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कोरोना का कहरः अब बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा- सरकार पर आरोप से पहले लोग खुद संयम बरतें

Mon, 26 Apr 2021 06:12 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

  • कोरोना दूसरी लहर के बीच अदालतों में पहुंचे मामले
  • पहले मद्रास हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग को लगाई फटकार
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बॉम्बे हाईकोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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देश के दो हाईकोर्ट ने सोमवार को कोरोना की दूसरी लहर को लेकर अलग-अलग, लेकिन कठोर संदेश दिए। पहले मद्रास हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग को मौजूदा कोरोना कहर के लिए जिम्मेदार ठहराया। इसके बाद बाॅम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ ने कहा कि सरकार पर आरोप लगाने से पहले नागरिक कोविड-19 के नियमों का पालन करें, संयम और अनुशासन बरतें। 

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बता दें कि इससे पहले मद्रास हाईकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि कोरोना के मामले बढ़ने के लिए चुनाव आयोग का जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। कोर्ट ने तो यहां तक कि आयोग के खिलाफ हत्या का केस तक दर्ज करने और दो मई को होने वाली मतगणना तक रोकने की बात कह दी।

बहरहाल, बंबई उच्च न्यायालय ने सोमवार को कहा कि लोगों को कोविड-19 मामलों में वृद्धि के बीच सरकार को दोष देने से पहले संयम और अनुशासन दिखाना चाहिए। अदातल ने महामारी के संबंध में विभिन्न दिशा-निर्देश जारी करते हुए यह बात कही। 
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आधार कार्ड साथ रखें : अदालत
न्यायमूर्ति रवीन्द्र घुगे और न्यायमूर्ति बीयू देबदवार की पीठ ने लोक सेवकों, डॉक्टरों और पैरामेडिकल कर्मियों समेत सभी लोगों को घरों से बाहर निकलते समय आधार कार्ड साथ रखने और मास्क पहनने का निर्देश दिया। न्यायमूर्ति घुगे ने कहा कि नागरिकों के तौर पर हमें सरकार को दोष देने से पहले शालीनता और संवेदनशीलता का परिचय देना चाहिए। लोगों को संयम और अनुशासन दिखाना चाहिए।

लोग बाइक पर बिना मास्क के जा रहे हैं : कोर्ट
अदालत ने कहा कि योजनाएं और व्यवस्थाएं अच्छी होती हैं, लेकिन मनुष्य ही उन्हें नष्ट और समाप्त कर देते हैं। अदालत ने कहा कि हम युवाओं, लड़कों और लड़कियों को बिना किसी कारण इधर-उधर घूमते हुए देखते हैं। एक मोटरसाइकिल पर कहीं तीन-तीन तो कहीं चार-चार लोग बिना हेल्मेट और मास्क के आ जा रहे हैं।

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मास्क ठोड़ी से नीचे जाए तो केस दर्ज होना चाहिए : कोर्ट

अदालत ने कहा कि घर से बाहर निकलने वाले व्यक्ति को कम से कम नाक और मुंह ढकने वाला मास्क पहनना चाहिए। न्यायमूर्ति घुगे ने कहा कि ठोड़ी से नीचे मास्क पहनने वाले या मुंह अथवा ठोड़ी खोलकर चलने वाले लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया जाना चाहिए, क्योंकि ऐसे लोग अकसर कोरोना वायरस को फैलाने वाले बन जाते हैं।

अदालत ने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल का कोई सदस्य या कोई प्रभावशाली व्यक्ति लॉकडाउन उल्लंघनकर्ता की मदद करने के लिए अपने प्रभाव का उपयोग न करे। पीठ ने पिछले सप्ताह ऑक्सीजन तथा रेमडेसिविर इंजेक्शन की कमी और लोगों द्वारा लॉकडाउन पाबंदियों का पालन नहीं किए जाने आदि कोविड-19 महामारी से संबंधित मामलों पर स्वत: संज्ञान लिया था। अदालत ने कहा कि ऑक्सीजन और रेमडेसिविर इंजेक्शन के वितरण की सरकार की नीति में हस्तक्षेप करने की उसकी कोई मंशा नहीं है।
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