कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के बीच आयुष मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान ने विशेष रूप से बच्चों की सेहत को ध्यान में रखते हुए बाल रक्षा किट तैयार की है। ये बाल रक्षा किट बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में सहायक है और इसके इस्तेमाल से बच्चों को संक्रमण के माहौल में भी सुरक्षित रखा जा सकता है।
अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान की निदेशक डॉ. तनुजा नेसारी के अनुसार, बच्चों को काढ़ा और अन्य दवाइयां लेने में समस्या होती है, इसलिए बाल रक्षा किट बनाई गयी है। इस किट में एक सिरप भी है, जिसके इस्तेमाल से बच्चों को तीसरी लहर के खतरे से बचाने में बहुत मदद मिल सकती है। ये सभी दवाएं उत्तराखंड में स्थित भारत सरकार के एक संयत्र इंडियन मेडिसिंस फार्मास्यूटिकल कॉर्पोरेशन लिमिटेड में निर्मित की गई हैं।
आयुष मंत्रालय के मार्गदर्शन में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान इसके पहले स्वास्थ्य रक्षा किट, आरोग्य रक्षा किट और आयु रक्षा किट भी बना चुका है जिसमें च्यवनप्राश, अणु तेल, संशमनी वटी और काढ़ा शामिल था। चूंकि काढ़ा कड़वा होता है और इसे लेने में बच्चों को परेशानी होती है, इसलिए काढ़े का सिरप बनाया गया है, जिसमें सर्दी, खांसी, ज़ुकाम से बचाने के लिए कुछ अन्य औषधियों का मिश्रण भी किया गया।
इस सिरप को तैयार करने में तुलसी, गिलोय, दालचीनी, मुलेठी, मुनक्का जैसी औषधियों का प्रयोग किया गया है। साथ ही इस किट में अणु तेल, सितोपलादि, च्यवनप्राश भी है, जिसके नियमित सेवन से बच्चों की रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ जाती है। इस किट को आयुष मंत्रालय की गाइडलाइंस को ध्यान में रखकर बनाया गया है। गौरतलब है कि भारत में अभी बच्चों के लिए कोई भी वैक्सीन नहीं आई है, ऐसे में ये किट बच्चों की सेहत को ध्यान में रखते हुए अहम साबित हो सकती है।
बाल रक्षा किट 16 साल की उम्र तक के बच्चों को दी जाएगी। दो नवंबर को राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के मौके पर दिल्ली के 10 हजार बच्चों को इसे मुफ्त बांटा जाएगा। इसके साथ ही हम 5,000 बच्चों को सुवर्णप्राशन (स्वर्ण प्राशन) भी करवाएंगे। इसके लिए हमने दिल्ली के सभी स्कूलों से संपर्क किया है, जो भी इच्छुक होंगे हम उन्हे ये मुहैया करवाएंगे। फिलहाल ये किट अभी आम लोगों के लिए बाज़ार में उपलब्ध नहीं है। कुछ समय बाद लोग इसे खरीद सकेंगे।