फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

COP29: जलवायु वित्त, जवाबदेही पर भारत का फोकस, बाकू में होने वाले सम्मेलन में नहीं जाएंगे पीएम मोदी

Sun, 10 Nov 2024 02:43 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

विशेषज्ञों का मानना है कि सम्मेलन में भारत की प्रमुख प्राथमिकताएं जलवायु वित्त पर विकसित देशों की जवाबदेही सुनिश्चित करने, कमजोर समुदायों के लिए मदद सुनिश्चित करने और एक समान ऊर्जा बदलाव को हासिल करना होगा।
विज्ञापन
2022 में सबसे ज्यादा जलवायु वित्त देने वाला देश भारत - फोटो : freepik
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सोमवार से शुरू हो रहे COP29 सम्मेलन में भारत जलवायु वित्त, जवाबदेही और कमजोर समुदायों को संरक्षण के मुद्दे पर फोकस करेगा। अजरबैजान के बाकू में होने जा रहे इस सम्मेलन में दुनिया भर के नेता और पर्यावरणविदों को शामिल होने की उम्मीद है। भारत की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सम्मेलन में भाग नहीं लेंगे और पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव भी अनुपस्थित रह सकते हैं। भारत के 19 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व केंद्रीय पर्यावरण और वन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह करेंगे। 
विज्ञापन


18-19 नवंबर को भारत करेगा सम्मेलन को संबोधित
सम्मेलन के दौरान भारत द्वारा 18-19 नवंबर को सम्मेलन को संबोधित किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि सम्मेलन में भारत की प्रमुख प्राथमिकताएं जलवायु वित्त पर विकसित देशों की जवाबदेही सुनिश्चित करने, कमजोर समुदायों के लिए मदद सुनिश्चित करने और एक समान ऊर्जा बदलाव को हासिल करना होगा। ऊर्जा, पर्यावरण और जल परिषद (सीईईडब्ल्यू) के सीईओ डॉ. अरुणाभ घोष ने इस बात पर जोर दिया कि कॉप29 को वादों से आगे बढ़कर विकसित देशों को नेट जीरो के लक्ष्य को पाने में तेजी लाने और अपनी वित्तीय प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए कहना चाहिए। उन्होंने कहा कि 'जलवायु वित्त सुसंगत, सुविधाजनक, उत्प्रेरक और विश्वसनीय होना चाहिए, और कॉप29 को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि यह सबसे कमजोर लोगों की रक्षा के लिए वास्तविक संसाधन और क्षमता प्रदान करे।'

कमजोर देशों को वित्तपोषण की सुविधा देने की मांग
इस वर्ष की कॉप29 की बैठक में जलवायु वित्त के लिए नए सामूहिक परिमाणित लक्ष्य (एनसीक्यूजी) के तय होने की उम्मीद है और इसके सालाना खरबों डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। कई विकासशील देशों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए यह आवश्यक है। केन्या के जलवायु परिवर्तन दूत अली मोहम्मद ने भी 'वित्त COP' की आवश्यकता पर बल दिया, जो जलवायु प्रभावों के अनुकूल होने के लिए पहले से ही संघर्ष कर रहे देशों के लिए ऋण बोझ को बढ़ाए बिना वित्तपोषण को प्राथमिकता देता है।
विज्ञापन


पिछले सम्मेलनों से हटकर, भारत COP29 में मंडप की मेजबानी नहीं करेगा। यह अनुपस्थिति ऐसे समय में भी आई है जब भारत बढ़ती ऊर्जा मांगों और आर्थिक विकास पर ध्यान केंद्रित करने के साथ एक विकासशील राष्ट्र के रूप में अपनी भूमिका को संतुलित कर रहा है, खासकर जब दुनिया उत्सर्जन को कम करने में नेतृत्व के लिए उभरती अर्थव्यवस्थाओं की ओर देख रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें