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Corona vaccine: लिवर सिरोसिस के मरीजों पर कोविशील्ड के असर की जांच शुरू

Mon, 22 Mar 2021 04:44 AM IST
Kuldeep Singh परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली
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एक स्वास्थ्य कर्मी को कोविशील्ड वैक्सीन का पहला टीका लगाते हुए - फोटो : PTI
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कोरोना वायरस से लिवर सिरोसिस मरीजों को बचाने के लिए जहां वैक्सीन पर जोर दिया जा रहा है। वहीं इन मरीजों पर वैक्सीन से पड़ने वाले वास्तविक असर को जानने के लिए डॉक्टरों ने देश का पहला अध्ययन करने का निर्णय लिया है।

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डॉक्टरों ने दो हजार से ज्यादा मरीजों के दो समूह बनाकर शुरू किया अध्ययन
इसके तहत लिवर सिरोसिस मरीजों को पुणे स्थित सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया के कोविशील्ड वैक्सीन की डोज दी जाएगी। मरीजों पर कोविशील्ड का असर पता करने के लिए दो अलग-अलग समूह में अध्ययन होगा। एक समूह में सिरोसिस के मरीज होंगे जबकि दूसरे समूह में सामान्य व्यक्तियों को रखा जाएगा।

अध्ययन के दौरान यह देखा जाएगा कि 28 दिन के अंतराल में दो खुराक देने के बाद लिवर सिरोसिस और सामान्य व्यक्तियों में कितनी एंटीबॉडी विकसित होती हैं। जानकारी के अनुसार भारत में हर साल 10 लाख लिवर सिरोसिस के मामले दर्ज होते हैं। सिरोसिस एक ऐसी अवस्था है जिसमें विभिन्न कारणों से लंबे समय में लिवर को होने वाला नुकसान, जिसकी वजह से उसमें घाव हो जाते हैं और वह काम करना बंद कर देता है।
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क्लीनिकल ट्रायल रजिस्ट्री ऑफ इंडिया के मुताबिक इस अध्ययन को पूरा होने में कम से कम छह माह का वक्त लगेगा। साथ ही 2200 लोगों को दो समूह के लिए पंजीकृत किया जाएगा। नई दिल्ली स्थित आईएलबीएस अस्पताल के डॉक्टरों ने अध्ययन शुरू किया है। डॉक्टरों के अनुसार हेपेटाइटिस और लंबे समय से शराब पीने की लत के चलते भी काफी नुकसान होता है। इसकी वजह से लिवर सिरोसिस लोगों में देखने को मिल रहा है। 

कोरोना वायरस से आठ गुना अधिक खतरा
कोरोना वायरस और लिवर सिरोसिस के मरीजों को लेकर अब तक दुनिया भर में कई अध्ययन सामने आए हैं, जिनके अनुसार अन्य मरीजों की तुलना में लिवर सिरोसिस के रोगी को कोरोना वायरस से सात से आठ गुना अधिक खतरा होता है। इन मरीजों में वायरस सबसे ज्यादा जानलेवा भी है। ऐसे में जरूरी है कि मरीजों को लिवर सिरोसिस के साथ संक्रमण से ही बचाया जा सके।

18 साल से कम आयु के मरीजों को नहीं किया है शामिल 
आईएलबीएस अस्पताल के निदेशक डॉ. शिव सरीन की निगरानी में होने वाले इस अध्ययन में 28 दिन के अंतराल से कोविशील्ड वैक्सीन दी जाएगी। दोनों ही समूह के लोगों को 0.5 एमएल डोज ही दी जाएगी। इस अध्ययन में 18 वर्ष से कम आयु वालों को शामिल नहीं किया जा रहा है।

सिरोसिस रोगियों के समूह में उन लोगों को शामिल किया जाएगा, जिनमेें पहले से कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडी न हो। साथ ही उन्हें हाल ही में बीमारी के बारे में पता चला हो। वहीं दूसरे समूह के लिए जरूरी है कि वह कभी संक्रमित न हुए हों और उन लोगों में हार्ट या श्वास से जुड़ी बीमारी नहीं होनी चाहिए।

इसलिए सरकार ने दी है अनुमति
नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल का कहना है कि लीवर सिरोसिस के रोगियों में कोरोना संक्रमण की गंभीरता को समझते हुए 45 से 59 वर्ष की आयु के रोगियों को वैक्सीन लगवाने की अनुमति दी है। उन्होंने कहा कि लीवर सिरोसिस के अलावा दूसरे रोगियों को भी अपनी सुरक्षा के लिए जल्द से जल्द वैक्सीन लगवा लेना चाहिए।

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