बीते माह मंगलुरू में हुए प्रेशर कुकुर विस्फोट मामले के मुख्य आरोपी को अधिकारियों और उसका इलाज कर रहे डॉक्टरों की सलाह पर बेंगलुरु के एक अस्पताल में स्थानांतरित किया गया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आरोपी मोहम्मद शरीक को शनिवार की सुबह छह बजे विक्टोरिया अस्पताल ले जाया गया।
शहर के बाहरी नागोरी इलाके में 19 नवंबर को प्रेशर कुकर में विस्फोट हो गया था। इस धमाके में आरोपी का शरीर 45 फीसदी तक जल गया था। विस्फोट में घायल हुए ऑटोरिक्शा चालक का इलाज यहां चल रहा है।
आतंकी संगठन इस्लामिक रेजिस्टेंस काउंसिल (आईआरसी) ने बाद में इस विस्फोट की जिम्मेदारी ली थी और अपने डार्कनेट पर एक और हमले की चेतावनी दी थी। मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी कर रही है। एजेंसी यहां अस्पताल में पहले ही उससे पूछताछ कर चुकी है।
इससे पहले शुक्रवार को कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मोहम्मद शारिक को बिना जांच के ही आतंकी करार दिया गया। सरकार बिना जांच के ऐसा कैसे कह सकती है। भाजपा के नेतृत्व वाली बसवराज बोम्मई पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि सरकार इन सब के जरिए लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। वहीं, भाजपा ने इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
क्या बोले डीके शिवकुमार
कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि पुलिस ने इस मामले में जांच किए बिना ही आरोपी को आतंकी बता दिया था। इस दौरान उन्होंने राज्य सरकार पर मतदाता डाटा चोरी करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि इससे लोगों का ध्यान भटकाने के लिए सरकार ऐसा कर रही है। उन्होंने कहा कि बोम्मई सरकार इतनी छोटी सी घटना को आतंकी साजिश करार दिया है। सवाल करते हुए डीके शिवकुमार ने कहा कि 'कौन आतंकवादी है? डीजीपी को कैसे पता चला कि वो आतंकवादी है? बिना जांच के उन्होंने कैसे फैसला कर लिया? उन्होंने क्या जांच की, उन्होंने इतनी जल्दबाजी क्यों की?'
उन्होंने आगे कहा,' क्या ये मुंबई जैसा अटैक था, पुलवामा जैसा था? वहां ऐसा कुछ नहीं था, किसी ने कोई गलती की होगी, लेकिन आपने उसे किस तरह प्रोजेक्ट किया, ये लोग वोटर्स का डाटा चुरा रहे थे, उससे ध्यान हटाने के लिए उन्होंने ये सब किया है।'
भाजपा ने किया पलटवार
कांग्रेस अध्यक्ष के इस बयान को राजनीति से प्रेरित बताते हुए भाजपा ने पलटवार किया। कर्नाटक के गृह मंत्री अरागा ज्ञानेंद्र ने कहा कि डीके शिवकुमार का यह बयान आलोचना के योग्य है। वह आगामी विधानसभा चुनाव में अल्पसंख्यक वोट हासिल करने के लिए ऐसी राजनीति कर रहे हैं।