जड़ों को सहेज रहे कांग्रेसी
उत्तर प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विश्व विजय सिंह ने पार्टी की गतिविधियों पर टिप्पणी करते हुए अमर उजाला से कहा कि एक सोची-समझी साजिश के अंतर्गत देश में गांधी-नेहरु के विचारों को खलनायक की तरह पेश करने की कोशिश की जा रही है। ऐसे में हमारी कोशिश केवल उन्हीं लोकतांत्रिक मूल्यों को बचाने की है जो इस देश की सांस्कृतिक पहचान रहे हैं और जिनके बल पर आज तक इस देश का लोकतंत्र सफलतापूर्वक चलता आ रहा है। उन्होंने कहा कि गांवों-कस्बों के बीच आज भी इस विचारधारा को न केवल स्वीकृति मिल रही है, बल्कि लोग खुशी के साथ उनके साथ जुड़ भी रहे हैं।
जनता को अपनी प्राथमिकता तय करने का समय
क्या आने वाले चुनाव में कांग्रेस की यह कोशिश राजनीतिक परिणाम में परिवर्तित हो सकेगी? अमर उजाला के इस प्रश्न पर कांग्रेस नेता ने कहा कि विधानसभा चुनाव के पहले भी कांग्रेस लोगों की लड़ाई लड़ रही थी और आज खराब राजनीतिक परिणाम आने के बाद भी वह लोगों के मुद्दे लेकर सड़कों पर है। कोरोना काल में विपक्ष की तरफ से केवल कांग्रेस लोगों की मदद करने के लिए सामने आई थी, जबकि उस समय भी दूसरे विपक्षी दल अपने घरों में बैठे हुए थे। आज महंगाई-बेरोजगारी के मुद्दे पर कांग्रेस को छोड़कर पूरा विपक्ष मौन है। अब जनता को यह तय करना चाहिए कि वह किस तरह के राजनीतिक दलों को अपना समर्थन देना सही समझती है।
फिर हो सकती है कांग्रेस की वापसी
यूपी में प्रमुख विपक्षी दल बसपा लगभग सिमटती हुई दिख रही है, तो समाजवादी पार्टी में अंतर्कलह बढ़ता जा रहा है। उसके पारंपरिक मुसलमान वोटर भी मुसलमानों के मुद्दे पर उसके रूख से नाराज हैं और पार्टी के शीर्ष नेताओं में भी परस्पर सामंजस्य में कमजोरी दिख रही है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यदि कांग्रेस लोगों का विश्वास जीत पाती है और दलित, पिछड़े और मुसलमान मतदाताओं का एक वर्ग उसकी तरफ वापस लौटता है तो यूपी में कांग्रेस की किस्मत दुबारा खुल सकती है। कांग्रेस नेता इसी उम्मीद में अपनी कोशिश जारी रखे हुए हैं।