बैठक में प्रदेश अध्यक्ष की राय के खिलाफ पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा, पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी सैलजा आदि अन्य वरिष्ठ नेताओं का कहना था कि जब राज्य में 50 साल से ऐसा नहीं किया गया है तो नई परंपरा शुरू करना बिल्कुल उचित नहीं है। उनका तर्क था कि छह नगर निगमों के मेयर के साथ दो नगर परिषद के चुनाव हैं जिसमें शहरी मतदाताओं की अहम भूमिका है।
उनका कहना था कि पार्टी की शहरी इलाकों में मजबूत पकड़ है। ऐसे में एक उम्मीदवार को चुनाव चिह्न देने से बड़ी संख्या में बागियों की नाराजगी झेलनी होगी और पार्टी का मत बंट जाएगा। प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर का तर्क था कि पार्टी को चुनाव चिह्न के साथ अपने उम्मीदवार उतारने चाहिए। शहरी इलाकों में पार्टी मजबूत है और वर्तमान खट्टर सरकार से नाराज है इसका फायदा मिलेगा और विधानसभा चुनाव के लिए माहौल बनेगा।