कोविड-19 एप्रोप्रियेट बिहेवियर का मतलब है बार-बार कुछ समय के अंतराल पर हाथ धोना, दो गज की दूरी बनाए रखना और मास्क पहनना। वैक्सीन आने के बाद लोगों ने वैक्सीन लगवाई हो या नहीं लगवाई हो, लेकिन ये सबने मान जरूर लिया है कि अब मास्क पहनने की, दो गज की दूरी की, बार-बार हाथ धोने की जरूरत नहीं हैं।
बाजार खुल गए हैं, पांच राज्यों में चुनाव हो रहे हैं, कुंभ मेला चल रहा है, लोगों ने नौकरी पर जाना शुरू कर दिया है। चुनाव वाले प्रदेशों से जो तस्वीरें आ रही हैं, उनसे स्पष्ट है कि लोगों को अब कोविड19 के खिलाफ सावधानी बरतने की आदत ही नहीं रही है। नेता भी उसमें शामिल दिख रहे हैं। वायरस इस वजह से दोबारा आक्रामक दिख रहा है।
इस पर डॉक्टर जुगल किशोर कहते हैं कि इस तरह की बीमारी में मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी दो बातों पर निर्भर करती है। पहली - आम इंसान इस बीमारी के बीच, बचाव के लिए कैसे अपने व्यवहार में तब्दीली लाता है और दूसरी वायरस के व्यवहार में कैसी तब्दीली आती है।
डॉक्टर जुगल के मुताबिक तेजी से वायरस के फैलने की एक और वजह है वायरस के व्यवहार में बदलाव। वायरस में जो बदलाव हुए हैं, इसे म्यूटेंट कहा जा रहा है, वो उसे सक्षम बना रहा है तेजी से फैलने के लिए। भले ही बड़ी स्टडी इस बारे में ना हुई हो, लेकिन कुछ छोटी जीनोमिक स्टडी हुईं हैं, जो बताती हैं कि भारत में यूके स्ट्रेन और दक्षिण अफ़्रीका का स्ट्रेन आ चुका है।
महाराष्ट्र के सैंपल में इनके अलावा भी एक और म्यूटेशन पाया गया है, जिस पर स्टडी होनी है। सरकार ने खुद स्वीकार भी किया है कि पंजाब से जितने मामले सामने आ रहे हैं, उनमें म्यूटेंट वायरस भी हैं। यूके में देखा गया कि वहां का वेरिएंट ज्यादा तेजी से संक्रमण फैला रहा है।
चौथी वजह: आर नंबर बढ़ रहा है
डॉक्टर टी जैकब जॉन क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज वेल्लोर में वायरोलॉजी के रिटायर्ड प्रोफेसर हैं। वो कहते हैं कि कोरोना की पहली लहर और दूसरी लहर में बहुत अंतर है, जो साफ देखा जा सकता है। पहली लहर में कोरोना के मामले लॉकडाउन और लोगों के घर वापसी के बावजूद धीमी रफ्तार से हफ्ते दर हफ्ते बढ़ते गए।
लेकिन इस बार का ग्राफ देंखें तो मामले अचनाक बहुत तेजी से बढ़ हैं। इसका मतलब है कि संक्रमण की दर जिसे आर नंबर भी कहते हैं, वो तेजी से बढ़ा है। आर नंबर वायरस के रिप्रोडक्टिव नंबर को बताता है। डॉक्टर जॉन के मुताबिक, "पहली लहर के दौरान ये आर नंबर दो से तीन के बीच था लेकिन दूसरी लहर में ये तीन से चार के बीच हो गया है। ये इस बात का सूचक है कि दूसरी लहर का वायरस पिछले साल वाले वायरस के मुकाबले अलग है।
कुछ जानकार इस तेजी के पीछे एक वजह शहर की तरफ लोगों के वापस लौटने को भी मान रहे हैं। डॉक्टर जुगल भी ऐसा सोचने वालों में शामिल हैं। उनके मुताबिक दिल्ली, महाराष्ट्र और पंजाब वो राज्य हैं, जहां से बहुत बड़ी संख्या में लोग लॉकडाउन के दौरान अपने राज्य लौट गए थे। सब कुछ खुलने के बाद, वैक्सीन की वजह से लोग दोबारा से शहरों का रुख कर रहे हैं। शहरों में कोरोना बढ़ने का एक कारण ये भी हो सकता है।
तो आंशिक लॉकडाउन ही है उपाए?
24 मार्च 2020 को जब भारत में पूर्ण लॉकडाउन लगा था, उस वक्त भारत में कोरोना के कुल 500 मरीज भी नहीं थे। इस रणनीति की कई तरह की आलोचना हुई थी फिर लॉकडाउन लगाने की दलीलें दी गईं। इसका मकसद कोरोना वायरस के चेन ऑफ ट्रांसमिशन को तोड़ना है और हेल्थ सिस्टम को वायरस से निपटने के लिए तैयार करना है।
डॉक्टर जमील कहते हैं कि महाराष्ट्र या देश के दूसरे राज्यों के अलग-अलग शहरों में जो लॉकडाउन या नाइट कर्फ्यू और दूसरी तरह की पाबंदियां देखने को मिल रही हैं, फिलहाल उसका मकसद लोगों को नियम कानून का पालन कराना है। जरूरत के समय ही बाहर निकलें, बिना काम के मौज मस्ती के लिए नहीं निकलें। मास्क पहनें, दो गज की दूरी का पालन करें।
इस वजह से आंशिक तौर पर जहां मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, वहां पाबंदियां लगाई जानी चाहिए लेकिन पिछले साल पूर्ण लॉकडॉउन जो भारतवासियों ने देखा, वैसा लॉकडाउन अब लगा कर कुछ हासिल नहीं होगा। सरकार को तरीके से पाबंदियां लगा कर मामलों को एक जगह सीमित करने का प्रयास करना चाहिए, जैसे पहले कंटेनमेंट जोन बनाने की रणनीति बनाई थी।