तीसरी लहर को लेकर 4 दावे और उनके आधार
1. आईआईटी हैदराबाद और कानपुर की रिसर्च में अगस्त का दावा
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) हैदराबाद और कानपुर के वैज्ञानिकों ने मैथेमेटिकल मॉडल के आधार पर तीसरी लहर का अनुमान लगाया है। आईआईटी हैदराबाद के माथुकुमाली विद्यासागर और आईआईटी कानपुर के मनिंदर अग्रवाल का कहना है कि अगस्त में तीसरी लहर तेज हो जाएगी। अनुमान है कि बेहतर स्थिति में संक्रमण के रोजाना एक लाख जबकि बदतर हालात में रोजाना डेढ़ लाख मामले सामने आ सकते हैं। केरल व महाराष्ट्र में संक्रमण के बढ़ रहे मामलों से अन्य राज्यों में भी हालात खराब हो सकते हैं।
इस मॉडल में तीन तरह के हालातों के बारे में बताया गया। पहला- तीसरी लहर का पीक अक्तूबर में आएगा। पीक 3.2 लाख केस प्रतिदिन का होगा। दूसरा- नए और अधिक संक्रामक वैरिएंट्स को ध्यान में रखा गया है। यह माना गया है कि कोई प्रतिबंध नहीं लगाए जाएंगे, तब पीक सितंबर में आ सकता है। पर इसमें हर दिन 5 लाख केस तक आ सकते हैं। तीसरा- अगर वायरस के प्रसार को रोकने के लिए कड़े प्रतिबंध लगाए गए तो क्या होगा? इसके तहत दूसरी लहर के मुकाबले पीक कमजोर होगा, पर यह भी पहली लहर के पीक से दोगुना यानी 2 लाख केस रोज तक पहुंचेगा।
2. आईसीएमआर का अनुमान- अगस्त के अंत में तीसरी लहर आएगी
इससे पहले इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने भी अगस्त में ही तीसरी लहर आने का दावा किया था। बताया गया कि वायरस अपना स्वरूप बदल रहा है। ऐसे में पाबंदियों में ढील की वजह से मामले एक बार फिर बढ़ेंगे। संस्था के डॉ. समीरन पांडा ने कहा था कि अगर कोरोना की तीसरी लहर आती है, तो यह अगस्त के अंत के आसपास किसी भी समय आएगी। उन्होंने यह भी कहा था तीसरी लहर कब आएगी और कितनी गंभीर हो सकती है, ये सभी सवाल परिस्थितियों पर निर्भर करते हैं जो पूरी तरह से समझ से परे हैं।
3. रायटर्स सर्वे में अक्तूबर में तीसरी लहर का दावा
न्यूज एजेंसी रायटर्स ने भी भारत में तीसरी लहर को लेकर सर्वे किया था। इसमें 3 से 17 जून के बीच 40 हेल्थकेयर विशेषज्ञ, डॉक्टरों, वैज्ञानिकों, वायरोलॉजिस्ट, एपिडेमियोलॉजिस्ट और प्रोफेसरों से अलग-अलग प्रश्नों पर उनकी राय जानी गई। इसमें महत्वपूर्ण बात यह सामने आई थी कि 100% यानी सभी विशेषज्ञों ने माना कि भारत में तीसरी लहर जरूर आएगी।
वहीं, 85% ने कहा कि अक्तूबर में तीसरी लहर आएगी। कुछ का मानना है कि अगस्त-सितंबर और कुछ ने नवंबर-फरवरी के बीच तीसरी लहर की आशंका व्यक्त की। अच्छी बात यह है कि 70% विशेषज्ञों को लगता है कि दूसरी लहर के मुकाबले तीसरी लहर काबू में रहेगी।
4. एसबीआई की रिपोर्ट में अगस्त के मध्य का समय
भारत में कोरोना को लेकर एसबीआई ने इस रिपोर्ट जारी की थी। इसमें दुनिया के अन्य देशों में कोरोना की दूसरी और तीसरी लहर की जुलना के आधार पर अनुमान लगाया गया। इसमें अनुमान लगाया गया था कि जुलाई के दूसरे हफ्ते में भारत में कोरोना के मामले कम हो जाएंगे हैं, लेकिन अगस्त के दूसरे पखवाड़े तक क्रमण बढ़ जाएगा। एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट 'कोविड -19: द रेस टू फिनिशिंग लाइन' में कहा गया कि वैक्सीनेशन इससे बचने का एकमात्र जरिया है, क्योंकि वैश्विक डेटा से पता चलता है कि औसतन, तीसरी लहर के मामले दूसरी लहर के समय पीक मामलों का लगभग 1.7 गुना हैं।