ठाकरे ने कहा कि राज्य सरकार मामलों में वृद्धि और राज्य में स्थिति 'खतरनाक' होने के चलते शेष 20 प्रतिशत का उपयोग भी चिकित्सा के लिए निर्धारित करने पर विचार कर रही है। अगर कोई ऐसा समय आता है जब किसी की आजीविका छीनती है, तो नाराजगी होना लाजमी है, लेकिन यदि दुविधा यह है कि जीवन बचाएं या नौकरी तो जीवन को प्राथमिकता देना जरूरी है। ठाकरे ने कहा कि राज्य सरकार जांच की संख्या बढ़ा रही है और साथ ही संक्रमण के एक भी मामले को छुपा नहीं रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ई-आईसीयू खोलने और टेलीमेडिसिन का उपयोग बढ़ाने जैसे कदमों पर भी विचार कर रही है। हम पिछले एक साल से लोगों से कह रहे हैं। मुझे लगता है कि अगर सभी लोगों, चाहे निजी कार्यालय हों या दुकानें, काम करने के घंटों को पालियों में बांटने के हमारे निर्देशों को लागू किया होता तो शायद स्थिति इतने खतरनाक स्तर तक नहीं पहुंची होती।’’
महामारी से जंग में सियासत न हो
महामारी से निपटने के बारे में भाजपा नेताओं के दावे की ओर परोक्ष तौर पर इशारा करते हुए ठाकरे ने कहा कि कोरोना से जंग में कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए।