खुद का ज्यादा से ज्यादा ध्यान रखने को कहा। हालांकि राकेश का कहना है कि वे लोगों की जांच करने से पहले रक्षा के जरूरी इंतजाम कर लेते हैं। मेडिकल की पढ़ाई करने की प्रेरणा राकेश सैनी को उनकी बड़ी बहन से मिली। राकेश ने जयपुर से एमबीबीएस की पढ़ाई की है। साथ ही स्टेट मेडिकल एग्जाम में 11वीं रैंक सुरक्षित की। राकेश ने अपने गांव में मलेरिया और डेंगू को लेकर लंबी लड़ाई लड़ी है। राकेश के प्रयासों के बाद उनके गांव में बड़ा सुधार देखने को मिला है। 


हालांकि राकेश सैनी आईएएस अफसर बनने चाह रखते हैं। उनका मानना है कि आईएएस बनकर किसी भी समस्या की जड़ तक पहुंचा जा सकता है। राकेश ने पांच बार आईएएस की परीक्षा दी जिसमें से 4 बार फाइनल इंटरव्यू तक पहुंचे लेकिन वो सपना पूरा नहीं हो पाया। वो बात अलग है कि अभी कोरोना से लड़ने वक्त वो एक तरह से देश की सेवा कर रहे हैं। 

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