फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कोरोना: तीसरी लहर में न हो ऑक्सीजन की मारामारी, दिल्ली सरकार ने अब तक की है यह तैयारी

Mon, 14 Jun 2021 10:19 PM IST
सुरेंद्र जोशी अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

दिल्ली में 33 पीएसए ऑक्सीजन संयंत्र शुरू हो चुके हैं, लेकिन आवश्यकता से काफी कम है इनकी क्षमता। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार दिल्ली में मेडिकल ग्रेड ऑक्सीजन का उत्पादन और  बढ़ाने की जरूरत है। 
 
विज्ञापन
सांकेतिक चित्र - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन की कमी मरीजों के लिए जानलेवा साबित हुई थी। राजधानी में अब फिर से इस तरह की स्थिति कभी न बने, इसके लिए सरकार दिल्ली के अस्पतालों में लगातार ऑक्सीजन संयंत्र लगा रही है। 

विज्ञापन


अब तक राजधानी के विभिन्न अस्पतालों में 33 पीएसए ऑक्सीजन संयंत्र लगाए जा चुके हैं। इनकी सम्मिलित क्षमता 30 मीट्रिक टन से कुछ अधिक है। विशेषज्ञों की राय है कि दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन की अधिकतम मांग बढ़कर 700 मीट्रिक टन तक पहुंच गई थी। इसे देखते हुए मेडिकल ऑक्सीजन की उत्पादकता बढ़ाने की जरूरत है।   

अभी तक कितने ऑक्सीजन प्लांट्स लगे
दिल्ली सरकार अब तक 27 ऑक्सीजन पीएसए प्लांट्स अपने अस्पतालों में लगा चुकी है। इनमें से पांच ऑक्सीजन प्लांट्स मई महीने में ही काम करना शुरू कर चुके थे। इनमें धर्मशिला अस्पताल, आंबेडकर नगर अस्पताल, संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल, सत्यवादी राजा हरिश्चन्द्र अस्पताल और दीन दयाल अस्पताल शामिल हैं।  इनमें से कई का उदघाटन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने स्वयं किया था। इसके अलावा केंद्र सरकार ने छह ऑक्सीजन संयंत्र दिल्ली के अस्पतालों में लगा चुकी है। इनकी कुल क्षमता 8.1 मीट्रिक टन की है।
विज्ञापन


कितनी है संयंत्रों की क्षमता
जिन 27 ऑक्सीजन संयंत्रों को अभी तक लगाया गया है, इनकी कुल सम्मिलित क्षमता 22.1 मीट्रिक टन ऑक्सीजन प्रतिदिन की है। केंद्र सरकार के छह ऑक्सीजन संयंत्रों की क्षमता 8.1 मीट्रिक टन है। यानी कुल मिलाकर 33 ऑक्सीजन संयंत्रों के जरिये 30.2 मीट्रिक टन ऑक्सीजन का उत्पादन ही सुनिश्चित किए जा सका है।

पीक के समय 975 टन बताई थी जरूरत
बकि कोरोना की दूसरी लहर के पीक समय में दिल्ली सरकार ने ऑक्सीजन की अधिकतम जरूरत 975 मीट्रिक टन प्रतिदिन बताई थी। हालांकि, बाद में यह तथ्य सामने आया था कि किसी भी दिन अधिकतम 700 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की ही आवश्यकता पड़ी।

अगर दिल्ली में दुबारा कभी इसी तरह की स्थिति पैदा होती है तो ऑक्सीजन की यह मांग 700 मीट्रिक टन प्रतिदिन के आसपास हो सकती है। इस लक्ष्य को देखते हुए वर्तमान और भविष्य में लगाए जाने वाली कुल ऑक्सीजन संयंत्रों की क्षमता इसके आसपास भी नहीं होगी। विशेषज्ञों के अनुसार क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता है।   

किस कंपनी के प्लांट्स लगे
दिल्ली के अस्पतालों में उत्तम ग्रुप ऑफ कंपनीज के पीएसए संयंत्रों को लगाया गया है। दिल्ली सरकार ने दावा किया है कि ये ऑक्सीजन संयंत्र 13 हजार क्यूबिक मीटर शुद्ध मेडिकल ऑक्सीजन उत्पादन करने में समर्थ होंगे। आवश्यकता पर इनकी क्षमता को बढ़ाया भी जा सकेगा।  EN ISO: 13485 सर्टिफाइड ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट वातावरण में मौजूद हवा लेकर 'ऑन-डिमांड' ऑक्सीजन उत्पन्न कर सकते हैं और बेहद कम समय में मेडिकल ग्रेड ऑक्सीजन का उत्पादन करने में सक्षम हैं।
 
चूंकि यही कंपनी भारतीय सेना, यूएनडीपी, राजस्थान सरकार, उत्तराखण्ड सरकार और कई दिग्गज  कॉर्पोरेट कंपनियों को भी ऑक्सीजन मुहैया कराती है, इस क्षमता को देखते हुए ही दिल्ली सरकार ने अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट्स लगाने के लिए इस कंपनी का चयन किया है।

आनंद शर्मा, वाइस प्रेसीडेंट, मार्केटिंग, उत्तम ग्रुप ऑफ कंपनीज़ ने कहा है कि इन ऑक्सीजन प्लांट्स को रिकॉर्ड डेढ़ महीने के अंदर स्थापित किया जा सका है। अगर राजधानी को कभी ज्यादा मात्रा में ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है तो इतने ही समय में और अधिक संयंत्र भी लगाए जा सकेंगे।  

कैसे पूरी होगी आवश्यकता
किसी आकस्मिक मांग को पूरा करने के लिए दिल्ली सरकार राजधानी में ऑक्सीजन स्टोरेज की सुविधा बढ़ाने पर भी विचार कर रही है। इसके लिए 13.5 मीट्रिक टन क्षमता के तीन स्टोरेज टैंक राजधानी में स्थापित किए जाएंगे। इसके आलावा ऑक्सीजन को लाने, ले जाने के लिए विशेष क्रायोजेनिक टैंकर भी खरीदे जाएंगे।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें