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टीकाकरण: दूसरी पीढ़ी के कोरोना टीकों की मदद से अभियान होगा आसान, जल्द आएंगे नाक-मुंह से दिए जाने वाले टीके

Thu, 11 Nov 2021 07:04 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला रिसर्च डेस्क, नई दिल्ली।

सार

डॉ. सौम्या ने कहा कि नाक और मुंह के टीकों का लाभ यह होगा कि लोग इसका इस्तेमाल खुद कर सकेंगे। मौजूदा कोरोना टीके को लगवाने के लिए लोगों को लंबी प्रक्रिया और इंजेक्शन के दर्द से नहीं गुजरना पड़ेगा।
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सौम्या स्वामीनाथन - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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कोरोना महामारी का अंत न दिखता देख वैज्ञानिक अब दूसरी पीढ़ी की टीकों के निर्माण पर निगाह बनाए हुए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की चीफ साइंटिस्ट डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने कहा है कि अब नेजल स्प्रे और ओरल वर्जन (नाक और मुख से दी जाने वाली) वैक्सीन के निर्माण पर जोर दिया जा रहा है।

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डॉ. सौम्या ने कहा कि नाक और मुंह के टीकों का लाभ यह होगा कि लोग इसका इस्तेमाल खुद कर सकेंगे। मौजूदा कोरोना टीके को लगवाने के लिए लोगों को लंबी प्रक्रिया और इंजेक्शन के दर्द से नहीं गुजरना पड़ेगा। नई पीढ़ी के टीके जब बाजार में उपलब्ध होंगे तो कई अड़चनें खत्म हो जाएंगी। उन्होंने बताया कि दूसरी पीढ़ी के 129 टीकों का क्लीनिकल ट्रायल लोगों पर चल रहा है। 194 टीकों का अभी लैबोरेटरी में परीक्षण चल रहा है। उन्होंने कहा कि खास बात यह है कि ये टीके मौजूदा टीकों की तुलना में वायरस के खिलाफ लड़ाई में अधिक असरदार और सुरक्षित हो सकते हैं।

कोई भी टीका 100 फीसदी सुरक्षित नहीं
डॉ. स्वामीनाथ का स्पष्ट कहना है कि कोई भी टीका 100 फीसदी सुरक्षित और असरदार नहीं होता है। कोई यह दावा भी नहीं कर सकता कि उनकी वैक्सीन 100 फीसदी असरदार है। हां टीका सून्य की तुलना में 90 फीसदी असरदार है तो यह रोग से बचाने में अहम भूमिका निभा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि अभी जो कोरोना के टीके लग रहे हैं वे ठीक हैं लेकिन उनपर भी हमें विचार करना होगा।
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नाक से दिया जाने वाला टीका असरदार क्यों?
डॉ. स्वामीनाथन का कहना है कि इन्फलुएंजा वैक्सीन नाक से दी जाती है। ऐसे में कोरोना की वैक्सीन जब नाक से दी जाएगी तो सबसे पहले नाक में एंटीबॉडीज बनेंगी। इससे वायरस को सांस के जरिए फेफड़ों तक पहुंचना मुश्किल होगा। नजीता यह होगा कि वायरस नेजल वैक्सीन लेने वालों के फेफड़ों तक नहीं पहुंच पाएगा और न ही मुश्किल खड़ी कर सकेगा। ऐसे में इस तरह का टीका अधिक प्रभावी हो सकता है।

टीके की दूसरी डोज के छह महीने बाद बूस्टर डोज देने का सही समय

  • भारत बायोटेक के चेयरमैन और कोवाक्सिन के निर्माता डॉ. कृष्णा एल्ला ने बुधवार को कहा कि दूसरी डोज के छह माह बाद बूस्टर डोज देने का सही समय है। इसके साथ ही उन्होंने नेजल वैक्सीन की विशेषता का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा नाक से दिए जाने वाले टीके का भंडारण और उत्पादन कोवाक्सिन की तुलना में आसान है।
  • पीएम कोवाक्सिन पर बात कर रहे हैं...डॉ. कृष्णा एल्ला ने कहा कि देश के पीएम कोवाक्सिन पर बात कर रहे हैं। वैज्ञानिकों को अब और क्या चाहिए। ये वैज्ञानिकों के लिए संतोषजनक है। इससे भारतीय विज्ञान की दुनिया पर बढ़ता भरोसा दिखता है। डॉ.एल्ला ने कहा कि भारत बायोटेक जिका वैक्सीन पर काम कर रही है जिसका पहले चरण का काम पूरा हो गया है।


एक दिन में ही 4 फीसदी मरीजों की मौत
देश में कोरोना के दैनिक नए मामलों में लगातार कमी दर्ज की जा रही है लेकिन संक्रमण के चलते मौतें काफी संख्या में बढ़ गई हैं। पिछले एक दिन में ही चार फीसदी मरीजों ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। जबकि इससे पहले तक यह दैनिक मृत्युदर एक फीसदी के आसपास ही दर्ज की जा रही थी। स्वास्थ्य मंत्रालय ने बुधवार को बताया कि पिछले एक दिन में कोरोना वायरस के 11,466 नए मामले सामने आए हैं और 460 लोगों की मौत हो गई है। इस दौरान 11961 मरीजों को स्वस्थ घोषित किया गया। इससे पहले बीते नौ नवंबर को देश में 10,126 नए मामले सामने आए थे, जो कि 266 दिनों में सबसे कम थे और इस बीच 332 (3.27 फीसदी) लोगों की मौत हुई थी। ब्यूरो

अब कोवाक्सिन को हांगकांग में मिली मान्यता
हांगकांग। हैदराबाद की फॉर्मा कंपनी भारत बायोटेक के टीके कोवाक्सिन को हांगकांग ने मान्यता दे दी है। मालूम हो कि दुनियाभर के 96 देशों ने भारत में इस्तेमाल हो रही कोविशील्ड और कोवाक्सिन को अपने यहां मंजूरी दे दी है। डब्ल्यूएचओ ने कुछ दिन पहले ही कोवाक्सिन को इमरजेंसी में इस्तेमाल होने वाले टीकों की सूची में डाला है।  एजेंसी

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