सीमलवाड़ा के बीसीएमओ डॉ. नरेंद्र प्रजापत ने बताया कि ओड़ाफला तथा बेडफला टापू पर कुल 32 मकानों में 137 लोग रहते हैं। दोनों टापू सालभर पानी से घिरे रहते हैं। सामान्य दिनों में लोग चप्पू से चलने वाली नाव से आना-जाना करते हैं। बारिश के दिनों में पानी ज्यादा मात्रा में आने तथा तेज हवाओं के चलने के कारण इन लोगों का आना-जाना बंद हो जाता है। ऐसे में सभी परिवार वैक्सीन से वंचित थे। दोनों टापूओं पर रह रहे लोगों तक पहुंचना और उनका वैक्सीनेशन करना, एक चुनौती पूर्ण कार्य था, जिसे हमारे कोरोना वॉरियर्स ने पूरी लगन और मेहनत के साथ पूरा किया है। प्रभारी अधिकारी डॉ. चन्द्रवीर परमार के अनुसार, ओड़ाफला टापू पर बसे परिवारों को वैक्सीन लगाने के लिए पहले दिन मेडिकल टीम गई। टीम के सदस्य नाव में बैठकर ओड़ाफला टापू की ओर चल दिये थे, लेकिन हवा ज्यादा तेज होने से नाव हिचकोले खाने लगी थी। नतीजा, टीम को वापस लौटना पड़ा।
ऐसे में दूसरे दिन टीम फिर से जाने के लिए तैयार हुई। तेज हवाओं के बीच नाव हिचकोले खाने लगी। टापू तक पहुंचना चुनौती भरा कार्य बन गया। ऐसे में आशा सहयोगिनी कमला ने कमाल की हिम्मत दिखाई। एक बारगी तो हवाएं तेज चलने से टीम के सदस्यों के दिल की धड़कने बढ़ गई थीं, लेकिन किसी ने भी हिम्मत नहीं हारी। सबसे ज्यादा हिम्मत का काम तो नाव चला रही कमला ने किया। उसने न तो खुद हिम्मत हारी और न ही दूसरे सदस्यों को हारने दिया। कमला ने लगभग पौन घंटे तक चप्पू से नाव चलाकर पूरी टीम को टापू पर सुरक्षित पहुंचा दिया। वहां रहने वाले लोगों की भ्रांतियों को दूर कर उनका वैक्सीनेशन किया गया। जिला कलेक्टर सुरेश कुमार ओला ने कहा, डूंगरपुर जिले में दूर दराज के क्षेत्रों में और अथाह जल राशि के मध्य टापुओं पर बसे लोगों को वैक्सीनेशन करवाने के लिए कोरोना वारियर्स आशा सहयोगिनी कमला ने जो हिम्मत दिखाई है, वह उसकी कर्तव्य परायणता और काम के प्रति जज्बे को दर्शाता है।